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सपा छोड़कर नरेंद्र सिंह भाटी भाजपा में शामिल
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नरेंद्र भाटी।
- फोटो : Grnoida
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ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्ध नगर के कद्दावर नेता नरेंद्र सिंह भाटी बुधवार को सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि वह गुर्जर बिरादरी को साधने का प्रयास कर सकते हैं। दादरी में सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा अनावरण के बाद से गुर्जर समाज के लोगों में नाराजगी बनी हुई है। नरेंद्र भाटी इस विवाद पर भी विराम लगाने का प्रयास कर सकते हैं। हालांकि, यह देखने वाली बात होगी कि हाल ही में भाजपा नेताओें के प्रति नाराजगी प्रकट करने वाले गुर्जर समाज के लोगों को वह संतुष्ट कर पाते हैं या नहीं।
सपा में रहते हुए दो बार मंत्री और विधान परिषद सदस्य रह चुके नरेंद्र सिंह भाटी ने लखनऊ मुख्यालय में भाजपा का दामन थामा। अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इससे जनपद में भाजपा को और मजबूती मिलेगी। इनके छोटे भाई और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह भाटी पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं। नरेंद्र भाटी जिले के कद्दावर नेता हैं। बिरादरी में उनकी अच्छी पकड़ है। छोटे से बड़े लेकर मामलों में लोग उनके पास जाते हैं। उनका राजनीतिक सफर और कद काफी बड़ा माना जाता है। मंत्री रहने के दौरान उन्होंने राजपूत समाज में भी पकड़ बनाई थी। पिछले दिनों दादरी में मिहिर भोज प्रतिमा के शिलापट्ट से गुर्जर शब्द हटाए जाने के बाद समाज के लोगों ने विरोध-प्रदर्शन किया था। इस दौरान भाजपा नेताओं के विरोध की घोषणा भी की गई थी।
प्रकरण के बाद से मुख्यमंत्री, स्थानीय विधायक तेजपाल नागर और राज्यसभा सांसद सुरेंद्र सिंह नागर से गुर्जर बिरादरी के लोग नाराज हैं। भाजपा लगातार नाराजगी को दूर करने का प्रयास कर रही है, लेकिन गुर्जर बिरादरी के लोग सुनने को तैयार नहीं है। नरेंद्र सिंह भाटी को भाजपा में शामिल करने के पीछे गुर्जर बिरादरी को साधने का प्रयास माना जा रहा है। दादरी और जेवर विधानसभा क्षेत्र में उनके द्वारा भाजपा को लाभ मिलने की चर्चा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि प्रतिमा प्रकरण में गुर्जर बिरादरी के युवाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई है। आंदोलन के बाद कई युवाओं को जेल भी जाना पड़ा था। उस दौरान नरेंद्र सिंह भाटी भी चुप्पी साधे थे। अब वह कैसे लोगों को मनाते हैं, यह देखने वाली बात होगी।
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बैनामा लेखक से तय किया मंत्री बनने तक का सफर
बोड़ाकी गांव निवासी प्रेम सिंह के पुत्र नरेंद्र सिंह ने दादरी तहसील में बैनामा लेखक के रूप में पांच साल काम किया था। 1975 में युवा कांग्रेसी के रूप में राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। 1980 में पहली बार चुनाव लड़कर ब्लॉक प्रमुख बने। वह दो बार ब्लॉक प्रमुख रहे। इसके बाद 1989 और 1991 में सिकंद्राबाद विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने और सपा में शामिल हो गए। 1996 में भी सिकंद्राबाद से विधायक चुने गए। इसके बाद वह विधानसभा और लोकसभा सीट पर चुनाव नहीं जीत पाए। 2016 में उनको सपा ने विधान परिषद सदस्य बनाया। इस दौरान वह यूपी एग्रो इंडस्ट्रियल कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष भी रहे।
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सपा में रहते हुए दो बार मंत्री और विधान परिषद सदस्य रह चुके नरेंद्र सिंह भाटी ने लखनऊ मुख्यालय में भाजपा का दामन थामा। अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इससे जनपद में भाजपा को और मजबूती मिलेगी। इनके छोटे भाई और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह भाटी पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं। नरेंद्र भाटी जिले के कद्दावर नेता हैं। बिरादरी में उनकी अच्छी पकड़ है। छोटे से बड़े लेकर मामलों में लोग उनके पास जाते हैं। उनका राजनीतिक सफर और कद काफी बड़ा माना जाता है। मंत्री रहने के दौरान उन्होंने राजपूत समाज में भी पकड़ बनाई थी। पिछले दिनों दादरी में मिहिर भोज प्रतिमा के शिलापट्ट से गुर्जर शब्द हटाए जाने के बाद समाज के लोगों ने विरोध-प्रदर्शन किया था। इस दौरान भाजपा नेताओं के विरोध की घोषणा भी की गई थी।
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प्रकरण के बाद से मुख्यमंत्री, स्थानीय विधायक तेजपाल नागर और राज्यसभा सांसद सुरेंद्र सिंह नागर से गुर्जर बिरादरी के लोग नाराज हैं। भाजपा लगातार नाराजगी को दूर करने का प्रयास कर रही है, लेकिन गुर्जर बिरादरी के लोग सुनने को तैयार नहीं है। नरेंद्र सिंह भाटी को भाजपा में शामिल करने के पीछे गुर्जर बिरादरी को साधने का प्रयास माना जा रहा है। दादरी और जेवर विधानसभा क्षेत्र में उनके द्वारा भाजपा को लाभ मिलने की चर्चा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि प्रतिमा प्रकरण में गुर्जर बिरादरी के युवाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई है। आंदोलन के बाद कई युवाओं को जेल भी जाना पड़ा था। उस दौरान नरेंद्र सिंह भाटी भी चुप्पी साधे थे। अब वह कैसे लोगों को मनाते हैं, यह देखने वाली बात होगी।
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बैनामा लेखक से तय किया मंत्री बनने तक का सफर
बोड़ाकी गांव निवासी प्रेम सिंह के पुत्र नरेंद्र सिंह ने दादरी तहसील में बैनामा लेखक के रूप में पांच साल काम किया था। 1975 में युवा कांग्रेसी के रूप में राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। 1980 में पहली बार चुनाव लड़कर ब्लॉक प्रमुख बने। वह दो बार ब्लॉक प्रमुख रहे। इसके बाद 1989 और 1991 में सिकंद्राबाद विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने और सपा में शामिल हो गए। 1996 में भी सिकंद्राबाद से विधायक चुने गए। इसके बाद वह विधानसभा और लोकसभा सीट पर चुनाव नहीं जीत पाए। 2016 में उनको सपा ने विधान परिषद सदस्य बनाया। इस दौरान वह यूपी एग्रो इंडस्ट्रियल कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष भी रहे।