{"_id":"664252d31f85b966c00f9b0c","slug":"jaypee-project-nclat-verdict-in-yeida-case-will-clear-the-picture-noida-news-c-1-gnd1002-1694973-2024-05-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"जेपी परियोजना: यीडा मामले में एनसीएलएटी के फैसले के बाद साफ होगी तस्वीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जेपी परियोजना: यीडा मामले में एनसीएलएटी के फैसले के बाद साफ होगी तस्वीर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जेपी इंफ्राटेक के सेक्टर-128 स्थित जेपी विशटाउन मामले में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) के यमुना प्राधिकरण (यीडा) के मामले में फैसले पर परियोजना के निर्माण की तस्वीर साफ होगी। परियोजना का काम सुरक्षा रियल्टर्स को मिला है। लेकिन कोर्ट में चल रहे मामलों की वजह से काम की प्रगति काफी धीमी है। ऐसे में परियोजना के पूरा होने पर असर पड़ रहा है।
यीडा ने अप्रैल 2023 में एनसीएलएटी में रिज़ॉल्यूशन प्लान की मंजूरी को चुनौती दी। एनसीएलटी का वैध आदेश होने के बावजूद जुलाई 2023 में अचानक सुरक्षा ने यीडा को एक समझौता प्रस्ताव प्रस्तुत किया। सुरक्षा ने घर खरीदने वालों को भरोसा दिलाया कि यूपी कैबिनेट जल्द ही समझौता प्रस्ताव को मंजूरी दे देगी। 18 अप्रैल 2024 को यीडा ने एनसीएलएटी में समझौता प्रस्ताव को स्वीकार करने से इन्कार कर दिया और यीडा के मामले में योग्यता के आधार पर सुनवाई शुरू हुई। 18 दिन के अंदर यानी 06 मई को एनसीएलएटी ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
विज्ञापन
गिनती के फ्लैटों की रजिस्ट्री
दरअसल बीते एक साल में जेपी की परियोजना में गिनती के फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री हुई है। बीते वर्ष मार्च में सुरक्षा रियल्टर्स ने जेपी की परियोजनाओं के टेकओवर के बाद साढ़े तीन साल में 250 टावरों का काम पूरा करने का दावा किया था। लेकिन दावा हवा-हवाई साबित हुआ। टेकओवर के एक साल बाद भी काम की रफ्तार काफी धीमी है। फ्लैट खरीदारों का कहना है कि टेकओवर के समय तीन माह में काम शुरू करने की बात कही गई थी। लेकिन वर्तमान समय तक सफलता हाथ नहीं लगी है। टेकओवर के बाद इंम्प्लीमेंटेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी (आईएमसी) बनाई गई। इसमें सुरक्षा रियल्टर्स के दो सदस्य, आईआरपी, फ्लैट खरीदार और एक बैंकर को शामिल किया गया। दावा किया गया कि काम तेज गति से होगा। लेकिन अब तक केवल 7 टावरों की ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट मिली है। आईएमसी से पहले 11926 खरीदारों की रजिस्ट्री हुई है, जबकि इसके बाद केवल 415 खरीदारों के रजिस्ट्री का सपना पूरा हो चुका है। इसी तरह से आईएमसी से पहले 11243 तो इसके गठन के बाद करीब 350 को फिजिकल हैंडओवर मिला है। ऐसे में कुल 32724 फ्लैटों में से अभी भी कइयों को कब्जा मिलना बाकी है।
विज्ञापन
सुरक्षा के टेकओवर के 15 माह बाद भी काम की रफ्तार काफी धीमी है। घरों के समय से मिलने की संभावना कम लग रही है। अब यीडा मामले में फैसले के बाद ही तस्वीर साफ होगी। हालांकि आयकर के मामले में सुनवाई की अगली तिथि 15 जुलाई की है।
- आशीष मोहन गुप्ता, अध्यक्ष, जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड रियल एस्टेट अलॉटीज वेलफेयर सोसाइटी