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30 हजार नहीं मिलने पर भर्ती करने से किया मना, अस्पताल के बाहर तड़पती रही गर्भवती
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30 हजार नहीं मिलने पर भर्ती करने से किया मना, अस्पताल के बाहर तड़पती रही गर्भवती
ग्रेटर नोएडा। कोरोना के दौरान सामान्य मरीजों को भी उपचार के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। सोमवार को डिलीवरी कराने के लिए एक गर्भवती को कई अस्पतालों के चक्कर काटने पड़े। इस दौरान वह अस्पतालों के बाहर वैन में पीड़ा झेलती रही। उसके पति का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने उससे 30 हजार रुपये की मांग की। रुपये नहीं देने पर भर्ती नहीं किया। वहीं, जिम्स ने कोविड अस्पताल होने के कारण उसे लौटा दिया। वहीं, कुछ समाजसेवियों की मदद से उसका कृष्णा अस्पताल में उपचार शुरू हो सका।
मूलरूप से बुलंदशहर के अनूपशहर निवासी यूसुफ पत्नी नसरीन और एक बच्ची के साथ तुगलपुर में रहते हैं। उसकी गर्भवती पत्नी का उपचार एक अस्पताल में चल रहा है। सोमवार सुबह करीब 10 बजे पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर वह 108 एंबुलेंस के जरिए जिम्स पहुंचा। उसका आरोप है कि काफी देर बाद कोविड अस्प्ताल होने की जानकारी देकर डॉक्टरों ने उसे भर्ती करने से इनकार कर दिया। यहां से यूसुफ पत्नी को लेकर दूसरे अस्पताल पहुंचा। अस्पताल प्रबंधन ने उससे 23 हजार रुपये ऑपरेशन और 8 हजार रुपये कोरोना किट की जांच के लिए जमा करने को कहा। उसने तुरंत इतने रुपये जमा करने में असमर्थता व्यक्त की तो अस्पताल प्रबंधन ने भर्ती करने से मना कर दिया। उसका आरोप है कि इस दौरान काफी देर तक अस्पताल के बाहर पत्नी प्रसव पीड़ा झेलती रही, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने उसकी एक नहीं सुनी। इस दौरान एक पुलिस कर्मी ने मदद करते हुए एंबुलेंस बुलवाई और दोबारा उसे जिम्स ले गई। यहां से कुछ समाजसेवियों ने कृष्णा अस्पताल में बात कर उसे भर्ती कराया है। वहीं, अस्पताल प्रबंधन ने भी खर्च कम लेने और समाजसेवियों ने खर्च वहन करने का आश्वासन दिया है।
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ग्रेटर नोएडा। कोरोना के दौरान सामान्य मरीजों को भी उपचार के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। सोमवार को डिलीवरी कराने के लिए एक गर्भवती को कई अस्पतालों के चक्कर काटने पड़े। इस दौरान वह अस्पतालों के बाहर वैन में पीड़ा झेलती रही। उसके पति का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने उससे 30 हजार रुपये की मांग की। रुपये नहीं देने पर भर्ती नहीं किया। वहीं, जिम्स ने कोविड अस्पताल होने के कारण उसे लौटा दिया। वहीं, कुछ समाजसेवियों की मदद से उसका कृष्णा अस्पताल में उपचार शुरू हो सका।
मूलरूप से बुलंदशहर के अनूपशहर निवासी यूसुफ पत्नी नसरीन और एक बच्ची के साथ तुगलपुर में रहते हैं। उसकी गर्भवती पत्नी का उपचार एक अस्पताल में चल रहा है। सोमवार सुबह करीब 10 बजे पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर वह 108 एंबुलेंस के जरिए जिम्स पहुंचा। उसका आरोप है कि काफी देर बाद कोविड अस्प्ताल होने की जानकारी देकर डॉक्टरों ने उसे भर्ती करने से इनकार कर दिया। यहां से यूसुफ पत्नी को लेकर दूसरे अस्पताल पहुंचा। अस्पताल प्रबंधन ने उससे 23 हजार रुपये ऑपरेशन और 8 हजार रुपये कोरोना किट की जांच के लिए जमा करने को कहा। उसने तुरंत इतने रुपये जमा करने में असमर्थता व्यक्त की तो अस्पताल प्रबंधन ने भर्ती करने से मना कर दिया। उसका आरोप है कि इस दौरान काफी देर तक अस्पताल के बाहर पत्नी प्रसव पीड़ा झेलती रही, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने उसकी एक नहीं सुनी। इस दौरान एक पुलिस कर्मी ने मदद करते हुए एंबुलेंस बुलवाई और दोबारा उसे जिम्स ले गई। यहां से कुछ समाजसेवियों ने कृष्णा अस्पताल में बात कर उसे भर्ती कराया है। वहीं, अस्पताल प्रबंधन ने भी खर्च कम लेने और समाजसेवियों ने खर्च वहन करने का आश्वासन दिया है।
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