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नोएडाः न बरतें लापरवाही, इलाज के लिए पड़ सकते हैं लाले, ज्यादातर कोविड अस्पतालों में बेड फुल
Thu, 15 Apr 2021 07:42 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Thu, 15 Apr 2021 07:42 PM IST
सार
कोविड संकट की भयावह तस्वीर जिले में हर तरफ नजर आने लगी है। विगत कुछ समय से हर दिन 200 से ज्यादा नए मरीज मिल रहे हैं। हजारों लोगों की जांच रिपोर्ट लंबित है। वहीं, जिले के ज्यादातर निजी कोविड अस्पतालों में बेड फुल हो चुके हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोविड संकट की भयावह तस्वीर जिले में हर तरफ नजर आने लगी है। विगत कुछ समय से हर दिन 200 से ज्यादा नए मरीज मिल रहे हैं। हजारों लोगों की जांच रिपोर्ट लंबित है। वहीं, जिले के ज्यादातर निजी कोविड अस्पतालों में बेड फुल हो चुके हैं। साथ ही सरकारी अस्पतालों में भी आसानी से मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है।
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कुछ अस्पतालों में स्वास्थ्य विभाग या प्रशासन ने बेड क्षमता बढ़ाने का दावा तो किया है, लेकिन इसके अनुरूप मैन पावर और अन्य संसाधन नहीं होने से कर्मी मरीजों को भर्ती करने से बच रहे हैं। सोमवार को कोविड मरीजों संग लापरवाही के कई मामले सामने आए।
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सेक्टर-74 में एक बुजुर्ग को निजी अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया। मौत के बाद 9 घंटे तक दाह संस्कार के लिए भी कोई मदद नहीं मिली। वहीं, सेक्टर-39 कोविड अस्पताल में भर्ती होने आई एक संक्रमित महिला को डेढ़ घंटे तक इंतजार कराने के बाद भर्ती नहीं किया गया। कई मरीज इलाज के लिए एक से दूसरे अस्पताल भटकने को मजबूर हैं।
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दावों से परे है हकीकत
स्वास्थ्य विभाग ने जिले में 2000 से अधिक बेड होने का दावा किया है। विभाग के मुताबिक, निजी अस्पतालों में भी 900 बिस्तर पर इलाज की सुविधा है, लेकिन संक्रमित संख्या एक हजार के पार जाते ही मरीजों के लिए परेशानी होनी शुरू हो गई है। जबकि, सक्रिय मरीजों में 400 से अधिक होम आइसोलेशन में हैं। शहर के प्रमुख निजी अस्पतालों फोर्टिस, जेपी, यथार्थ आदि में बेड फुल हो चुके है। फ फोर्टिस अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, अस्पताल में कोविड मरीजों के लिए 40 बेड, 20 कोविड केयर बेड और संदिग्धों के लिए 20 बेड हैं, सभी भर चुके हैं। जेपी अस्पताल प्रशासन के अनुसार, 150 बेड की क्षमता है। सभी फुल हो चुके हैं। यथार्थ अस्पताल में भी कुल 200 बेड हैं, सभी पर मरीज भर्ती हैं। अन्य निजी अस्पतालों में भी आरक्षित बेड फुल होने के कगार पर हैं।
सरकारी में बेड हैं, लेकिन इलाज की सुविधा नहीं
प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में बेड बढ़ाने की घोषणा तो कर दी, लेकिन इससे इलाज संभव नहीं है। सेक्टर-39 स्थित कोविड अस्पताल में बिस्तरों की संख्या 360 कर दी गई है। शारदा में 750 बेड और बढ़ाए जा रहे हैं। जिम्म और निम्स मेें बेड बढ़ाए गए हैं। चाइल्ड पीजीआई सहित कई को जरूरत अनुसार कोविड अस्पताल में परिवर्तित होने के लिए कहा गया है, लेकिन सेक्टर-39 कोविड अस्पताल में अप्रैल से पहले ही कर्मचारियों की कमी है। 344 करोड़ में बनी 8 मंजिला इमारत में इलाज की राह आसान नहीं है। इतनी बड़ी इमारत के रखरखाव, संसाधनों के संचालन आदि के लिए पहले ही स्टाफ पर काफी भार है। अस्पताल में बेड संख्या तो बढ़ाई गई, लेकिन डाक्टर या अन्य स्टाफ में बढ़ोतरी नहीं की गई है।
दवाओं के बिना कैसे बचेगी जान
कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीन तो बन चुकी हैं, लेकिन इसके इलाज की कोई निश्चित दवा नहीं है। डॉक्टर लक्षण के अनुसार मरीजों को दवा देते हैं। गंभीर मरीजों के इलाज में रेमडेसिविर अब तक सबसे प्रभावी दवा रही है, लेकिन मेडिकल स्टोर पर फि लहाल इसका मिलना नामुमकिन सा है। बाजारों में इस दवा की कमी है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के पास भी करीब 50 डोज ही हैं। जबकि, एक मरीज को कई बार समय-समय पर छह डोज देनी पड़ जाती हैं।
हम सभी सरकारी व निजी अस्पतालों के संसाधनों और उनके प्रयोग पर नजर रखे हैं। दवाओं, वैक्सीन आदि की उपलब्धता सुनिश्चित रखने के लिए शासन से संपर्क बनाए हैं। अस्पतालों में बेड क्षमता बढ़ाई गई है। सभी को समय से उचित इलाज मिलेगा।- डॉ दीपक ओहरी, सीएमओ