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रिटायर कर्मियों से पैसा लेकर भी कैशलेस उपचार न दिलाने पर एमसीडी को फटकार
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नई दिल्ली। अपने रिटायर कर्मचारियों से राशि लेने के बाद भी कैशलेस उपचार की सुविधा न दिलाने पर हाईकोर्ट ने एमसीडी को कड़ी फटकार लगाई है। एमसीडी ने किसी अस्पताल के साथ करार न होने पर पेंशनधारियों से इसके लिए अंशदान लिया। हाईकोर्ट ने कहा ये धोखाधड़ी तथा विश्वासघात है। हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए सुनवाई 22 जनवरी को तय की है।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल तथा न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने पूर्व कर्मचारियों को एमसीडी द्वारा समय पर पेंशन न दिए जाने पर भी नाराजगी जाहिर की। खंडपीठ ने एमसीडी से पूछा कि अंशदान लेने के बाद आप कैसे कह सकते हैं कि ये सुविधा उपलब्ध नहीं है। आप पेंशन देना कैसे रोक सकते हैं। हम आपके अधिकारियों का वेतन रोकेंगे।
खंडपीठ ने आगे कहा कि किसी अस्पताल के साथ करार न होने के बाद भी अगर आप कैशलेस उपचार के लिए अंशदान ले रहे हैं तो यह विश्वासघात है। बिना करार के आप अंशदान कैसे ले सकते हैं। दिसंबर 2020 से आप 78 हजार रुपये अंशदान के रूप में ले रहे हैं जबकि किसी अस्पताल से करार नहीं है। यह धोखाधड़ी है। पेंशनधारियों को बिलों की राशि वापस लेने में भारी कठिनाई होती है, इसलिए उनके लिए कैशलेस उपचार की व्यवस्था होनी चाहिए थी।
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खंडपीठ ने इस मामले में दायर अखिल दिल्ली प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से दायर जनहित याचिका पर तीनों नगर निगमों को नोटिस जारी जवाब मांगा है। याचिका में अंशदान लेकर भी पेंशनधारियों तथा मौजूदा कर्मचारियों को मुफ्त उपचार न दिलाने का आरोप लगाया गया है। कोर्ट ने ये भी पूछा कि निगम ने 2020 में पेंशनधारियों के कब तक के उपचार के बिल पास किए हैं। याचिका पर सुनवाई के दौरान दक्षिण दिल्ली नगर निगम ने अपने रिटायर कर्मचारियों को निशुल्क उपचार दिलाने की बात कही।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल तथा न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने पूर्व कर्मचारियों को एमसीडी द्वारा समय पर पेंशन न दिए जाने पर भी नाराजगी जाहिर की। खंडपीठ ने एमसीडी से पूछा कि अंशदान लेने के बाद आप कैसे कह सकते हैं कि ये सुविधा उपलब्ध नहीं है। आप पेंशन देना कैसे रोक सकते हैं। हम आपके अधिकारियों का वेतन रोकेंगे।
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खंडपीठ ने आगे कहा कि किसी अस्पताल के साथ करार न होने के बाद भी अगर आप कैशलेस उपचार के लिए अंशदान ले रहे हैं तो यह विश्वासघात है। बिना करार के आप अंशदान कैसे ले सकते हैं। दिसंबर 2020 से आप 78 हजार रुपये अंशदान के रूप में ले रहे हैं जबकि किसी अस्पताल से करार नहीं है। यह धोखाधड़ी है। पेंशनधारियों को बिलों की राशि वापस लेने में भारी कठिनाई होती है, इसलिए उनके लिए कैशलेस उपचार की व्यवस्था होनी चाहिए थी।
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खंडपीठ ने इस मामले में दायर अखिल दिल्ली प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से दायर जनहित याचिका पर तीनों नगर निगमों को नोटिस जारी जवाब मांगा है। याचिका में अंशदान लेकर भी पेंशनधारियों तथा मौजूदा कर्मचारियों को मुफ्त उपचार न दिलाने का आरोप लगाया गया है। कोर्ट ने ये भी पूछा कि निगम ने 2020 में पेंशनधारियों के कब तक के उपचार के बिल पास किए हैं। याचिका पर सुनवाई के दौरान दक्षिण दिल्ली नगर निगम ने अपने रिटायर कर्मचारियों को निशुल्क उपचार दिलाने की बात कही।