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नोएडा: वेंटिलेटर मिल जाता तो बच जाते पापा, जीवनभर रहेगा अफसोस

Mon, 17 May 2021 05:28 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Mon, 17 May 2021 05:28 PM IST
सार

बेटी जनप्रिया ने बताया कि पूरा परिवार संक्रमित हो गया था। धीरे-धीरे मां, भाई और मैं ठीक हो गए थे, लेकिन पापा को लगातार सांस की परेशानी बढ़ती जा रही थी। जब घर पर थे तो उनका ऑक्सीजन लेवल ठीक था, लेकिन परेशानी बढ़ने पर उनको डेल्टा टू स्थित शर्मा अस्पताल लेकर गए।

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Noida coronavirus daughter ordeal for her father treatment ventilator could not be arranged always regret for it
- फोटो : social media

विस्तार

पापा को अगर वेंटिलेटर मिल जाता तो उनकी जान बच जाती। एक वेंटिलेटर के लिए कई अस्पतालों के चक्कर काटे, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। ये कहते हुए बेटी जनप्रिया की आंखें नम हो गईं। वह बताती है कि पापा का ऑक्सीजन लेवल 35 तक पहुंच गया था, लेकिन हम मर्ज की दवा नहीं दिला पाए। ये कहते हुए उसका दर्द आंखों के रास्ते छलक पड़ा। वह कहती है कि अब जीवनभर अफसोस रहेगा कि पापा को वेंटिलेटर नहीं दिला पाए। 

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बेटी जनप्रिया ने बताया कि पूरा परिवार संक्रमित हो गया था। धीरे-धीरे मां, भाई और मैं ठीक हो गए थे, लेकिन पापा को लगातार सांस की परेशानी बढ़ती जा रही थी। जब घर पर थे तो उनका ऑक्सीजन लेवल ठीक था, लेकिन परेशानी बढ़ने पर उनको डेल्टा टू स्थित शर्मा अस्पताल लेकर गए।
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वहां पर ऑक्सीजन तो मिल गई थी, लेकिन वेंटिलेटर नहीं मिल पा रहा था। जबकि, पापा को वेंटिलेटर की जरूरत थी। ऐसे में उनकी तबीयत और खराब होती गई। हम लोगों ने शहर के कई अस्पतालों के चक्कर काटे कि एक वेंटिलेटर वाला बेड खाली मिल जाए, ताकि पापा की जान बचा सकें।
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जिस-जिस ने जो अस्पताल बताया वहां गए, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। आसपास पड़ोस से लेकर सभी रिश्तेदारों को बोल रखा था कि यदि कहीं वेंटिलेटर वाला बेड मिल जाए तो बताएं। इस बीच धीरे-धीरे पापा का लंग्स इंफेक्शन बहुत बढ़ गया था। वहीं, लगातार ऑक्सीजन लेवल नीचे गिर रहा था। वो सांस तक नहीं ले पा रहे थे। अंत में वह हमें छोड़कर चले गए। जिंदगी भर अफसोस रहेगा कि हम लोग उनको दर्द की दवा नहीं दिला पाए। 

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