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Noida News: अरबों की भूमि घोटाले में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश
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मुरादाबाद। मायानगर सहकारी आवास समिति के अरबों के भूमि घोटाले की गूंज शासन स्तर तक पहुंच गई है। अपर आयुक्त आवास/ अपर निबंधक लखनऊ विनय कुमार मिश्रा ने शुक्रवार को मंडलीय सहकारी अधिकारी आवास सतीश कुमार को इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। एक पत्र जिलाधिकारी अनुज सिंह को भी भेजा है, जिसमें समिति की जमीनों का ऑडिट कराने को कहा गया है। साथ ही एआईजी स्टाम्प एवं पंजीयन से समिति की जमीनों की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने को कहा गया है।
जमीन घोटाले के इस मामले में रोज नई बातें सामने आ रही हैं। अब सामने आया है कि कमिश्नर द्वारा तीन सदस्यीय कमेटी की जांच रिपोर्ट से पहले ही 18 जनवरी को सहकारी अधिकारी की प्राथमिक जांच रिपोर्ट से उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अधिकारियों को इस घोटाले की जानकारी मिल गई थी। लेकिन, तब कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब तीन सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, समिति के पूर्व सहायक सचिव एवं वर्तमान सचिव ने मूल आवंटियों की फर्जी वसीयतें, गिफ्ट डीड तैयार कराने में मदद की थी।
लाकड़ी फाजलपुर योजना के तहत सर्किट हाउस के पास से लेकर लाकड़ी फाजलपुर तक कई भूखंडों पर समिति के कुछ सदस्यों और बिल्डरों की मिलीभगत से फर्जी कागजातों के जरिये कब्जा कर लिया गया। मामले की गूंज शासन तक पहुंची तो अपर आवास आयुक्त/ अपर निबंधक ने मंडलीय सहकारी अधिकारी (आवास) को धारा 66 के तहत एक सप्ताह में समिति की निरीक्षण आख्या प्रस्तुत करने की हिदायत दी है। समिति के दोषी पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही समिति के सचिव को हटाने के संबंध में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है।
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लैंड ऑडिट से और खुलेंगी घोटाले की परतें
अपर आवास आयुक्त लखनऊ ने एक पत्र डीएम को भी भेजा है। इसमें बताया कि मायानगर सहकारी आवास समिति के पूर्व सहायक सचिव और वर्तमान सचिव ने मूल आवंटियों के भूखंडों पर कब्जा कराने के लिए फर्जी दस्तावेज का प्रयोग किया। इस मामले में कई शिकायतें मिली हैं। लाभांश की राशि भी समिति में जमा नहीं कराई गई। ले-आउट में परिवर्तन कर संपत्तियों को खुर्द-बुर्द किया गया। इस मामले में विशेष लेखा परीक्षा कराने के लिए निदेशक सहकारी समितियां एवं पंचायत लेखा परीक्षा लखनऊ से अनुरोध किया गया है। उन्होंने डीएम से सहकारी अधिकारी आवास की उपस्थिति में एक कमेटी गठित कर समिति की लाकड़ी फाजलपुर, शाहपुर तिगरी सहित अन्य योजनाओं का लैंड ऑडिट कराने की सिफारिश की है। ऑडिट से घोटाले की और परतें खुलेंगी।
एआईजी समिति की जमीनों की खरीद-बिक्री पर लगाएं रोक
एआईजी निबंधन (स्टाम्प एवं पंजीयन) को लिखे गए पत्र में अपर आवास आयुक्त ने बताया है कि मायानगर सहकारी आवास समिति के भूखंडों और फ्लैट सहित अन्य संपत्तियों की फर्जी अभिलेखों के आधार खरीद-बिक्री की गई है। भूमि के वास्तविक स्वरूप को बदलकर अवैध ढंग से फैक्टरियां संचालित कराई गईं। उन्होंने समिति के भूखंडों के क्रय-विक्रय पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगाने को कहा है।
घोटालेबाज मौज में... धक्का खा रहे 184 आवंटी
तीन सदस्यीय जांच कमेटी की जांच रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 184 आवंटियों को मायानगर सहकारी आवास समिति के निर्मित फ्लैट अब तक नहीं मिले हैं। लोन लेकर फ्लैट की आस में आवंटी धक्के खा रहे हैं। फ्लैट पर किसी अन्य का कब्जा हो गया है। समिति के मूल सदस्य चंदू की जमीन को मिलते जुलते नाम पर गलत शपथपत्र के जरिये ट्रांसफर कर दिया गया। किसी आवंटी की मौत होने पर फर्जी वसीयत तैयार कर जमीन दूसरे को हस्तांतरित की गई।
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जमीन घोटाले के इस मामले में रोज नई बातें सामने आ रही हैं। अब सामने आया है कि कमिश्नर द्वारा तीन सदस्यीय कमेटी की जांच रिपोर्ट से पहले ही 18 जनवरी को सहकारी अधिकारी की प्राथमिक जांच रिपोर्ट से उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अधिकारियों को इस घोटाले की जानकारी मिल गई थी। लेकिन, तब कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब तीन सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, समिति के पूर्व सहायक सचिव एवं वर्तमान सचिव ने मूल आवंटियों की फर्जी वसीयतें, गिफ्ट डीड तैयार कराने में मदद की थी।
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लाकड़ी फाजलपुर योजना के तहत सर्किट हाउस के पास से लेकर लाकड़ी फाजलपुर तक कई भूखंडों पर समिति के कुछ सदस्यों और बिल्डरों की मिलीभगत से फर्जी कागजातों के जरिये कब्जा कर लिया गया। मामले की गूंज शासन तक पहुंची तो अपर आवास आयुक्त/ अपर निबंधक ने मंडलीय सहकारी अधिकारी (आवास) को धारा 66 के तहत एक सप्ताह में समिति की निरीक्षण आख्या प्रस्तुत करने की हिदायत दी है। समिति के दोषी पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही समिति के सचिव को हटाने के संबंध में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है।
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लैंड ऑडिट से और खुलेंगी घोटाले की परतें
अपर आवास आयुक्त लखनऊ ने एक पत्र डीएम को भी भेजा है। इसमें बताया कि मायानगर सहकारी आवास समिति के पूर्व सहायक सचिव और वर्तमान सचिव ने मूल आवंटियों के भूखंडों पर कब्जा कराने के लिए फर्जी दस्तावेज का प्रयोग किया। इस मामले में कई शिकायतें मिली हैं। लाभांश की राशि भी समिति में जमा नहीं कराई गई। ले-आउट में परिवर्तन कर संपत्तियों को खुर्द-बुर्द किया गया। इस मामले में विशेष लेखा परीक्षा कराने के लिए निदेशक सहकारी समितियां एवं पंचायत लेखा परीक्षा लखनऊ से अनुरोध किया गया है। उन्होंने डीएम से सहकारी अधिकारी आवास की उपस्थिति में एक कमेटी गठित कर समिति की लाकड़ी फाजलपुर, शाहपुर तिगरी सहित अन्य योजनाओं का लैंड ऑडिट कराने की सिफारिश की है। ऑडिट से घोटाले की और परतें खुलेंगी।
एआईजी समिति की जमीनों की खरीद-बिक्री पर लगाएं रोक
एआईजी निबंधन (स्टाम्प एवं पंजीयन) को लिखे गए पत्र में अपर आवास आयुक्त ने बताया है कि मायानगर सहकारी आवास समिति के भूखंडों और फ्लैट सहित अन्य संपत्तियों की फर्जी अभिलेखों के आधार खरीद-बिक्री की गई है। भूमि के वास्तविक स्वरूप को बदलकर अवैध ढंग से फैक्टरियां संचालित कराई गईं। उन्होंने समिति के भूखंडों के क्रय-विक्रय पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगाने को कहा है।
घोटालेबाज मौज में... धक्का खा रहे 184 आवंटी
तीन सदस्यीय जांच कमेटी की जांच रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 184 आवंटियों को मायानगर सहकारी आवास समिति के निर्मित फ्लैट अब तक नहीं मिले हैं। लोन लेकर फ्लैट की आस में आवंटी धक्के खा रहे हैं। फ्लैट पर किसी अन्य का कब्जा हो गया है। समिति के मूल सदस्य चंदू की जमीन को मिलते जुलते नाम पर गलत शपथपत्र के जरिये ट्रांसफर कर दिया गया। किसी आवंटी की मौत होने पर फर्जी वसीयत तैयार कर जमीन दूसरे को हस्तांतरित की गई।