{"_id":"64442017e0b032f6ea05e086","slug":"if-there-is-24-hours-electricity-then-there-is-no-need-of-advertisers-grnoida-news-c-1-noi1096-456323-2023-04-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Noida News: 24 घंटे बिजली मिले तो जनरेटर चलाने की जरूरत नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Noida News: 24 घंटे बिजली मिले तो जनरेटर चलाने की जरूरत नहीं
विज्ञापन
24 घंटे बिजली मिले तो जनरेटर चलाने की जरूरत नहीं
उद्यमी-व्यापारी संगठनों का कहना-रोजाना पांच से छह घंटे कटौती का विकल्प सिर्फ जनरेटर सेट ही
15 मई से दोहरे ईंधन से चलने वाले जनरेटर ही इस्तेमाल किए जा सकेंगे, तैयारी आधी-अधूरी
- उद्यमी-व्यापारियों के अलावा बहुमंजिला इमारतों में रहने वालों की बढ़ी बेचैनी
- 40 हजार से अधिक डीजी सेट उद्योग-व्यापारिक प्रतिष्ठानों में चल रहे
- 1250 औद्योगिक इकाइयों में ही पीएनजी का प्रयोग
- 10 ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी में ही लगे गैस जनरेटर
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। दिल्ली-एनसीआर की जहरीली हवा को सुधारने के लिए एक बार फिर सख्ती के आसार दिख रहे हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के आदेश पर 15 मई से केवल दोहरे ईंधन (70 फीसदी पीएनजी और 30 फीसदी डीजल) से चलने वाले जनरेटर इस्तेमाल किए जा सकेंगे। इसको लेकर नोएडा-ग्रेनो के उद्यमी और व्यापारी ही नहीं बल्कि बहुमंजिला इमारतों में रहने वाली बड़ी आबादी की बेचैनी भी बढ़ गई है। चिंता इस बात को लेकर भी है कि जिस शहर में 24 घंटे बिजली आपूर्ति का सपना दूर की कौड़ी है, वहां इतने कम समय में जनरेटरों को पीएनजी में तब्दील करना कैसे संभव हो पाएगा। उद्यमी-व्यापारी संगठनों ने 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति की मांग उठानी शुरू कर दी है, ताकि जनरेटर चलाने की जरूरत ही न पड़े।
जिले में उद्योगों की संख्या 20 से 25 हजार के बीच है, लेकिन महज 1250 इकाइयों में ही पीएनजी का उपयोग शुरू हो पाया है। अगर बात बहुमंजिला ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी की बात करें तो अब तक केवल 10 ने ही पीएनजी का विकल्प अपनाया है। औद्योगिक इकाइयों के सामने रोजाना पांच से छह घंटे कटौती का विकल्प सिर्फ जनरेटर सेट ही हैं। नोएडा-ग्रेनो की औद्योगिक इकाइयों के अलावा व्यापारिक प्रतिष्ठानों में 40 से 50 हजार जनरेटर सेट लगे होने का अनुमान है। छोटी औद्योगिक इकाइयों में कम से कम 17 केवीए क्षमता तो बड़ी इकाइयों में 4000 केवीए क्षमता तक के एक या इससे अधिक जनरेटर सेट चल रहे हैं।
-- -
सोसाइटियों में बिजली गई तो होगी दिक्कत
नोएडा-ग्रेनो की बहुमंजिला सोसाइटियों में अगर बिजली जाती है तो लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। बिल्डर और अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (एओए) इस बार भी छूट मिलने का इंतजार कर रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों का कहना है कि 15 मई के बाद कोई रियायत नहीं दी जाएगी। जनरेटर सील किए जाएंगे और जुर्माना लगाया जाएगा।
विज्ञापन
-- -
फीकी पड़ेगी बाजारों की चमक
बिजली कटौती के झटकों से बाजारों की चमक फीकी पड़ सकती है। अट्टा, सेक्टर-18 जैसे शहर के बड़े बाजार में हर दुकान-शोरूम में जनरेटर का इस्तेमाल हो रहा है। कहीं साइलेंट जनरेटर चल रहे हैं तो कहीं नियमों को ताक पर रख पुराने जनरेटरों का शोर सुनाई दे रहा है। 90 फीसदी व्यापारियों ने दोहरे ईंधन वाले जनरेटर की व्यवस्था नहीं की है।
--
हमने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर नोएडा-ग्रेनो में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति की मांग उठाई है। नो पावर कट जोन होने के बावजूद नोएडा के उद्योग अघोषित कटौती से जूझ रहे हैं। औद्योगिक इकाइयों के सामने रोजाना पांच से छह घंटे कटौती का विकल्प सिर्फ जनरेटर सेट ही हैं। ऐसे में फैसला लागू होने पर 20 हजार से ज्यादा उद्योग प्रभावित होना तय है। - सुरेंद्र सिंह नाहटा, जिलाध्यक्ष, एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन
-- -
डीजल जनरेटर पर पाबंदी से प्रदूषण का स्तर कम होगा, लेकिन उद्योगों की परेशानी बढ़ेगी। गैस जनरेटर की बाजार में अभी उपलब्धता कम है। पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन के बाद तीन से चार महीने आपूर्ति सुचारू होने में लगते हैं। डीजी सेट के अलावा उद्यमियों के पास कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। - राजीव बंसल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
-- -
उद्योगों को लगातार 24 घंटे बिजली मिले तो जनरेटर चलाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। नोएडा को सही मायने में नो पावर कट जोन बनाने के बाद ही कठोर फैसले लिए जाने चाहिए। - हरीश जोनेजा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, एनईए
विज्ञापन
उद्यमी-व्यापारी संगठनों का कहना-रोजाना पांच से छह घंटे कटौती का विकल्प सिर्फ जनरेटर सेट ही
15 मई से दोहरे ईंधन से चलने वाले जनरेटर ही इस्तेमाल किए जा सकेंगे, तैयारी आधी-अधूरी
- उद्यमी-व्यापारियों के अलावा बहुमंजिला इमारतों में रहने वालों की बढ़ी बेचैनी
- 40 हजार से अधिक डीजी सेट उद्योग-व्यापारिक प्रतिष्ठानों में चल रहे
- 1250 औद्योगिक इकाइयों में ही पीएनजी का प्रयोग
- 10 ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी में ही लगे गैस जनरेटर
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। दिल्ली-एनसीआर की जहरीली हवा को सुधारने के लिए एक बार फिर सख्ती के आसार दिख रहे हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के आदेश पर 15 मई से केवल दोहरे ईंधन (70 फीसदी पीएनजी और 30 फीसदी डीजल) से चलने वाले जनरेटर इस्तेमाल किए जा सकेंगे। इसको लेकर नोएडा-ग्रेनो के उद्यमी और व्यापारी ही नहीं बल्कि बहुमंजिला इमारतों में रहने वाली बड़ी आबादी की बेचैनी भी बढ़ गई है। चिंता इस बात को लेकर भी है कि जिस शहर में 24 घंटे बिजली आपूर्ति का सपना दूर की कौड़ी है, वहां इतने कम समय में जनरेटरों को पीएनजी में तब्दील करना कैसे संभव हो पाएगा। उद्यमी-व्यापारी संगठनों ने 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति की मांग उठानी शुरू कर दी है, ताकि जनरेटर चलाने की जरूरत ही न पड़े।
जिले में उद्योगों की संख्या 20 से 25 हजार के बीच है, लेकिन महज 1250 इकाइयों में ही पीएनजी का उपयोग शुरू हो पाया है। अगर बात बहुमंजिला ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी की बात करें तो अब तक केवल 10 ने ही पीएनजी का विकल्प अपनाया है। औद्योगिक इकाइयों के सामने रोजाना पांच से छह घंटे कटौती का विकल्प सिर्फ जनरेटर सेट ही हैं। नोएडा-ग्रेनो की औद्योगिक इकाइयों के अलावा व्यापारिक प्रतिष्ठानों में 40 से 50 हजार जनरेटर सेट लगे होने का अनुमान है। छोटी औद्योगिक इकाइयों में कम से कम 17 केवीए क्षमता तो बड़ी इकाइयों में 4000 केवीए क्षमता तक के एक या इससे अधिक जनरेटर सेट चल रहे हैं।
विज्ञापन
सोसाइटियों में बिजली गई तो होगी दिक्कत
नोएडा-ग्रेनो की बहुमंजिला सोसाइटियों में अगर बिजली जाती है तो लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। बिल्डर और अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (एओए) इस बार भी छूट मिलने का इंतजार कर रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों का कहना है कि 15 मई के बाद कोई रियायत नहीं दी जाएगी। जनरेटर सील किए जाएंगे और जुर्माना लगाया जाएगा।
विज्ञापन
फीकी पड़ेगी बाजारों की चमक
बिजली कटौती के झटकों से बाजारों की चमक फीकी पड़ सकती है। अट्टा, सेक्टर-18 जैसे शहर के बड़े बाजार में हर दुकान-शोरूम में जनरेटर का इस्तेमाल हो रहा है। कहीं साइलेंट जनरेटर चल रहे हैं तो कहीं नियमों को ताक पर रख पुराने जनरेटरों का शोर सुनाई दे रहा है। 90 फीसदी व्यापारियों ने दोहरे ईंधन वाले जनरेटर की व्यवस्था नहीं की है।
हमने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर नोएडा-ग्रेनो में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति की मांग उठाई है। नो पावर कट जोन होने के बावजूद नोएडा के उद्योग अघोषित कटौती से जूझ रहे हैं। औद्योगिक इकाइयों के सामने रोजाना पांच से छह घंटे कटौती का विकल्प सिर्फ जनरेटर सेट ही हैं। ऐसे में फैसला लागू होने पर 20 हजार से ज्यादा उद्योग प्रभावित होना तय है। - सुरेंद्र सिंह नाहटा, जिलाध्यक्ष, एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन
डीजल जनरेटर पर पाबंदी से प्रदूषण का स्तर कम होगा, लेकिन उद्योगों की परेशानी बढ़ेगी। गैस जनरेटर की बाजार में अभी उपलब्धता कम है। पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन के बाद तीन से चार महीने आपूर्ति सुचारू होने में लगते हैं। डीजी सेट के अलावा उद्यमियों के पास कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। - राजीव बंसल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
उद्योगों को लगातार 24 घंटे बिजली मिले तो जनरेटर चलाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। नोएडा को सही मायने में नो पावर कट जोन बनाने के बाद ही कठोर फैसले लिए जाने चाहिए। - हरीश जोनेजा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, एनईए