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नौ साल बाद खुला इंटरचेंज, पर यमुना एक्सप्रेस वे पर सफर आसान नहीं
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जेवर। यमुना एक्सप्रेसवे पर आगरा आने-जाने वाले लोगों के लिए जेवर के झांजर मार्ग पर सबौता इंटरचेंज नौ साल बाद खोल दिया गया है। इससे जेवर पर गलत दिशा में उतरने वाले वाहनों से हो रहे हादसों पर लगाम लग सकेगी। हालांकि, इससे वाहन चालकों का सफर आसान नहीं हुआ। जेवर में टोल बूथ नहीं बनने से चालकों को ग्रेटर नोएडा के परी चौक तक का यानी 35 किमी का अतिरिक्त टोल देकर महंगा सफर करना पड़ रहा है।
एक्सप्रेसवे प्रशासन का कहना है कि इंटरचेंज आम लोगों के लिए खोल दिया गया है। इससे जेवर से आगरा तक के सफर की राह आसान हो गई है। वहीं, राहगीरों का कहना है कि अभी उनकी जेब पर 35 किमी का अतिरिक्त टोल बोझ पड़ रहा है। दरअसल, जेवर से चढ़ने वाले रास्ते पर टोल बूथ नहीं होने से इन वाहन चालकों को मुख्य टोल पर जाकर शुल्क देना होता है। वहां ग्रेटर नोएडा से आया हुआ मानकर 35 किमी का अतिरिक्त टोल लिया जाता है। इसी तरह आगरा से जेवर आने वालों के लिए भी मुख्य टोल पर ही वसूली होती है। इन वाहन चालकों को भी जेवर पर उतरने के बाद भी ग्रेटर नोएडा तक का टोल देना पड़ रहा है।
क्या है समाधान
जेवर से आगरा की तरफ जाने वाले वाहनों से इंटरचेंज पर बूथ बनाकर वसूली की जानी चाहिए। जिससे जेवर से ही टोल वसूला जा सके। अगर टोल बूथ संभव न हो तो जेवर आने वाले वाहनों को यमुना एक्सप्रेसवे पर चढ़ने की पर्ची देनी चाहिए। जिससे 35 किमी के बजाए मुख्य टोल पर पहुंचने पर स्लिप दिखाकर जेवर तक का ही टोल देकर आगे का सफर किया जा सके।
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हादसों में आएगी कमी
इंटरचेंज चालू नहीं होने से आगरा की तरफ से आने वाले वाहन जेवर से ग्रेटर नोएडा की तरफ चढ़ने वाले रास्ते पर गलत दिशा में उतरते थे। बड़े वाहन यमुना एक्सप्रेसवे की चौथी लाइन से मुड़ना शुरू होते थे। ऐसे में पीछे से आ रहे वाहन चालक साबौता अंडरपास पार करने के बाद अक्सर हादसे का शिकार हो रहे थे। इस जगह नौ साल में कई हादसों हुए हैं। इनमें कई लोगों की जान जा चुकी है। जबकि, सैकड़ों घायल हो चुके हैं। इंटरचेंज खुलने से इन हादसों में कमी आएगी।
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एक्सप्रेसवे प्रशासन का कहना है कि इंटरचेंज आम लोगों के लिए खोल दिया गया है। इससे जेवर से आगरा तक के सफर की राह आसान हो गई है। वहीं, राहगीरों का कहना है कि अभी उनकी जेब पर 35 किमी का अतिरिक्त टोल बोझ पड़ रहा है। दरअसल, जेवर से चढ़ने वाले रास्ते पर टोल बूथ नहीं होने से इन वाहन चालकों को मुख्य टोल पर जाकर शुल्क देना होता है। वहां ग्रेटर नोएडा से आया हुआ मानकर 35 किमी का अतिरिक्त टोल लिया जाता है। इसी तरह आगरा से जेवर आने वालों के लिए भी मुख्य टोल पर ही वसूली होती है। इन वाहन चालकों को भी जेवर पर उतरने के बाद भी ग्रेटर नोएडा तक का टोल देना पड़ रहा है।
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क्या है समाधान
जेवर से आगरा की तरफ जाने वाले वाहनों से इंटरचेंज पर बूथ बनाकर वसूली की जानी चाहिए। जिससे जेवर से ही टोल वसूला जा सके। अगर टोल बूथ संभव न हो तो जेवर आने वाले वाहनों को यमुना एक्सप्रेसवे पर चढ़ने की पर्ची देनी चाहिए। जिससे 35 किमी के बजाए मुख्य टोल पर पहुंचने पर स्लिप दिखाकर जेवर तक का ही टोल देकर आगे का सफर किया जा सके।
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हादसों में आएगी कमी
इंटरचेंज चालू नहीं होने से आगरा की तरफ से आने वाले वाहन जेवर से ग्रेटर नोएडा की तरफ चढ़ने वाले रास्ते पर गलत दिशा में उतरते थे। बड़े वाहन यमुना एक्सप्रेसवे की चौथी लाइन से मुड़ना शुरू होते थे। ऐसे में पीछे से आ रहे वाहन चालक साबौता अंडरपास पार करने के बाद अक्सर हादसे का शिकार हो रहे थे। इस जगह नौ साल में कई हादसों हुए हैं। इनमें कई लोगों की जान जा चुकी है। जबकि, सैकड़ों घायल हो चुके हैं। इंटरचेंज खुलने से इन हादसों में कमी आएगी।