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प्रादेशिक सेना में चयन के लिए आठ महिलाओं की याचिका पर केंद्र को नोटिस
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने प्रादेशिक सेना में चयन के लिए आठ महिलाओं की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इन महिलाओं का कहना है कि इन्होंने प्रादेशिक सेना के लिए आवेदन किया था। वर्ष 2019 में प्रादेशिक सेना में महिलाओं का चयन आरंभ करने के बावजूद अभी तक परिणाम घोषित नहीं किए हैं जबकि अन्य उम्मीदवारों का चयन कर लिया गया है।
न्यायमूर्ति मनमोहन एवं न्यायमूर्ति नवीन चावला की खंडपीठ ने केंद्र, थल सेना प्रमुख, एडिशनल डायरेक्टर ऑफ रिक्रूटिंग और प्रादेशिक सेना को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर तय की है।
पेश याचिका प्राधिकारियों के उस अनुचित, मनमाने और अतार्किक कृत्य के खिलाफ दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि प्रीलिमनरी बोर्ड फॉर टेरिटोरियल आर्मी कमीशन -2019 के परिणामों को घोषित किए बिना उम्मीदवारों को प्रादेशिक सेना अधिकारी (गैर विभागीय) कमीशन प्रदान किया गया है।
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याचिकाकर्ता महिलाओं की ओर से कहा गया है कि प्राधिकारियों ने अवैध तरीके से काम करते हुए बिना सोचे समझे और औपचारिक रूप से परिणाम घोषित किए बगैर और उन्हें लिखित रूप से सूचित किए बिना अन्य उम्मीदवारों को ज्वाइनिंग के निर्देश जारी कर दिए।
अधिवक्ता कार्तिक यादव के जरिये पेश याचिका दायर कर कहा गया है कि प्राधिकारियों ने याचिकाकर्ताओं को कोई जानकारी दिए बिना जवाब दिया। इसमें उन्होंने बताया कि प्रादेशिक सेना में महिला उम्मीदवारों के लिए सीमित पद थे और उनकी उपलब्धता के आधार पर मेरिट तैयार की गई थी। इस जवाब से और अधिक भ्रम एवं चिंता पैदा हो रही है। याचिका में कहा गया है कि इससे पहले तक सभी स्वस्थ उम्मीदवारों को सेवा ज्वाइन करने के लिए बुलाया जाता था। - एजेंसी
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न्यायमूर्ति मनमोहन एवं न्यायमूर्ति नवीन चावला की खंडपीठ ने केंद्र, थल सेना प्रमुख, एडिशनल डायरेक्टर ऑफ रिक्रूटिंग और प्रादेशिक सेना को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर तय की है।
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पेश याचिका प्राधिकारियों के उस अनुचित, मनमाने और अतार्किक कृत्य के खिलाफ दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि प्रीलिमनरी बोर्ड फॉर टेरिटोरियल आर्मी कमीशन -2019 के परिणामों को घोषित किए बिना उम्मीदवारों को प्रादेशिक सेना अधिकारी (गैर विभागीय) कमीशन प्रदान किया गया है।
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याचिकाकर्ता महिलाओं की ओर से कहा गया है कि प्राधिकारियों ने अवैध तरीके से काम करते हुए बिना सोचे समझे और औपचारिक रूप से परिणाम घोषित किए बगैर और उन्हें लिखित रूप से सूचित किए बिना अन्य उम्मीदवारों को ज्वाइनिंग के निर्देश जारी कर दिए।
अधिवक्ता कार्तिक यादव के जरिये पेश याचिका दायर कर कहा गया है कि प्राधिकारियों ने याचिकाकर्ताओं को कोई जानकारी दिए बिना जवाब दिया। इसमें उन्होंने बताया कि प्रादेशिक सेना में महिला उम्मीदवारों के लिए सीमित पद थे और उनकी उपलब्धता के आधार पर मेरिट तैयार की गई थी। इस जवाब से और अधिक भ्रम एवं चिंता पैदा हो रही है। याचिका में कहा गया है कि इससे पहले तक सभी स्वस्थ उम्मीदवारों को सेवा ज्वाइन करने के लिए बुलाया जाता था। - एजेंसी