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Noida News: खैर के अधिवक्ताओं ने दी दोबारा आंदोलन की चेतावनी
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दि फौजदारी एवं राजस्व बार एसोसिएशन ने एक बार फिर न्यायालयों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कड़ा रुख अपनाया है। संगठन ने कहा है कि कोई सकारात्मक बदलाव नजर नहीं आ रहा है। यदि इसमें सुधार नहीं आया तो फिर आंदोलनात्मक कदम उठाना पड़ सकता है।
संगठन की ओर से अध्यक्ष चौधरी यशवीर सिंह, महामंत्री अजय चौहान और मीडिया प्रभारी आनंद गौतम ने बताया कि बीते 19 सितंबर से अधिवक्ता न्यायालयों के बहिष्कार पर थे। अधिवक्ताओं का कहना है कि एसडीएम कोर्ट और तहसीलदार कोर्ट में तैनात अधिकारियों का व्यवहार एवं कार्यशैली दोषपूर्ण बनी हुई है, जिसके चलते 55 दिनों तक न्यायिक कार्य से दूरी बनाए रखी गई थी।
बीते दिनों एसडीएम और तहसीलदार के साथ वार्ता के बाद कुछ सामंजस्य बनने पर अधिवक्ताओं ने बहिष्कार समाप्त कर एक दिसंबर को न्यायालयों की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने की शर्त पर दोबारा न्यायिक कार्य शुरू किया था।
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आगे की रणनीति पर भी विचार किया जाएगा
अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया था कि अगर निर्धारित तारीख तक सुधार देखने को नहीं मिला तो आगे की रणनीति तय की जाएगी। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि बहिष्कार समाप्त किए जाने के बाद एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन न्यायालयों की कार्यप्रणाली में कोई भी सकारात्मक बदलाव नजर नहीं आ रहा है। कई अधिवक्ताओं ने शिकायत की कि अधिकारियों का व्यवहार पहले जैसा ही बना हुआ है और फाइलों के निस्तारण से लेकर सामान्य कार्यवाही तक में लापरवाही जारी है।
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संगठन की ओर से अध्यक्ष चौधरी यशवीर सिंह, महामंत्री अजय चौहान और मीडिया प्रभारी आनंद गौतम ने बताया कि बीते 19 सितंबर से अधिवक्ता न्यायालयों के बहिष्कार पर थे। अधिवक्ताओं का कहना है कि एसडीएम कोर्ट और तहसीलदार कोर्ट में तैनात अधिकारियों का व्यवहार एवं कार्यशैली दोषपूर्ण बनी हुई है, जिसके चलते 55 दिनों तक न्यायिक कार्य से दूरी बनाए रखी गई थी।
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बीते दिनों एसडीएम और तहसीलदार के साथ वार्ता के बाद कुछ सामंजस्य बनने पर अधिवक्ताओं ने बहिष्कार समाप्त कर एक दिसंबर को न्यायालयों की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने की शर्त पर दोबारा न्यायिक कार्य शुरू किया था।
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आगे की रणनीति पर भी विचार किया जाएगा
अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया था कि अगर निर्धारित तारीख तक सुधार देखने को नहीं मिला तो आगे की रणनीति तय की जाएगी। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि बहिष्कार समाप्त किए जाने के बाद एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन न्यायालयों की कार्यप्रणाली में कोई भी सकारात्मक बदलाव नजर नहीं आ रहा है। कई अधिवक्ताओं ने शिकायत की कि अधिकारियों का व्यवहार पहले जैसा ही बना हुआ है और फाइलों के निस्तारण से लेकर सामान्य कार्यवाही तक में लापरवाही जारी है।