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Noida News: जीबीयू में भारत-कोरिया धम्म संवाद आयोजित
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फोटो-- -
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में दक्षिण कोरिया से आए बौद्ध विद्वान भिक्षु हिडाल ने विद्यार्थियों और प्रतिभागियों को ध्यान का अभ्यास कराया। महात्मा ज्योतिबा फुले ध्यान केंद्र में आयोजित अकादमिक व्याख्यान में भारत और दक्षिण कोरिया की साझा बौद्ध परंपराओं, ध्यान पद्धतियों और आध्यात्मिक संबंधों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम का आयोजन बौद्ध अध्ययन एवं सभ्यता संकाय और वाया इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में भारत-कोरिया धम्म संवाद: एक धम्म, दो भूमि विषय पर किया गया।
भिक्षु हिडाल ने कहा कि ध्यान का अभ्यास किसी भी परिस्थिति में किया जा सकता है। ध्यान और विपश्यना मन को शांत, सजग और एकाग्र बनाने में सहायक हैं। उन्होंने कोरियाई पद्धति से ध्यान का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया। विशिष्ट अतिथि भिक्षु इरम ने नियमित ध्यान को मानसिक तनाव कम करने और आंतरिक शांति का माध्यम बताया।
प्रो. श्वेता आनंद ने कहा कि व्यस्त जीवनशैली में ध्यान की प्रासंगिकता बढ़ गई है। कार्यक्रम में दक्षिण कोरिया से आए 22 से अधिक अतिथियों का पारंपरिक खादा पहनाकर स्वागत किया गया। भिक्षु हिडाल और भिक्षु इरम को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर डॉ. मनीष मेश्राम और डॉ. ज्ञानादित्य शाक्य सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में दक्षिण कोरिया से आए बौद्ध विद्वान भिक्षु हिडाल ने विद्यार्थियों और प्रतिभागियों को ध्यान का अभ्यास कराया। महात्मा ज्योतिबा फुले ध्यान केंद्र में आयोजित अकादमिक व्याख्यान में भारत और दक्षिण कोरिया की साझा बौद्ध परंपराओं, ध्यान पद्धतियों और आध्यात्मिक संबंधों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम का आयोजन बौद्ध अध्ययन एवं सभ्यता संकाय और वाया इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में भारत-कोरिया धम्म संवाद: एक धम्म, दो भूमि विषय पर किया गया।
भिक्षु हिडाल ने कहा कि ध्यान का अभ्यास किसी भी परिस्थिति में किया जा सकता है। ध्यान और विपश्यना मन को शांत, सजग और एकाग्र बनाने में सहायक हैं। उन्होंने कोरियाई पद्धति से ध्यान का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया। विशिष्ट अतिथि भिक्षु इरम ने नियमित ध्यान को मानसिक तनाव कम करने और आंतरिक शांति का माध्यम बताया।
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प्रो. श्वेता आनंद ने कहा कि व्यस्त जीवनशैली में ध्यान की प्रासंगिकता बढ़ गई है। कार्यक्रम में दक्षिण कोरिया से आए 22 से अधिक अतिथियों का पारंपरिक खादा पहनाकर स्वागत किया गया। भिक्षु हिडाल और भिक्षु इरम को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर डॉ. मनीष मेश्राम और डॉ. ज्ञानादित्य शाक्य सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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