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जीका वायरस की जांच के लिए जिम्स पश्चिमी यूपी का पहला संस्थान बना

Sat, 27 Nov 2021 07:27 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 27 Nov 2021 07:27 PM IST
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JIMS becomes the first institute in western UP to test for Zika virus
जिम्स स्थित लैब प्रभारी डॉक्टर विवेक गुप्ता टीम के साथ। - फोटो : Grnoida
ग्रेटर नोएडा। कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) जीका वायरस की जांच करने वाला पश्चिमी उत्तर प्रदेश का पहला संस्थान बन गया है। शासन स्तर और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च से हरी झंडी मिलने के बाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पुणे से (प्राइमर्स) जांच किट मिल चुकी है। सोमवार से चिकनगुनिया और डेंगू के नमूनों में जीका वायरस के संभावित लक्षणों के आधार पर जांच शुरू हो जाएगी। संस्थान के निदेशक ब्रिगेडियर डॉक्टर राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि कोरोना काल में लोगों को बेहतर इलाज देने के मामले में जिम्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यहां मरीजों के लिए कई स्वास्थ्य सुविधाएं शुरू की गई हैं। इनमें मॉडिक्यूलर डिजीज एंड रिसर्च लेबोरेटरी (एमडीआरएल) व वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी-दो (वीआरडीएल) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। दोनों लैब पहले से ही मौजूद हैं।
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उन्होंने बताया कि जिम्स बेहतर चिकित्सा सेवा देने में लगातार आगे बढ़ रहा है। सोमवार से जीका वायरस की जांच की तैयारी पूरी कर ली गई है। भविष्य में अन्य वायरस आधारित शोध कार्य को भी बढ़ावा मिलेगा। वीआरडीएल लैब के प्रभारी डॉक्टर विवेक गुप्ता ने बताया कि जिम्स में कोरोना के बाद तेजी से जांच सुविधाएं बढ़ी हैं। इसका फायदा गौतमबुद्ध नगर ही नहीं बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों के मरीजों व अस्पतालों को होगा। यहां जीका वायरस जांच के लिए तमाम आधुनिक सुविधाएं पहले से ही मौजूद हैं। पर्याप्त संख्या में जांच किट भी मिल चुकी हैं। हालांकि, लक्षण समान होने के कारण चिकनगुनिया और डेंगू की निगेटिव रिपोर्ट आने पर ही जीका वायरस की जांच की जा सकेगी।
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चार कर्मचारियों की टीम तैनात
जीका वायरस मूल रूप से दक्षिण अफ्रीका का माना जा रहा है। विदेश से आने वाले मरीजों में इसकी संभावना अधिक होती है। खासकर जो लोग दक्षिण अफ्रीका या इसके पड़ोसी देशों से आ रहे हैं। उनकी जांच प्राथमिकता से होगी। संस्थान में लैब प्रभारी डॉक्टर विवेक गुप्ता समेत चार कर्मियों की टीम व कोविड समेत जीका वायरस जांच के लिए सात आरटीपीसीआर व पांच स्वचालित रिबोन्यूक्लिब एसिड (आरएनए) मशीनें मौजूद हैं।
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