फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   I wish I had a mother too...

Noida News: काश मेरे पास भी मां होती...

Sat, 10 May 2025 05:45 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 10 May 2025 05:45 PM IST
विज्ञापन
I wish I had a mother too...
फोटो है
विज्ञापन

- बचपन से मां के बिना रहे बच्चों से बातचीत, बोले, हर दिन मां की यादों में बीतता है..


हर्ष मिश्रा

नोएडा। मां के बिना जिंदगी की कल्पना करना ही आपको मरने जैसा अहसास दिला देता है। यह वही शक्ति है जो हमें ताकत देती है नए मुकाम तक पहुंचने और हमेशा आगे बढ़ने की। लेकिन उनका क्या जिनके ऊपर मां का साया नहीं है। उन्हें हमेशा उनका प्यार पाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। हर दिन मेहनत की एक नई कहानी लिखनी पड़ी। किसी ने सच ही कहा है कि ऐसे बच्चे भावनात्मक रूप से भले ही थोड़े कमजोर हों, लेकिन उनका जिगर वाकई मजबूत होता है। साथ ही उनके हौंसले बुलंद होते हैं। अमर उजाला ने मदर्स डे पर ऐसे ही कुछ बच्चों से बात की है, जो अपनी मां के बिना अपना जीवन बिता रहे हैं। .... पेश है एक रिपोर्ट

------

हर रोज मां के लिए तरसता है निखिल

मां के निधन के बाद निखिल की जिंदगी आसान नहीं रही। महज 10 वर्ष के निखिल की हर रोज अपनी मां की याद में आंखें नम हो जाती है। वह अपनी बड़ी बहनों से भी पूछता है कि मां कब आएंगी। जब निखिल जन्मा था तब उसकी मां ने एक सपना देखा था कि उनका बेचा एक दिन बड़ा होकर आर्मी में बड़ा ऑफिसर बनेगा। उसका बहनों ने मां का सपना पूरा करने के लिए उसे पढ़ाया। हर दिन निखिल सपना देखता है कि वह जिस दिन वर्दी में भारत मां तो सलाम करेगा उस दिन उसकी मां उसे कहीं से देख रही होगी।
विज्ञापन


------


शिक्षिका बनना चाहती हैं राजेश्वरी
कक्षा 11वीं में पढ़ने वाली राजेश्वरी इन दिनों जी जान लगाकर मेहनत कर रही हैं। केवल अपनी मां का सपना साकार करने के लिए। मां के साथ तो वह ज्यादा समय व्यतीत नहीं कर सकी लेकिन मां के सपने के लिए जीना उनसे शुरू कर दिया है। मां चाहती थी कि वह शिक्षिका बने और बच्चों के भविष्य को सवारें उसने इस दिशा में कदम रख दिया है। लेकिन कभी -कभी मां की याद उसे वापस पीछे खींचकर ले आती है जिसकी वजह से उसे आगे बढ़ने में और मेहनत करनी पड़ती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

-----

मां-पिता का नहीं रहा साया

मां-पिता का साया बचपन में नहीं रहा। महज 13 वर्ष की उम्र में आयूष अपने चाचा-चाची के साथ रहता है। पढ़ाई के साथ-साथ उसने अभी से आर्मी में भर्ती होने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। माता चाहती थी कि बेटा आर्मी में जाए और देश की रक्षा करे। वह इसके लिए अभी से मेहनत में जुटा हुआ है। इसके अलावा माता की याद आने पर वह अपने आप को यह कहकर प्रोत्साहित कर लेते हैं कि मेरी मेहनत देखकर मेरी मां जरूर खुश होंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed