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अगले साल जून से ई व्हीकल हाईवे पर सफर होगा आसान
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it will be easy to travel on e vehicle highway frome june next year
अगले साल जून से ई-व्हीकल हाईवे पर सफर होगा आसान
नोएडा। पेट्रोलियम पदार्थों के आयात पर निर्भरता, ईंधन लागत और प्रदूषण को कम करने के लिए केंद्र सरकार इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा दे रही है। इस कड़ी में दिल्ली से आगरा के बीच देश के पहले ई-व्हीकल हाईवे का शुरुआती ट्रायल रन बुधवार से शुरू हो गया। इस योजना के तहत यमुना एक्सप्रेसवे के रास्ते दिल्ली से आगरा के बीच इलेक्ट्रिक बसें और टैक्सियां राह आसान बनाएंगी। वहीं, अगले साल फरवरी से दिल्ली-जयपुर के बीच ट्रायल रन शुरू होगा। दिल्ली-आगरा और दिल्ली-जयपुर के बीच करीब 500 किलोमीटर के दोनों ही हाईवे दुनिया के पहले सबसे लंबे ई-व्हीकल हाइवे होंगे। जून तक इस सुविधा का लाभ उठाया जा सकेगा।
बुधवार को ट्रायल रन को हरी झंडी दिखाने के लिए दिल्ली से ई-व्हीकल के काफिले के साथ केंद्रीय राज्यमंत्री (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) प्रताप सी सारंगी ग्रेटर नोएडा एक्सपो मार्ट पहुंचे। इससे पहले डीएनडी फ्लाईवे पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण ने दिल्ली की आबोहवा को बुरी तरह बिगाड़कर रख दिया है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में तकनीक के संतुलित प्रयोग से इस योजना का विकास हुआ है, जो देश को काफी आगे लेकर जाएगी।
वहीं, एडवांस सर्विसेज फॉर सोशल एंड एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म (अस्सार) के कार्यक्रम निदेशक (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) अभिजीत सिन्हा ने बताया कि भारत में दुनिया के सबसे लंबे ई-व्हीकल हाईवे बनने जा रहे हैं। फिलहाल, जर्मनी में 120 किलोमीटर का ई-कॉरिडोर है, जो दुनिया में सबसे लंबा माना जाता है। देश में दिल्ली-आगरा और दिल्ली-जयपुर के बीच 500 किलोमीटर का ई-व्हीकल हाईवे होगा, जो दुनिया में सबसे लंबा होगा। इसकी लागत ई-कॉरिडोर से काफी कम है। ई-कॉरिडोर की लागत 2 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर होती है। जबकि ई-हाईवे 40 लाख रुपये प्रति किलोमीटर में तैयार होगा। देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी न बढ़ने का एक कारण था कि लोग महंगे निवेश से घबराते थे। ऐसी गाड़ी नहीं खरीदना चाहते थे, जिसकी ईंधन क्षमता उनके दायरे से बाहर हो और लंबी देर तक चार्जिंग की सुविधा न होना भी एक वजह थी। ई-व्हीकल हाईवे योजना के तहत अब गाड़ी खरीदने की जरूरत नहीं है। डॉकिंग स्टेशन से कार लेकर खुद ड्राइव करते हुए सफर का आनंद उठाया जा सकेगा।
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सस्ता होगा सफर, 12 बसें व 200 कार राह बनाएंगी आसान
अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल एक महीने का ट्रायल करके सुधार की गुंजाइश तलाशी जाएगी। इसके बाद चार्जिंग स्टेशन, डॉकिंग स्टेशन और वाहन उपलब्ध कराने के लिए आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। योजना के अनुसार साधारण हाईवे को ई-व्हीकल हाईवे बनाने में 90 दिन का समय लगता है। उम्मीद है कि जून तक इसकी शुरुआत हो जाएगी। हालांकि, दिल्ली-आगरा के बीच पहले चरण में सिर्फ इलेक्ट्रिक कारों को उतारा जाएगा, जबकि दिल्ली-जयपुर हाईवे पर इलेक्ट्रिक बसें शुरुआत में चलाई जाएंगी। शुरुआती दौर में दिल्ली-आगरा के बीच 12 बसें और 200 कार रूट पर उतारी जाएंगी।
20 चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे
दोनों ई-व्हीकल हाईवे पर कुल 20 चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। इनमें 18 ग्रिड आधारित ओर 2 सौर ऊर्जा आधारित होंगे। नोएडा से आगरा के बीच आठ चार्जिंग स्टेशन का प्रस्ताव मंजूर हो गया है। जबकि आठ और स्टेशन बनाने की जरूरत समझी जा रही है।
देश का पहला एंटी थेफ्ट ई-हाईवे होगा
दिल्ली से आगरा और दिल्ली से जयपुर के बीच ई-हाईवे की खासियत यह है कि बेड़े में शामिल कोई भी वाहन तय रूट इधर-उधर हुआ तो वाहन लॉक हो जाएगा। डॉकिंग स्टेशन से कार हायर करके उसे हाईवे से अलग ज्यादा दूर तक नहीं ले जा सकेंगे। वाहन टेलीमैट्रिक्स के जरिये चार्जिंग स्टेशन से आपस में लिंक रहेंगे। वाहनों के रूट की मैपिंग कर दी जाएगी। जब कोई वाहन निर्धारित रूट से अलग जाएगा तो ऑटोमैटिक अलार्म बजेगा। इसके बाद कंट्रोल रूम से ड्राइवर से संपर्क किया जाएगा। वहां से जब कोई जवाब नहीं मिलेगा तो वाहन लॉक कर दिया जाएगा। इससे सभी चार्जिंग प्वाइंट बंद हो जाएंगे और वाहन खड़ा हो जाएगा। वहीं, बस और कारों में सीट के सामने स्क्रीन पर सफर करने वाले अपने परिवार या खास लोगों को लाइव ट्रेकिंग का लिंक भी भेज सकेंगे। पेटीएम से बुकिंग की सुविधा होगी और गंतव्य तक पहुंचने के बाद आपको सुविधा कैसी लगी, इसकी रेटिंग की जा सकेगी।
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नोएडा। पेट्रोलियम पदार्थों के आयात पर निर्भरता, ईंधन लागत और प्रदूषण को कम करने के लिए केंद्र सरकार इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा दे रही है। इस कड़ी में दिल्ली से आगरा के बीच देश के पहले ई-व्हीकल हाईवे का शुरुआती ट्रायल रन बुधवार से शुरू हो गया। इस योजना के तहत यमुना एक्सप्रेसवे के रास्ते दिल्ली से आगरा के बीच इलेक्ट्रिक बसें और टैक्सियां राह आसान बनाएंगी। वहीं, अगले साल फरवरी से दिल्ली-जयपुर के बीच ट्रायल रन शुरू होगा। दिल्ली-आगरा और दिल्ली-जयपुर के बीच करीब 500 किलोमीटर के दोनों ही हाईवे दुनिया के पहले सबसे लंबे ई-व्हीकल हाइवे होंगे। जून तक इस सुविधा का लाभ उठाया जा सकेगा।
बुधवार को ट्रायल रन को हरी झंडी दिखाने के लिए दिल्ली से ई-व्हीकल के काफिले के साथ केंद्रीय राज्यमंत्री (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) प्रताप सी सारंगी ग्रेटर नोएडा एक्सपो मार्ट पहुंचे। इससे पहले डीएनडी फ्लाईवे पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण ने दिल्ली की आबोहवा को बुरी तरह बिगाड़कर रख दिया है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में तकनीक के संतुलित प्रयोग से इस योजना का विकास हुआ है, जो देश को काफी आगे लेकर जाएगी।
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वहीं, एडवांस सर्विसेज फॉर सोशल एंड एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म (अस्सार) के कार्यक्रम निदेशक (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) अभिजीत सिन्हा ने बताया कि भारत में दुनिया के सबसे लंबे ई-व्हीकल हाईवे बनने जा रहे हैं। फिलहाल, जर्मनी में 120 किलोमीटर का ई-कॉरिडोर है, जो दुनिया में सबसे लंबा माना जाता है। देश में दिल्ली-आगरा और दिल्ली-जयपुर के बीच 500 किलोमीटर का ई-व्हीकल हाईवे होगा, जो दुनिया में सबसे लंबा होगा। इसकी लागत ई-कॉरिडोर से काफी कम है। ई-कॉरिडोर की लागत 2 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर होती है। जबकि ई-हाईवे 40 लाख रुपये प्रति किलोमीटर में तैयार होगा। देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी न बढ़ने का एक कारण था कि लोग महंगे निवेश से घबराते थे। ऐसी गाड़ी नहीं खरीदना चाहते थे, जिसकी ईंधन क्षमता उनके दायरे से बाहर हो और लंबी देर तक चार्जिंग की सुविधा न होना भी एक वजह थी। ई-व्हीकल हाईवे योजना के तहत अब गाड़ी खरीदने की जरूरत नहीं है। डॉकिंग स्टेशन से कार लेकर खुद ड्राइव करते हुए सफर का आनंद उठाया जा सकेगा।
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सस्ता होगा सफर, 12 बसें व 200 कार राह बनाएंगी आसान
अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल एक महीने का ट्रायल करके सुधार की गुंजाइश तलाशी जाएगी। इसके बाद चार्जिंग स्टेशन, डॉकिंग स्टेशन और वाहन उपलब्ध कराने के लिए आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। योजना के अनुसार साधारण हाईवे को ई-व्हीकल हाईवे बनाने में 90 दिन का समय लगता है। उम्मीद है कि जून तक इसकी शुरुआत हो जाएगी। हालांकि, दिल्ली-आगरा के बीच पहले चरण में सिर्फ इलेक्ट्रिक कारों को उतारा जाएगा, जबकि दिल्ली-जयपुर हाईवे पर इलेक्ट्रिक बसें शुरुआत में चलाई जाएंगी। शुरुआती दौर में दिल्ली-आगरा के बीच 12 बसें और 200 कार रूट पर उतारी जाएंगी।
20 चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे
दोनों ई-व्हीकल हाईवे पर कुल 20 चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। इनमें 18 ग्रिड आधारित ओर 2 सौर ऊर्जा आधारित होंगे। नोएडा से आगरा के बीच आठ चार्जिंग स्टेशन का प्रस्ताव मंजूर हो गया है। जबकि आठ और स्टेशन बनाने की जरूरत समझी जा रही है।
देश का पहला एंटी थेफ्ट ई-हाईवे होगा
दिल्ली से आगरा और दिल्ली से जयपुर के बीच ई-हाईवे की खासियत यह है कि बेड़े में शामिल कोई भी वाहन तय रूट इधर-उधर हुआ तो वाहन लॉक हो जाएगा। डॉकिंग स्टेशन से कार हायर करके उसे हाईवे से अलग ज्यादा दूर तक नहीं ले जा सकेंगे। वाहन टेलीमैट्रिक्स के जरिये चार्जिंग स्टेशन से आपस में लिंक रहेंगे। वाहनों के रूट की मैपिंग कर दी जाएगी। जब कोई वाहन निर्धारित रूट से अलग जाएगा तो ऑटोमैटिक अलार्म बजेगा। इसके बाद कंट्रोल रूम से ड्राइवर से संपर्क किया जाएगा। वहां से जब कोई जवाब नहीं मिलेगा तो वाहन लॉक कर दिया जाएगा। इससे सभी चार्जिंग प्वाइंट बंद हो जाएंगे और वाहन खड़ा हो जाएगा। वहीं, बस और कारों में सीट के सामने स्क्रीन पर सफर करने वाले अपने परिवार या खास लोगों को लाइव ट्रेकिंग का लिंक भी भेज सकेंगे। पेटीएम से बुकिंग की सुविधा होगी और गंतव्य तक पहुंचने के बाद आपको सुविधा कैसी लगी, इसकी रेटिंग की जा सकेगी।