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नगीना उप-तहसील में जनसुविधाओं का अभाव
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नगीना। उप तहसील में वर्षों से जन सुविधाओं का अभाव है। इससे आने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जबकि उप-तहसील घोषित किए हुए 20 साल से भी अधिक समय हो गया है। उप-तहसील क्षेत्र में 56 गांव और 44 ग्राम पंचायतें हैं। क्षेत्रफल के हिसाब से नगीना खंड काफी बड़ा है। कुल मिलाकर नगीना को तहसील बनाने के लिए सभी मापदंड पूरे हैं।
इसके बाद भी उप-तहसील को तहसील का दर्जा देना तो दूर उप-तहसील के मुताबिक भी सुविधाएं नहीं दी जा सकी। क्षेत्र के लोगों के लिए तो बैठने का कोई स्थान नहीं है, साथ में कर्मचारियों के लिए भी उप-तहसील में कोई उपयुक्त जगह नहीं है। पटवारियों की बात की जाए तो वे अपने कीमती जमीनी रिकॉर्ड को लेकर इधर-उधर किराए के कमरों में भटक रहे हैं।
तहसील में नहीं है पूरा स्टाफ :
पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल सरकार ने स्थानीय लोगों की मांग पर नगीना को वर्ष 1993 में उप-तहसील का दर्जा दिया था। लेकिन उस दिन के बाद से आज तक उप-तहसील कार्यालय में स्टाफ की कमी पूरी नहीं की गई। इसके अलावा लोग 16 किलोमीटर दूर फिरोजपुर झिरका तहसील में जाकर काम कराते हैं। क्षेत्रवासी जकरिया, नजर आलम, जानू अंसारी, भूरू व अबरार प्रधान सहित दर्जनों लोगों ने बताया कि उप तहसील के पास अपना भवन नहीं है। यहां पर उप-तहसील किराए की इमारत में महज दो कमरों में सिमट कर रह गई है। फिलहाल बीडीपीओ कार्यालय के दो कमरों में चल रही उप-तहसील में कर्मचारी भी पर्याप्त नहीं है। तहसील कार्यालय के कर्मचारी भी काफी परेशान हैं। यहां तक कि इस तहसील में बिजली-पानी व शौचालय की सुविधा भी नहीं है।
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यह बात सही है कि यहां पर न तो पानी की सुविधा है, न शौचालय की सुविधा है। इसके अलावा बिजली की सुविधा भी नहीं है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को पत्र भेजा जा चुका है। उम्मीद है जल्द ही तहसील सुविधाओं से लैस होगी।
पवन कुमार, नायब तहसीलदार नगीना
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इसके बाद भी उप-तहसील को तहसील का दर्जा देना तो दूर उप-तहसील के मुताबिक भी सुविधाएं नहीं दी जा सकी। क्षेत्र के लोगों के लिए तो बैठने का कोई स्थान नहीं है, साथ में कर्मचारियों के लिए भी उप-तहसील में कोई उपयुक्त जगह नहीं है। पटवारियों की बात की जाए तो वे अपने कीमती जमीनी रिकॉर्ड को लेकर इधर-उधर किराए के कमरों में भटक रहे हैं।
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तहसील में नहीं है पूरा स्टाफ :
पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल सरकार ने स्थानीय लोगों की मांग पर नगीना को वर्ष 1993 में उप-तहसील का दर्जा दिया था। लेकिन उस दिन के बाद से आज तक उप-तहसील कार्यालय में स्टाफ की कमी पूरी नहीं की गई। इसके अलावा लोग 16 किलोमीटर दूर फिरोजपुर झिरका तहसील में जाकर काम कराते हैं। क्षेत्रवासी जकरिया, नजर आलम, जानू अंसारी, भूरू व अबरार प्रधान सहित दर्जनों लोगों ने बताया कि उप तहसील के पास अपना भवन नहीं है। यहां पर उप-तहसील किराए की इमारत में महज दो कमरों में सिमट कर रह गई है। फिलहाल बीडीपीओ कार्यालय के दो कमरों में चल रही उप-तहसील में कर्मचारी भी पर्याप्त नहीं है। तहसील कार्यालय के कर्मचारी भी काफी परेशान हैं। यहां तक कि इस तहसील में बिजली-पानी व शौचालय की सुविधा भी नहीं है।
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यह बात सही है कि यहां पर न तो पानी की सुविधा है, न शौचालय की सुविधा है। इसके अलावा बिजली की सुविधा भी नहीं है। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को पत्र भेजा जा चुका है। उम्मीद है जल्द ही तहसील सुविधाओं से लैस होगी।
पवन कुमार, नायब तहसीलदार नगीना