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अस्पताल ने एनबीएएच मान्यता होने का दावा कर मरीजों को गुमराह किया : अदालत

Tue, 14 Apr 2026 04:39 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 14 Apr 2026 04:39 PM IST
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Hospital misled patients by claiming NBAH accreditation: Court
नोएडा के सेक्टर-46 स्थित विनोद आई सेंटर का मामला, अस्पताल पर 14 दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज करने के आदेश
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अदालत से


माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सेक्टर-46 स्थित विनोद आई सेंटर में ‘एनएबीएच’ (नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स) का फर्जी दावा कर मरीजों को गुमराह करने के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गौतमबुद्ध नगर की अदालत ने मामले में संज्ञेय अपराध मानते हुए थाना सेक्टर-39 पुलिस को 14 दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
शिकायतकर्ता पियूष दत्त कौशिक ने डॉक्टर श्वेता गोयल पर गंभीर आरोप लगाए थे। अदालत में दायर प्रार्थना पत्र के अनुसार नौ मार्च 2024 को आंखों के इलाज के लिए विनोद आई सेंटर गए थे। आरोप है कि अस्पताल के बाहर और विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर लगे बड़े-बड़े विज्ञापन बोर्ड में ‘एनएबीच’ का लोगो और मान्यता दर्शायी गई थी। इससे प्रभावित होकर उन्होंने इलाज कराया था। बाद में जांच में पता चला कि उक्त अस्पताल को ‘एनएबीएच’ की कोई मान्यता प्राप्त नहीं है।
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क्वॉलिटी काउंसिल ऑफ इंडिया ने जवाब में कहा- अस्पताल एनएबीएच से मान्यता प्राप्त नहीं
शिकायतकर्ता ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत क्वॉलिटी काउंसिल ऑफ इंडिया से जानकारी मांगी जिसमें 16 जनवरी 2025 के जवाब में साफ हुआ कि सेक्टर-46 स्थित विनोद आई सेंटर ‘एनएबीएच’ से मान्यता प्राप्त नहीं है। इतना ही नहीं ‘एनएबीएच’ की ओर से 10 फरवरी 2025 को जारी एक पब्लिक नोटिस में भी डॉक्टर श्वेता गोयल के अस्पताल द्वारा ‘एनएबीएच’ का फर्जी इस्तेमाल करने और जनता को गुमराह करने की बात कही गई। नोटिस में बताया गया कि अस्पताल की ओर से वेबसाइट, विज्ञापन, होर्डिंग, मरीजों की फाइलों और अन्य माध्यमों में गलत तरीके से अस्पताल के एनएबीएच मान्यता प्राप्त होने का दावा किया जा रहा है। अदालत में पेश साक्ष्यों में कई जीपीएस-आधारित रंगीन फोटो, विज्ञापन बोर्डों की तस्वीरें, मरीज की फाइल, प्रिस्क्रिप्शन और रेफरल लेटर शामिल हैं, जिनमें एनएबीएच का लोगो प्रदर्शित किया गया है। इसके अलावा मेडिकल एस्टेब्लिशमेंट सर्टिफिकेट (2021 से 2024 तक) भी पेश किए गए, जिनमें अस्पताल का मालिक डॉक्टर श्वेता गोयल को बताया गया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रस्तुत दस्तावेज यह दर्शाते हैं कि आरोपी द्वारा ‘एनएबीएच’ का फर्जी इस्तेमाल किया गया, जो दंडनीय अपराध है। गौरतलब है कि शिकायतकर्ता ने इससे पहले 16 मई 2025 को नोएडा पुलिस आयुक्त को ईमेल के जरिए शिकायत भेजी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
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