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जन्म का साथ है हमारा तुम्हारा: पहले पति की मौत, फिर एक घंटे बाद पत्नी ने छोड़ी दुनिया; एक साथ अंतिम संस्कार

Wed, 04 Sep 2024 11:04 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जेवर
अमर उजाला नेटवर्क, जेवर Published by: अनुज कुमार Updated Wed, 04 Sep 2024 11:04 PM IST
सार

परिजनों ने बताया कि कुछ समय से गजेंद्र सिंह की तबियत कुछ ठीक नहीं थी, लेकिन उनकी पत्नी जीवन भर साए की तरह हर खुशी और गम में पति के साथ खड़ी रही।

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In grief of her husband's death, the wife left the world after one hour
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

तहसील जेवर क्षेत्र के नीमका गांव में बुधवार को बुजुर्ग दंपती की मौत हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि पहले पति की मौत हुई थी। उसके एक घंटे बाद पति की मौत के गम में पत्नी ने भी दुनिया छोड़ दी। बताया जा रहा है कि हृदय गति रुकने से दोनों की मौत हुई है। घर से दंपती की अर्थी एक साथ उठी और एक साथ अंतिम संस्कार हुआ। क्षेत्र के लोगों को जैसे ही घटना की जानकारी हुई तो सभी के बीच दंपती के प्रेम की चर्चा है।
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नीमका गांव निवासी गजेंद्र पहलवान (68 वर्ष) बुधवार सुबह चार बजे नींद से उठे तो पत्नी से चाय बनवाकर पी और फिर से सो गए। बच्चों ने सुबह आठ बजे तक नहीं उठने पर उन्हें जगाने का प्रयास किया तो उनकी सांसें थम चुकी थीं। परिजन सीधे उन्हें जेवर के कैलाश अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां सुबह 9 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
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गजेंद्र पहलवान भाजपा और संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता रहने के साथ ही भाजपा के मंडल अध्यक्ष भी रह चुके थे। पति की मौत की सूचना मिलते ही गजेंद्र सिंह की पत्नी चन्द्रवती 65 वर्ष ने अपनी सांसे रूकने जैसा महसूस करने की बात परिजनों को बताई। परिजन उन्हें भी जेवर के निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने देखकर स्थिति सामान्य बताई, लेकिन सुबह 10 बजे अस्पताल में चन्द्रवती ने दुनिया को अलविदा कह दिया।
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पति की मौत का सदमा बर्दाशत नहीं कर सकी चन्द्रवती
सनातन धर्म में विवाह के समय सभी दंपती सात फेरे लेते हुए हर कोई सात जन्मों तक साथ जीने-मरने की कसम खाता है। लेकिन बहुत कम ही लोग ही ऐसे होते हैं जो इस तरीके से जीवन जी पाते है। ऐसा ही मामला नीमका गांव में देखने को मिला, जहां गजेंद्र पहलवान की मौत के सदमे को सहन न कर पाने की वजह से उनकी पत्नी चंद्रवती ने पति की मौत के वियोग में एक घंटे बाद प्राण त्याग दिए।


हर खुशी गम के समय साए की तरह साथ रहती थी पत्नी
परिजनों ने बताया कि कुछ समय से गजेंद्र सिंह की तबियत कुछ ठीक नहीं थी, लेकिन उनकी पत्नी जीवन भर साए की तरह हर खुशी और गम में पति के साथ खड़ी रही। गजेंद्र के परिवार में चार बेटी व चार बेटे हैं। तीन बहू और तीन भाई चार पोते और तीन पोतियों सहित 21 लोगो का भरापूरा परिवार छोडकर गए हैं।
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