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Noida News: कई ग्राम पंचायतों में स्कूल का विकल्प नहीं, हजारों अभिभावकों पर संकट
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कई ग्राम पंचायतों में स्कूल का विकल्प नहीं, हजारों अभिभावकों पर संकट
फोटो
-दूसरे में आवेदन करने पर सत्यापन के दौरान आवेदन हो रहे निरस्त
- स्कूलों की मैपिंग होने के बाद अभिभावकों के सामने खड़ी हुई समस्या
- आरटीई के तहत निजी स्कूलों में दाखिला करना हुआ मुश्किल
नोएडा। शिक्षा के अधिकार के तहत (आरटीई) निजी स्कूलों में बच्चे के दाखिला के लिए आवेदन करना अभिभावकों के लिए मुश्किल हो गया है। कई ग्राम पंचायत और वॉर्ड की जमीन पर एक भी स्कूल नहीं है। इस वजह से आवेदन के दौरान विकल्प नहीं आ रहा है। अगर दूसरे ग्राम पंचायत के स्कूल में आवेदन कर रहे हैं तो सत्यापन के दौरान निरस्त हो जा रहे हैं। यह बड़ा कारण है कि दूसरे चरण में सिर्फ 3200 ही आवेदन आए हैं, जबकि पहले चरण में पांच हजार से ज्यादा आवेदन आए थे।
आरटीई के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं। इस बार विभाग की ओर से स्कूलों की मैपिंग में बदलाव किया गया है। नोएडा में स्कूलों की पंचायत और वॉर्ड की जमीन पर बने स्कूलों के अनुसार मैपिंग की गई है। इस दौरान झुंझपुरा, बेगमपुर, सुल्तानपुर, हजरतपुर वाजिदपुर, रोहिल्लापुर, नगली शाहपुर, कनावनी कॉलोनी, खोदना काला, काशीराम समेत कई वॉर्ड में एक भी स्कूल नहीं दिखाया गया है। यहां के निवासियाें का कहना है कि अगर यहां की ग्राम पंचायत की जमीन पर स्कूल नहीं है तो उनको दूसरे क्षेत्रों के स्कूलों को विकल्प के तौर पर देना चाहिए। अगर ऐसा नहीं करेंगे तो बच्चों का दाखिला कैसे होगा। झुण्डपुरा निवासी नरेश वर्मा ने बताया कि उन्होंने बच्चे के दाखिले के लिए वेबसाइट rte25.upsdc.gov.in पर आवेदन किया, लेकिन उनके क्षेत्र का कोई स्कूल ही नहीं आ रहा है। उनका कहना है कि ऐसे तो उनके बच्चे का दाखिला ही नहीं हो पाएगा। अगर दूसरे ग्राम पंचायत की जमीन पर बने स्कूल के लिए आवेदन करेंगे तो सत्यापन के दौरान फॉर्म निरस्त कर दिया जाएगा।
पहले चरण में दो हजार से ज्यादा फॉर्म हो गए थे निरस्त
पहले चरण में दाखिले के लिए 5810 बच्चों ने आवेदन किया था, जिसमें केवल 3504 आवेदन ही सत्यापन के बाद सही पाए गए थे। इसमें से 2306 आवेदन निरस्त कर दिए गए थे। इसमें बड़ी संख्या में ऐसे बच्चों के आवेदन थे, जिन्होंने दूसरी ग्राम पंचायत की जमीन पर बने स्कूलों में दाखिले के लिए आवेदन कर दिया था।
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इसकी जांच कराई जा रही है। अगर ऐसा है तो इस समस्या को शासन स्तर पर रखा जाएगा। उनके लिए दाखिले के लिए स्कूल की दूरी बढ़वाने का प्रयास किया जाएगा।
राहुल पंवार, बेसिक शिक्षा अधिकारी
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-दूसरे में आवेदन करने पर सत्यापन के दौरान आवेदन हो रहे निरस्त
- स्कूलों की मैपिंग होने के बाद अभिभावकों के सामने खड़ी हुई समस्या
- आरटीई के तहत निजी स्कूलों में दाखिला करना हुआ मुश्किल
नोएडा। शिक्षा के अधिकार के तहत (आरटीई) निजी स्कूलों में बच्चे के दाखिला के लिए आवेदन करना अभिभावकों के लिए मुश्किल हो गया है। कई ग्राम पंचायत और वॉर्ड की जमीन पर एक भी स्कूल नहीं है। इस वजह से आवेदन के दौरान विकल्प नहीं आ रहा है। अगर दूसरे ग्राम पंचायत के स्कूल में आवेदन कर रहे हैं तो सत्यापन के दौरान निरस्त हो जा रहे हैं। यह बड़ा कारण है कि दूसरे चरण में सिर्फ 3200 ही आवेदन आए हैं, जबकि पहले चरण में पांच हजार से ज्यादा आवेदन आए थे।
आरटीई के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं। इस बार विभाग की ओर से स्कूलों की मैपिंग में बदलाव किया गया है। नोएडा में स्कूलों की पंचायत और वॉर्ड की जमीन पर बने स्कूलों के अनुसार मैपिंग की गई है। इस दौरान झुंझपुरा, बेगमपुर, सुल्तानपुर, हजरतपुर वाजिदपुर, रोहिल्लापुर, नगली शाहपुर, कनावनी कॉलोनी, खोदना काला, काशीराम समेत कई वॉर्ड में एक भी स्कूल नहीं दिखाया गया है। यहां के निवासियाें का कहना है कि अगर यहां की ग्राम पंचायत की जमीन पर स्कूल नहीं है तो उनको दूसरे क्षेत्रों के स्कूलों को विकल्प के तौर पर देना चाहिए। अगर ऐसा नहीं करेंगे तो बच्चों का दाखिला कैसे होगा। झुण्डपुरा निवासी नरेश वर्मा ने बताया कि उन्होंने बच्चे के दाखिले के लिए वेबसाइट rte25.upsdc.gov.in पर आवेदन किया, लेकिन उनके क्षेत्र का कोई स्कूल ही नहीं आ रहा है। उनका कहना है कि ऐसे तो उनके बच्चे का दाखिला ही नहीं हो पाएगा। अगर दूसरे ग्राम पंचायत की जमीन पर बने स्कूल के लिए आवेदन करेंगे तो सत्यापन के दौरान फॉर्म निरस्त कर दिया जाएगा।
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पहले चरण में दो हजार से ज्यादा फॉर्म हो गए थे निरस्त
पहले चरण में दाखिले के लिए 5810 बच्चों ने आवेदन किया था, जिसमें केवल 3504 आवेदन ही सत्यापन के बाद सही पाए गए थे। इसमें से 2306 आवेदन निरस्त कर दिए गए थे। इसमें बड़ी संख्या में ऐसे बच्चों के आवेदन थे, जिन्होंने दूसरी ग्राम पंचायत की जमीन पर बने स्कूलों में दाखिले के लिए आवेदन कर दिया था।
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इसकी जांच कराई जा रही है। अगर ऐसा है तो इस समस्या को शासन स्तर पर रखा जाएगा। उनके लिए दाखिले के लिए स्कूल की दूरी बढ़वाने का प्रयास किया जाएगा।
राहुल पंवार, बेसिक शिक्षा अधिकारी