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Noida News: भूमाफिया यशपाल तोमर के नौकर मालू ने किया कोर्ट में आत्मसमर्पण
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चिटहेरा भूमि घोटाला
भूमाफिया यशपाल तोमर के नौकर मालू ने किया कोर्ट में आत्मसमर्पण
-आरोपी की अंतरिम जमानत याचिका खारिज, भेजा गया जेल
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। चिटहेरा भूमि घोटाले के मुख्यारोपी भूमाफिया यशपाल तोमर के नौकर मालू ने जिला न्यायालय में बुधवार को नाटकीय ढंग से आत्मसमर्पण दिया। न्यायालय ने आरोपी की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपी को अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया। यशपाल पट्टे खरीदकर मालू के नाम कराता रहा है। चिटहेरा भूमि घोटाले में अभी कई बड़े आरोपियों की गिरफ्तारी होना बाकी है। कई अधिकारियों की मिलीभगत की बात भी सामने आई है। मगर अब तक केवल यशपाल तोमर, लेखपाल शीतला प्रसाद और एक सेवानिवृत कानूनगो की गिरफ्तारी हुई है।
दादरी कोतवाली क्षेत्र के गांव चिटहेरा के भूमि घोटाले में लेखपाल ने भूमाफिया यशपाल तोमर, नरेंद्र कुमार, कर्मवीर, बेलू, कृष्ण पाल, एम भास्करण, केएम संत उर्फ खचरेमल, गिरीश वर्मा और सरस्वती देवी के खिलाफ कोतवाली दादरी में नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि भूमाफिया यशपाल ने वर्ष 2012 में गांव के दलित और अन्य समाज से ताल्लुक रखने वाले लोगों के पट्टों की जमीन का अनुबंध जबरन परिचितों के नाम कराया लिया था। वर्ष 2016 में यशपाल ने पट्टे की जमीन का बैनामा कराने की तैयारी की थी। जब अनुबंधित जमीन का सामान्य वर्ग के लिए बैनामा नहीं हो सका तो उसने गांव के दलित समाज के कृष्णपाल, बैलू और कर्मवीर के नाम से साठगांठ कर फर्जी तरीके से आधार कार्ड बनवा लिए। इसके बाद पट्टे की जमीन का बैनामा यशपाल तोमर, त्रिदेव प्राइवेट लिमिटेड के नरेंद्र कुमार, कर्मवीर, वैलू, कृष्णपाल, एम भास्करण, केएम संत उर्फ खचरेमल, गिरीश वर्मा और सरस्वती देवी के नाम करा लिया। इनमें यशपाल के नौकर मालू, चालक, रिश्तेदार व दोस्त शामिल हैं। गांव के जिन लोगों ने जमीन का बैनामा नहीं किया, उनसे जमीन को जबरन तरीके से दबाव बनाकर बैनामा कराने का काम शुरू किया। पुलिस के अनुसार जो लोग गांव चिटहेरा की जमीन को बेचने से मना करते थे, उन पर दिल्ली के कश्मीरी गेट, गीता कॉलोनी, पंजाब के जीआरपी भटिंडा, राजपुर, फाजिलका, राजस्थान के पीलीबंगा, उत्तराखंड के कनखल, लक्ष्मण झूला में फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर जेल भिजवाने का भी आरोप है। दबाव बनने के बाद पीड़ितों की जमीन का बैनामा कराकर अपने गांव के तीनों दलितों सहित अन्य के नाम बैनामे कराए गए थे। एडीजीसी श्याम सिंह चौधरी का कहना है कि आरोपी मालू ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर अंतरिम जमानत याचिका दायर की। जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया। इससे पहले आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज हो चुकी है।
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भूमाफिया यशपाल तोमर के नौकर मालू ने किया कोर्ट में आत्मसमर्पण
-आरोपी की अंतरिम जमानत याचिका खारिज, भेजा गया जेल
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। चिटहेरा भूमि घोटाले के मुख्यारोपी भूमाफिया यशपाल तोमर के नौकर मालू ने जिला न्यायालय में बुधवार को नाटकीय ढंग से आत्मसमर्पण दिया। न्यायालय ने आरोपी की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपी को अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया। यशपाल पट्टे खरीदकर मालू के नाम कराता रहा है। चिटहेरा भूमि घोटाले में अभी कई बड़े आरोपियों की गिरफ्तारी होना बाकी है। कई अधिकारियों की मिलीभगत की बात भी सामने आई है। मगर अब तक केवल यशपाल तोमर, लेखपाल शीतला प्रसाद और एक सेवानिवृत कानूनगो की गिरफ्तारी हुई है।
दादरी कोतवाली क्षेत्र के गांव चिटहेरा के भूमि घोटाले में लेखपाल ने भूमाफिया यशपाल तोमर, नरेंद्र कुमार, कर्मवीर, बेलू, कृष्ण पाल, एम भास्करण, केएम संत उर्फ खचरेमल, गिरीश वर्मा और सरस्वती देवी के खिलाफ कोतवाली दादरी में नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि भूमाफिया यशपाल ने वर्ष 2012 में गांव के दलित और अन्य समाज से ताल्लुक रखने वाले लोगों के पट्टों की जमीन का अनुबंध जबरन परिचितों के नाम कराया लिया था। वर्ष 2016 में यशपाल ने पट्टे की जमीन का बैनामा कराने की तैयारी की थी। जब अनुबंधित जमीन का सामान्य वर्ग के लिए बैनामा नहीं हो सका तो उसने गांव के दलित समाज के कृष्णपाल, बैलू और कर्मवीर के नाम से साठगांठ कर फर्जी तरीके से आधार कार्ड बनवा लिए। इसके बाद पट्टे की जमीन का बैनामा यशपाल तोमर, त्रिदेव प्राइवेट लिमिटेड के नरेंद्र कुमार, कर्मवीर, वैलू, कृष्णपाल, एम भास्करण, केएम संत उर्फ खचरेमल, गिरीश वर्मा और सरस्वती देवी के नाम करा लिया। इनमें यशपाल के नौकर मालू, चालक, रिश्तेदार व दोस्त शामिल हैं। गांव के जिन लोगों ने जमीन का बैनामा नहीं किया, उनसे जमीन को जबरन तरीके से दबाव बनाकर बैनामा कराने का काम शुरू किया। पुलिस के अनुसार जो लोग गांव चिटहेरा की जमीन को बेचने से मना करते थे, उन पर दिल्ली के कश्मीरी गेट, गीता कॉलोनी, पंजाब के जीआरपी भटिंडा, राजपुर, फाजिलका, राजस्थान के पीलीबंगा, उत्तराखंड के कनखल, लक्ष्मण झूला में फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर जेल भिजवाने का भी आरोप है। दबाव बनने के बाद पीड़ितों की जमीन का बैनामा कराकर अपने गांव के तीनों दलितों सहित अन्य के नाम बैनामे कराए गए थे। एडीजीसी श्याम सिंह चौधरी का कहना है कि आरोपी मालू ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर अंतरिम जमानत याचिका दायर की। जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया। इससे पहले आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज हो चुकी है।
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