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Noida News: मोबाइल सप्लाई के नाम पर धोखाधड़ी के आरोपियों को राहत नहीं
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(अदालत से)
- फर्जी बिल दिखाकर 7.30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। मोबाइल फोन सप्लाई कराने के नाम पर 7.30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में आरोपी अभिषेक जैन और सौधर्म जैन की दूसरी जमानत अर्जी भी अदालत ने खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि मामले में कोई नया आधार या परिवर्तित परिस्थिति प्रस्तुत नहीं की गई है। इसलिए जमानत देने का कोई औचित्य नहीं बनता।
अभियोजन के अनुसार, मामला थाना सेक्टर-39 नोएडा से जुड़ा है। शिकायतकर्ता अपने परिचितों के साथ मिलकर मोबाइल फोन खरीदने का व्यवसाय करता है। इसी दौरान उसकी पहचान आरोपी सोधर्म जैन से हुई थी। जिसने खुद को सैमसंग कंपनी से जुड़े लोगों के संपर्क में होने का दावा किया था। शिकायतकर्ता को भरोसा दिलाया कि वह सैमसंग कंपनी से कम कीमत पर मोबाइल फोन उपलब्ध करा सकता है। आरोपी ने पहले छोटे स्तर पर कुछ लेन-देन कर विश्वास जीता, इसके बाद उसने बड़ी मात्रा में मोबाइल फोन दिलाने का आश्वासन देकर अलग-अलग तारीखों में शिकायतकर्ता से पैसे ट्रांसफर करवा लिए।
जांच में सामने आया कि आरोपी द्वारा भेजे गए बिल फर्जी थे। जिस व्यक्ति के हस्ताक्षर बिल पर थे, वह सैमसंग कंपनी का कर्मचारी नहीं था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने जमानत देने से मना कर दिया।
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- फर्जी बिल दिखाकर 7.30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। मोबाइल फोन सप्लाई कराने के नाम पर 7.30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में आरोपी अभिषेक जैन और सौधर्म जैन की दूसरी जमानत अर्जी भी अदालत ने खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि मामले में कोई नया आधार या परिवर्तित परिस्थिति प्रस्तुत नहीं की गई है। इसलिए जमानत देने का कोई औचित्य नहीं बनता।
अभियोजन के अनुसार, मामला थाना सेक्टर-39 नोएडा से जुड़ा है। शिकायतकर्ता अपने परिचितों के साथ मिलकर मोबाइल फोन खरीदने का व्यवसाय करता है। इसी दौरान उसकी पहचान आरोपी सोधर्म जैन से हुई थी। जिसने खुद को सैमसंग कंपनी से जुड़े लोगों के संपर्क में होने का दावा किया था। शिकायतकर्ता को भरोसा दिलाया कि वह सैमसंग कंपनी से कम कीमत पर मोबाइल फोन उपलब्ध करा सकता है। आरोपी ने पहले छोटे स्तर पर कुछ लेन-देन कर विश्वास जीता, इसके बाद उसने बड़ी मात्रा में मोबाइल फोन दिलाने का आश्वासन देकर अलग-अलग तारीखों में शिकायतकर्ता से पैसे ट्रांसफर करवा लिए।
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जांच में सामने आया कि आरोपी द्वारा भेजे गए बिल फर्जी थे। जिस व्यक्ति के हस्ताक्षर बिल पर थे, वह सैमसंग कंपनी का कर्मचारी नहीं था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने जमानत देने से मना कर दिया।
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