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Noida News: जटिल महाधमनी विच्छेदन में भारत के डॉक्टरों को मिली सफलता

Wed, 06 Aug 2025 07:21 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 06 Aug 2025 07:21 PM IST
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Indian doctors get breakthrough in complex aortic dissection
72 वर्षीय मरीज के लिए रक्षक बने डॉक्टर, दुर्लभ हृदय सर्जरी में भारत को वैश्विक सम्मान भी दिलाया
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। भारत के डॉक्टरों ने हृदय रोग उपचार में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है जो न सिर्फ चिकित्सा इतिहास में दर्ज हुई है बल्कि दुर्लभ हृदय सर्जरी में देश को भी वैश्विक सम्मान दिलाया है। यह कमाल जटिल महाधमनी विच्छेदन को लेकर हुआ है जो भारत में पहला प्रलेखित वॉल्व-इन-वॉल्व टीएवीआई बन गया है। नई तकनीक के जरिए दिल्ली के निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने 72 वर्षीय महिला मरीज की जान बचाई है।

जानकारी के अनुसार, मरीज ने 14 वर्ष पहले एंडो-बेंटल प्रक्रिया यानी ऊतक महाधमनी वॉल्व और आरोही महाधमनी मूल प्रतिस्थापन कराई थी। उन्हें गंभीर सांस की तकलीफ और सीने में दर्द की शिकायत हुई जिसके बाद चिकित्सा जांच में पता चला कि उनके बायो-प्रोस्थेटिक वॉल्व का क्षरण हो चुका है और गंभीर संकुचन की स्थिति बन गई है। यह इसलिए अनोखा मामला बन गया क्योंकि मरीज की उम्र और उसकी दुर्बलता के साथ साथ महाधमनी में अवशिष्ट विच्छेदन के कारण ओपन सर्जरी का जोखिम बहुत अधिक था। टीएवीआई यानी महाधमनी वॉल्व प्रत्यारोपण के लिए पारंपरिक ऊरु मार्ग महाधमनी में जटिल विच्छेदन के कारण असंभव था। ऐसे में जब डॉक्टरों ने सीटी स्कैन का सहारा लिया तो स्पष्ट हुआ कि क्रोनिक विच्छेदन का फाल्स लुमेन वास्तविक लुमेन से बड़ा है। इससे डॉक्टरों का महाधमनी वाल्व तक पहुंचना मुश्किल हो गया।
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इसके बाद स्ट्रक्चरल हार्ट इंटरवेंशन प्रोग्राम के क्लिनिकल प्रमुख डॉ. गौतम नाइक और डॉ. निरंजन हिरेमठ के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने करीब 3.5 घंटे की जटिल प्रक्रिया में 23 मिमी नेविटर विजन ट्रांसकैथेटर हार्ट वॉल्व का सफल प्रत्यारोपण किया। हालांकि, सर्जरी के बाद छोटा नया फाल्स लुमेन सामने आया जिसका प्रबंधन सख्त ब्लड प्रेशर कंट्रोल के जरिए किया गया। इस बीच मरीज को ऑपरेशन के पांचवें दिन स्थिर हालत में डिस्चार्ज कर दिया गया।
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मरीजों के लिए नई उम्मीद की किरण
डॉ. नाइक ने कहा कि यह मामला जटिल हृदय रोग प्रबंधन में सहयोगी हृदय टीम दृष्टिकोण की अहमियत को दर्शाता है। उच्चस्तरीय इमेजिंग, अनुभवी नैदानिक निर्णय और उन्नत ट्रांसकैथेटर तकनीक से ऐसे परिणाम संभव बनाते हैं। भारत में ऐसे नवाचार न केवल चिकित्सा के स्तर को ऊंचा उठाते हैं बल्कि मरीजों के लिए नई उम्मीद की किरण भी हैं।
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