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Noida News: तीसरी बार टला मेयर चुनाव, फिर से सुप्रीम कोर्ट जाएगी आप

Mon, 06 Feb 2023 06:46 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 06 Feb 2023 06:46 PM IST
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Mayor election postponed for the third time, AAP will again go to the Supreme Court
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मनोनीत पार्षदों को वोटिंग का अधिकार और आप के विधायकों की पात्रता रद्द करने पर हंगामापीठासीन अधिकारी ने अनिश्चितकाल के लिए सदन स्थगित किया
अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम में सोमवार को हंगामे के कारण मेयर, डिप्टी मेयर का चुनाव तीसरी बार भी नहीं हो सका। चुनाव टलने के विरोध में आप ने फिर से सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है। सदन शुरू होते ही हंगामे की भेंट चढ़ गया। इसके बाद पहले तो पीठासीन अधिकारी ने 10 मिनट के लिए सदन स्थगित किया, बाद में उन्होंने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।

सुबह करीब 35 मिनट देरी से सदन की कार्यवाही शुरू हुई। कुर्सी पर बैठते ही पीठासीन अधिकारी सत्या शर्मा ने मेयर, डिप्टी मेयर और स्थायी समिति के छह सदस्यों के चुनाव एक साथ कराने की घोषणा की। साथ ही कहा कि मनोनीत पार्षद(एल्डरमैन) भी मेयर चुनाव में हिस्सा लेंगे और स्थायी समिति के सदस्यों के चुनाव में केवल पार्षद शामिल होंगे। सभी सदस्यों को तीन तरह के मतपत्र दिए गए। एक से मेयर, दूसरे से डिप्टी मेयर और तीसरे से स्थायी समिति के सदस्यों को वोट देना था। मेयर चुनाव में वोट करने के लिए मनोनीत आप पार्टी के विधायक महेंद्र गोयल ने तीनों पदों के चुनाव एक साथ कराए जाने पर आपत्ति जताई और कहा कि मेयर चुनाव में एल्डरमैन को वोट देने का हक देना असांविधानिक है। इस पर पीठासीन अधिकारी सत्या शर्मा ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 2016 के फैसले में साफ कहा है कि एल्डरमैन मेयर चुनाव में वोट डाल सकते हैं। इसका आप ने हल्के अंदाज में विरोध किया, जबकि भाजपा पार्षदों का विरोध तेज हो गया। कुछ देर बाद सत्या शर्मा ने आप पार्षद दल के नेता मुकेश गोयल से कहा कि वह अपने सहयोगियों को शांत करवाएं और मेयर का चुनाव होने देंं। जनता ने उन्हें दिल्ली की सेवा करने के लिए चुना है, बार-बार हंगामा करना ठीक नहीं है। फिर उन्होंने 10 मिनट के लिए सदन को स्थगित कर दिया।
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करीब बीस मिनट बाद वह दोबारा कुर्सी पर लौटीं और सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई। तभी पूर्ववर्ती दक्षिणी निगम की स्थायी समिति अध्यक्ष रहीं भाजपा पार्षद शिखा राय ने पीठासीन अधिकारी के सामने यह मांग रखी कि आम आदमी पार्टी के दो विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी और संजीव झा को कोर्ट से सजा मिल चुकी है, इसलिए वह मेयर चुनाव में वोट देने के काबिल नहीं हैं। इसका पीठासीन अधिकारी ने समर्थन किया और कहा कि जिन लोगों के पास वोट देने का अधिकार नहीं है, वह सदन से बाहर चले जाएं। इसके बाद हंगामा तेज हो गया। आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने इसे पीठासीन अधिकारी की तानाशाही बताया। भाजपा के पार्षद लगातार दोनों विधायकों के खिलाफ वापस जाओ-वापस जाओ के नारे लगा रहे थे। हंगामा बढ़ता देख पीठासीन अधिकारी ने सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। मेयर, डिप्टी मेयर और स्थायी समिति के छह सदस्यों का चुनाव फिर से नहीं हो पाया।
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