स्कूलों की राहें: शिक्षा संग मास्क भी जरूरी, चलती रहे पढ़ाई बनी रहे सामाजिक दूरी
कोविड के बाद बदले स्कूलों के अंदाज, एहतियात के साथ चल रहे शैक्षणिक कार्य।
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स्कूलों की राहें फिर रोशन होने लगी हैं। लेकिन सफर का अंदाज पूरी तरह बदल चुका है। दो साल कोरोना से फैली अनिश्चितता के चलते स्कूलों में सामान्य उपस्थिति बेहद कम रही है। कोविड के बढ़े प्रकोप ने ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा तो दिया। लेकिन स्कूलों में होने वाली विभिन्न गतिविधियों जैसे सांस्कृतिक आयोजन, खेलकूद एवं रंगारंग कार्यक्रम आदि पर लगभग रोक सी लग गई। कोविड का असर कम होने के साथ ही अब शहर के स्कूल पुन अपने पुराने ढर्रे पर लौट रहे हैं। अब सामान्य कक्षाएं, परीक्षाएं ही नहीं बहुमुखी प्रतिभा को बढ़ावा देने के लिए कई गतिविधियां दोबारा तेज हो चुकी हैं। लेकिन कोविड गाइडलाइन का पालन आज भी प्राथमिकता है।
स्वास्थ्य एवं भविष्य दोनों का ख्याल
स्कूलों में इन दिनों जिस तेजी से उपस्थिति बढ़ी है। उसके साथ ही स्वास्थ्य को लेकर एहतियात बरतने की आवश्यकता भी बढ़ चुकी है। कोरोना गया नहीं है, ऐसे में शहर के अधिकांश निजी स्कूलों ने अपने यहां सैनेटाइजेशन टर्नल, थर्मल चेकिंग जैसी व्यवस्थाएं बना रखी हैं। जिससे बच्चे स्कूलों में सुरक्षित रह सकें। अभी भी कई स्कूल अलग अलग दिनों के अनुसार आधे विद्यार्थियों को ही स्कूल बुला रहे हैं। जिससे सामाजिक दूरी का पालन बेहतर ढंग से किया जा सके। सेक्टर 12 स्थित माडर्न स्कूल के प्राचार्य नीरज
अवस्थी कहते हैं कि विद्यार्थियों की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है।
इसलिए उन्हें इस प्रकार ही बुलाया जाता है कि सामाजिक दूरी एवं मास्क जैसी जरूरी आवश्यकताओं पर पूरा ध्यान दिया जा सके। लेकिन विद्यार्थियों के भले को ध्यान में रखते हुए स्कूल खुलना भी जरूरी हैं। क्योंकि स्कूलों में किताबी ज्ञान के साथ ही छात्र छात्राओं के व्यक्तित्व विकास पर भी बल दिया जा सकता है। कई ऐसी गतिविधियां हैं जिनका सही संचालन स्कूलों में ही हो सकता है।
रंगारंग कार्यक्रमों से खिलने लगे चेहरे
सामान्य कक्षाएं शुरू होने के साथ ही स्कूलों में रंगारंग गतिविधियां खेलकूद, प्रयोगशाला आदि भी सामान्य ढर्रे पर चलने लगी हैं। जिसके चलते विद्यार्थियों की पढ़ाई में रुचि बढ़ने लगी है। सेक्टर 110 स्थित महर्षि स्कूल के प्राचार्य उमेश सेंगर कहते हैं कि यदि सिर्फ किताबी ज्ञान दिया जाता रहे तो विद्यार्थियों का पढ़ाई से मन जल्द ही ऊबने लगता है। खासकर जूनियर कक्षाओं के बच्चों को रुचिकर तरीके से ज्ञान देना जरूरी है। यह उन्हें शिक्षा का महत्व समझाने, शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रेरित करने एवं बेहतर व्यक्ति बनने में मददगार बनता है। इसलिए जबसे सामान्य कक्षाएं शुरू हुई हैं हम फिर से तरह तरह की रोचक गतिविधियों का आयोजन करने लगे हैं। ऑनलाइन कक्षाओं में कई बच्चे उबासी लेने लगते थे अब इन तरीकों से छात्र छात्राओं का मन कक्षाओं में लगा रहता है।
स्कूल में उपस्थिति लगातार बढ़ी है। अब करीब सब बच्चे आने लगे हैं, परीक्षाओं के दौरान 100 प्रतिशत उपस्थिति रही है। हम कोविड नियमों के पालन को लेकर काफी सजग हैं। साथ ही अभिभावकों एवं विद्यार्थियों को भी किसी तरह की लापरवाही ना बरतने के लिए जागरूक करते रहते हैं।
- डॉ नीरज टंडन
प्राचार्य पंचशील बालक इंटर कॉलेज
स्कूल में स्टाफ हो या बच्चे सभी के वैक्सीनेशन को लेकर खास सतर्कता बरती जा रही है। हमारा मकसद सुरक्षित माहौल के साथ बेहतर शिक्षा देना है। स्कूल में पुरानी रौनक फिर लौट चुकी है, छात्रों की उपस्थित बढ़ी है। लेकिन समय की जरूरत अनुसार हमने अपने तौर तरीके एवं नियमों का बदला है।
- नीरज अवस्थी
प्राचार्य माडर्न स्कूल
स्कूल एवं स्वास्थ्य दोनों ही छात्र छात्राओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसलिए बदले समय की जरूरत अनुसार ही कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। अभी भी कई बच्चों एवं अभिभावकों के मन में कोरोना को लेकर डर व आशंकाएं रहती हैं, जोकि वाजिब हैं। हम सुरक्षित माहौल देने के लिए हर तरह प्रयासरत हैं।
- उमेश सेंगर प्राचार्य महर्षि स्कूल
कोविड केसों में कमी से राहत मिली है। लेकिन कोविड लौटने की संभावनाएं अभी भी हैं, ऐसे में सभी स्कूलों को गाइडलाइन का ध्यान देना चाहिए। एक अभिभावक के तौर पर हमारी कई चिंताएं रहती हैं। क्योंकि यह बच्चों के भविष्य का सवाल है। स्कूलों में बच्चों की कोविड से सुरक्षा का खास ध्यान दिया जाना चाहिए।
- मनोज कटारिया संस्थापक गौतमबुद्धनगर अभिभावक संघ