Noida: बिसरख ब्लॉक के 40 स्कूलों में दिव्यांगों के लिए शौचालय नहीं, 2400 छात्र करते हैं पढ़ाई
जिले में 511 परिषदीय स्कूल हैं। इनमें से 141 स्कूल बिसरख ब्लॉक में हैं। कुछ स्कूल शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। गावों में बने स्कूल शहरी क्षेत्रों से सटे हुए हैं। इन स्कूलों में सबसे ज्यादा अधिकारियों के दौरे भी होते हैं। इसके बावजूद यहां के 141 स्कूलों में से 40 में दिव्यांग छात्रों के शौचालय नहीं है।
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जिले के परिषदीय स्कूलों में दिव्यांग छात्रों के लिए शौचालय तक नहीं हैं। यह हाल तब है जब परिषदीय स्कूलों में करीब 2400 दिव्यांग छात्र पढ़ते हैं। शौचालय की व्यवस्था नहीं होने से दिव्यांग विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अकेले बिसरख ब्लॉक के 40 स्कूलों में यही स्थिति है। शिक्षा विभाग का कहना है कि दिव्यांगों की सुविधा के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक हुई है। शौचालय की सुविधा को लेकर तेजी से काम किया जा रहा है।
जिले में 511 परिषदीय स्कूल हैं। इनमें से 141 स्कूल बिसरख ब्लॉक में हैं। कुछ स्कूल शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। गावों में बने स्कूल शहरी क्षेत्रों से सटे हुए हैं। इन स्कूलों में सबसे ज्यादा अधिकारियों के दौरे भी होते हैं। इसके बावजूद यहां के 141 स्कूलों में से 40 में दिव्यांग छात्रों के शौचालय नहीं है। कायाकल्प की रिपोर्ट में यह आंकड़ा सामने आया है। स्कूलों में बने शौचालय में रैंप व अन्य सुविधाएं नहीं होने से दिव्यांग छात्रों को परेशानी होती है। इसलिए शिक्षा विभाग ने हर स्कूल में दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधायुक्त शौचालय का निर्माण कराने का फैसला किया था। इसके बावजूद अभी तक सभी स्कूलों में शौचालय नहीं बन पाए हैं।
अन्य ब्लॉक की स्थिति और खराब, पीने के लिए पानी भी नहीं
बिसरख ब्लॉक छोड़ दें तो जेवर, दनकौर और दादरी में बने स्कूलों की हालत और खराब है। बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल हैं, जहां पर दिव्यांगों के लिए शौचालय तो दूर की बात है, स्कूल की ब्राउंड वॉल, हैंडवॉश यूनिट, पीने के पानी, बालक बालिकाओं के लिए शौचालय समेत अन्य सुविधाएं नहीं हैं। यहां तक कि पानी की टोटिंयां तक लोग निकाल कर ले गए हैं। बच्चों को पीने के लिए साफ पानी तक मुहैया नहीं हो पा रहा है।
कायाकल्प के तहत 19 पैरामीटर पर हो रहा काम
जिले के प्राथमिक विद्यालयों में कायाकल्प के तहत सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल, रनिंग वॉटर कनेक्शन, बालक शौचालय, बालिका शौचालय, दिव्यांगों के लिए शौचालय, हैंडवॉश यूनिट, कक्षा में टाइल्स, ब्लैक बोर्ड, डेस्क व बेंच, रसोईघर के पक्के फर्श, छत, रंगाई पुताई, चहारदीवारी, सुरक्षित वायरिंग समेत कई बिंदुओं पर काम किया जा रहा है।
जिले 150 स्कूलों में हैंडवॉश यूनिट तक नहीं
जिले में 150 स्कूलों में हैंडवॉश यूनिट तक नहीं हैं। सितंबर की कायाकल्प की रिपोर्ट में 69 प्रतिशत स्कूलों में हैंडवॉश यूनिट मिली है। हालांकि बेसिक शिक्षा अधिकारी ऐश्वर्या लक्ष्मी का कहना है कि 98 प्रतिशत स्कूलों में हैंडवॉश यूनिट है।
हर स्कूल में दिव्यांगों के लिए शौचालय बनाने पर काम चल रहा है। इसको लेकर हर महीने डीएम की अध्यक्षता में मीटिंग भी हो रही है। जल्द ही शौचालय बनाने का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। -यशपाल सिंह, अडिशनल बेसिक शिक्षा अधिकारी