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Noida News: शहर में 108 हेक्टेयर जमीन का भू-उपयोग बदलेगा
सार
नोएडा प्राधिकरण को संस्थागत और कमर्शियल जमीनों की बिक्री में दिक्कत आ रही है। मांग के अनुसार इनका भू-उपयोग आईटी और आईटीईएस प्लॉट में बदलने की योजना बनाई गई है। शासन की मंजूरी के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
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विस्तार
-संस्थागत और कमर्शियल जमीन को नहीं मिल रहे खरीदार
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जहां नोएडा प्राधिकरण के कुछ विभागों की जमीनें बिक्री नहीं होने से फंसी हैं, वहीं कुछ विभागों में अब भी जमीन की दरकार है। ऐसे में नोएडा प्राधिकरण की ओर से करीब 108 हेक्टेयर जमीन के भू-उपयोग को बदलने की कवायद की जाएगी। इसके लिए प्राधिकरण बोर्ड के माध्यम से प्रस्ताव लाकर शासन से मंजूरी लेगा।
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक, संस्थागत विभाग में कॉरपोरेट ऑफिस के लिए सेक्टर-153 में करीब 21 हेक्टेयर में 113 प्लॉट उपलब्ध हैं। इसकी बिक्री के लिए प्राधिकरण ने कई बार स्कीम निकाली लेकिन बाजार में मांग में कमी की वजह से यह बिक नहीं पाई।
इसी तरह कमर्शियल डिपार्टमेंट की 87.5 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध है। इसके तहत कई प्रकार के प्लॉट की स्कीम निकाली जा सकती है लेकिन बीते कई स्कीम में खरीदार नहीं मिले। इसकी बड़ी वजह यह भी है कि यह काफी महंगी है।
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एक ओर जहां ऐसी जमीन बिक नहीं रही है दूसरी ओर आईटी और आईटी इनेबल सर्विसेज के प्लॉट की डिमांड बढ़ रही है। ऐसे में जो जमीन नहीं बिक रही हैं उनका भू-उपयोग आईटी और आईटीईएस में तब्दील कराने की योजना है। चूंकि ऐसी जमीनों के भू-उपयोग बदलने की मंजूरी शासन स्तर से ही हो सकती है। लिहाजा प्राधिकरण की ओर से इस बाबत सामान्य प्रक्रिया अपनाते हुए इसे शासन को भेजने की कवायद की जाएगी। इसमें बोर्ड से अनुमोदन प्राप्त करना जरूरी होगा। शासन की मंजूरी के बाद इसकी बदले हुए भू-उपयोग में स्कीम निकाली जा सकती है।
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जहां नोएडा प्राधिकरण के कुछ विभागों की जमीनें बिक्री नहीं होने से फंसी हैं, वहीं कुछ विभागों में अब भी जमीन की दरकार है। ऐसे में नोएडा प्राधिकरण की ओर से करीब 108 हेक्टेयर जमीन के भू-उपयोग को बदलने की कवायद की जाएगी। इसके लिए प्राधिकरण बोर्ड के माध्यम से प्रस्ताव लाकर शासन से मंजूरी लेगा।
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक, संस्थागत विभाग में कॉरपोरेट ऑफिस के लिए सेक्टर-153 में करीब 21 हेक्टेयर में 113 प्लॉट उपलब्ध हैं। इसकी बिक्री के लिए प्राधिकरण ने कई बार स्कीम निकाली लेकिन बाजार में मांग में कमी की वजह से यह बिक नहीं पाई।
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इसी तरह कमर्शियल डिपार्टमेंट की 87.5 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध है। इसके तहत कई प्रकार के प्लॉट की स्कीम निकाली जा सकती है लेकिन बीते कई स्कीम में खरीदार नहीं मिले। इसकी बड़ी वजह यह भी है कि यह काफी महंगी है।
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एक ओर जहां ऐसी जमीन बिक नहीं रही है दूसरी ओर आईटी और आईटी इनेबल सर्विसेज के प्लॉट की डिमांड बढ़ रही है। ऐसे में जो जमीन नहीं बिक रही हैं उनका भू-उपयोग आईटी और आईटीईएस में तब्दील कराने की योजना है। चूंकि ऐसी जमीनों के भू-उपयोग बदलने की मंजूरी शासन स्तर से ही हो सकती है। लिहाजा प्राधिकरण की ओर से इस बाबत सामान्य प्रक्रिया अपनाते हुए इसे शासन को भेजने की कवायद की जाएगी। इसमें बोर्ड से अनुमोदन प्राप्त करना जरूरी होगा। शासन की मंजूरी के बाद इसकी बदले हुए भू-उपयोग में स्कीम निकाली जा सकती है।