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Noida News: नोएडा के नए सेक्टरों में 'भूलभुलैया' जैसे मकान नंबर

Sat, 13 Jun 2026 09:20 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 13 Jun 2026 09:20 PM IST
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'Labyrinth-like' house numbers in Noida's new sectors
फोटो
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नोएडा के नए सेक्टरों में 'भूलभुलैया' जैसे मकान नंबर
एसके-1 के बाद आ रहा जीयू-1, प्लॉट नंबरों के चक्कर में आधे-आधे घंटे भटक रहे रिश्तेदार और डिलीवरी बॉय
आरडब्ल्यूए ने प्राधिकरण से की मैप लगाने की मांग


माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। शहर भले ही प्री प्लानिंग के साथ बसा हो, लेकिन नए सेक्टरों की प्लानिंग पुराने ढर्रे पर होने के कारण निवासियों के नाते रिश्तेदार भटक रहे हैं। नए सेक्टरों में ब्लॉक न होने से अव्यवस्थित नंबरों के चलते लोगों को आधे-आधे घंटे तक प्लॉट ढूंढने में लग जाते हैं।


सेक्टर-117 के आरडब्ल्यूए अध्यक्ष कोसिंदर यादव ने बताया कि उनका सेक्टर 2011 में बसना शुरू हुआ था। करीब 150 परिवार यानी एक हजार लोगों की आबादी वाले सेक्टर में प्लाटों के नंबर ब्लॉक वाइज और क्रमिक न होने से आवास का पहला मकान नंबर एक गेट की तरफ पर पड़ता है तो दूसरा मकान नंबर तीसरे गेट के पास पड़ता है। यदि मानचित्र के अनुसार देखें तो एसके-1 के बाद जीयू-1, केओ-5, केओ-3 एक ही क्रम में आ रहे हैं। जबकि उनके आगे के नंबर किसी तीसरी चौथी गली के प्लॉट का नंबर है। यदि अन्य पुराने सेक्टरों की बात करें, तो उनमें ब्लॉक वाइज जैसे बी ब्लॉक का बी-1, बी-2, बी-3 एक ही क्रम में प्लॉटों का नंबर है। ऐसे में यदि कोई डिलीवरी बॉय, डाक कर्मी या नाते रिश्तेदार सेक्टर में आते हैं तो वह करीब आधे घंटे तक इसी कारण भटकते रह जाते हैं। यह हाल सिर्फ सेक्टर-117 का नहीं, बल्कि सेक्टर-116, 144, 142, 151ए का भी है। जो नए सेक्टरों की गिनती में आते हैं। इसका उपाय निकालते हुए सेक्टरवासियों ने नोएडा प्राधिकरण को पत्र लिखकर प्रवेश द्वार पर ही वाहन संख्या सहित मानचित्र स्थापित करने का आग्रह किया है। ताकि यदि कोई नया व्यक्ति सेक्टर में आता है तो उसे सही और सीधी जानकारी मिल सके।
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हमारे यहां गांव के पुराने नंबर की तर्ज पर प्लॉटों के नंबर हैं, जो कि अव्यवस्थित हैं, जिससे अक्सर लोग भटक जाते हैं-ब्रह्मपाल सिंह, आरडब्ल्यूए अध्यक्ष, सेक्टर 116
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हमने नोएडा प्राधिकरण को इसी समस्या को लेकर पत्र लिखकर मांग की है कि प्रवेश द्वार पर मानचित्र स्थापित किया जाए-कोसिंदर यादव, सेक्टर 117, आरडब्ल्यूए अध्यक्ष
कई डिलीवरी ब्वॉय आते हैं, क्रमिक मकान नंबर न होने के कारण अक्सर वह भटक जाते हैं, जिसके चलते काफी परेशानी होती है-भगत सिंह तोंगड़, आरडब्ल्यूए महासचिव, सेक्टर 144


करीब चार-पांच साल पहले सेक्टर की स्थापना हुई थी, तीन गांव मिलाकर सेक्टर बनाया गया है, जिसमें अभी भी गली नंबर के आधार पर घर पहचाने जाते हैं-संसार नागर, आरडब्ल्यूए उपाध्यक्ष, सेक्टर 151ए
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