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Noida News: आईआईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर का राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार के लिए चयन
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-जैविक विज्ञान के क्षेत्र में असाधारण शोध कार्यों के लिए हुआ
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान(आईआईआईटी) दिल्ली के कम्प्यूटेशन बायोलॉजी विभाग के प्रोफेसर देबरका सेनगुप्ता का ‘राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कारः विज्ञान युवा शांतिस्वरूप भटनागर’ के लिए चयन हुआ है। यह पुरस्कार भारत में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में दिया जाने वाला सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान है।
यह सम्मान प्रोफेसर देबरका सेनगुप्ता को उनके असाधारण शोध कार्यों के लिए प्रदान किया गया है, जिनसे ऊतक विषम लैंगिकता के व्यापक विश्लेषण और दुर्लभ कोशिका समूहों की खोज में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। साथ ही सिंगल-सेल ट्रांसक्रिप्टोमिक्स के माध्यम से उनके अनुसंधान ने इस क्षेत्र को नई दिशा प्रदान की है। जीनोमिक्स को कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई) मॉडल्स के साथ एकीकृत कर प्रोफेसर सेनगुप्ता के कार्यों ने कैंसर दवाओं की प्रतिक्रिया का सटीक पूर्वानुमान लगाने और रक्त नमूनों में ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर कोशिकाओं की पहचान संभव बनाई है। उनके इन वैज्ञानिक योगदानों ने जैव-प्रौद्योगिकी आधारित स्टार्टअप्स के विकास को भी प्रेरित किया है। आईआईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर रंजन बोस ने कहा कि यह सम्मान संस्थान में किए गए शोध कार्यों के आधार पर प्राप्त हुआ है। आईआईआईटी दिल्ली के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह उपलब्धि हमारे संस्थान की विश्व-स्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधान में बढ़ती हुई क्षमता और उत्कृष्टता को दर्शाती है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान(आईआईआईटी) दिल्ली के कम्प्यूटेशन बायोलॉजी विभाग के प्रोफेसर देबरका सेनगुप्ता का ‘राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कारः विज्ञान युवा शांतिस्वरूप भटनागर’ के लिए चयन हुआ है। यह पुरस्कार भारत में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में दिया जाने वाला सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान है।
यह सम्मान प्रोफेसर देबरका सेनगुप्ता को उनके असाधारण शोध कार्यों के लिए प्रदान किया गया है, जिनसे ऊतक विषम लैंगिकता के व्यापक विश्लेषण और दुर्लभ कोशिका समूहों की खोज में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। साथ ही सिंगल-सेल ट्रांसक्रिप्टोमिक्स के माध्यम से उनके अनुसंधान ने इस क्षेत्र को नई दिशा प्रदान की है। जीनोमिक्स को कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई) मॉडल्स के साथ एकीकृत कर प्रोफेसर सेनगुप्ता के कार्यों ने कैंसर दवाओं की प्रतिक्रिया का सटीक पूर्वानुमान लगाने और रक्त नमूनों में ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर कोशिकाओं की पहचान संभव बनाई है। उनके इन वैज्ञानिक योगदानों ने जैव-प्रौद्योगिकी आधारित स्टार्टअप्स के विकास को भी प्रेरित किया है। आईआईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर रंजन बोस ने कहा कि यह सम्मान संस्थान में किए गए शोध कार्यों के आधार पर प्राप्त हुआ है। आईआईआईटी दिल्ली के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह उपलब्धि हमारे संस्थान की विश्व-स्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधान में बढ़ती हुई क्षमता और उत्कृष्टता को दर्शाती है।
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