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Noida News: हेपेटाइटिस बी और सी कर रहे लिवर फेल, जिम्स में जागरूकता अभियान शुरू
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- जिम्स में इलाज कराने पहुंचे 18 हजार से अधिक लोगों को हेपेटाइटिस सी और लगभग 19 हजार को हेपेटाइटिस बी
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में रविवार को विश्व लिवर दिवस के अवसर पर लिवर (यकृत) स्वास्थ्य को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया। संस्थान ने लिवर रोगों की रोकथाम, समय पर पहचान और प्रभावी उपचार के महत्व को रेखांकित करते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की।
जिम्स के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रो. डॉ. सतीश कुमार और माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रो.डॉ. वरुण गोयल ने बताया कि तेजी से बदलती जीवनशैली और लापरवाही के कारण हेपेटाइटिस बी व सी एक गंभीर स्वास्थ्य खतरे के रूप में उभर रहा है। समय पर पहचान और इलाज न मिलने से बड़ी संख्या में मरीजों का लिवर फेल हो रहे है, जबकि कुछ मामलों में यह बीमारी लिवर कैंसर तक पहुंच रही है। उनका कहना है कि अगर किसी व्यक्ति की आंखों और त्वचा में पीलेपन, लगातार वजन कम होना, कमजोरी महसूस होना और भूख में कमी जैसे लक्षण दिखें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये संकेत हेपेटाइटिस के हो सकते हैं, जो धीरे-धीरे लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचाते है।
उन्होंने बताया कि अस्पताल में हर महीने 20 से 25 नए मरीज इलाज के लिए आ रहे है। जबकि वर्ष 2025 में 18 हजार से अधिक लोगों की हेपेटाइटिस सी और लगभग 19 हजार से अधिक की हेपेटाइटिस बी की जांच की गई। इनमें 500 से अधिक एचसीवी और 400 से अधिक एचबीएसएजी पॉजिटिव मामले पाए गए। विशेषज्ञों के अनुसार, हेपेटाइटिस सी की पॉजिटिविटी दर 2.3 प्रतिशत और हेपेटाइटिस बी की करीब 1.5 प्रतिशत रही। वहीं, अस्पताल में शराब से संबंधित लिवर रोगों के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
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एनवीएचवीसीपी केंद्र में मिल रहा इलाज :
डॉ. सतीश कुमार ने बताया कि जिम्स में राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (एनवीएचवीसीपी) के तहत एक समर्पित केंद्र संचालित किया जा रहा है। यहां पर मरीजों की जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध है। यहां हेपेटाइटिस बी और सी से संक्रमित मरीजों को उत्तर प्रदेश सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत निःशुल्क उपचार प्रदान किया जा रहा है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में रविवार को विश्व लिवर दिवस के अवसर पर लिवर (यकृत) स्वास्थ्य को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया। संस्थान ने लिवर रोगों की रोकथाम, समय पर पहचान और प्रभावी उपचार के महत्व को रेखांकित करते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की।
जिम्स के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रो. डॉ. सतीश कुमार और माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रो.डॉ. वरुण गोयल ने बताया कि तेजी से बदलती जीवनशैली और लापरवाही के कारण हेपेटाइटिस बी व सी एक गंभीर स्वास्थ्य खतरे के रूप में उभर रहा है। समय पर पहचान और इलाज न मिलने से बड़ी संख्या में मरीजों का लिवर फेल हो रहे है, जबकि कुछ मामलों में यह बीमारी लिवर कैंसर तक पहुंच रही है। उनका कहना है कि अगर किसी व्यक्ति की आंखों और त्वचा में पीलेपन, लगातार वजन कम होना, कमजोरी महसूस होना और भूख में कमी जैसे लक्षण दिखें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये संकेत हेपेटाइटिस के हो सकते हैं, जो धीरे-धीरे लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचाते है।
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उन्होंने बताया कि अस्पताल में हर महीने 20 से 25 नए मरीज इलाज के लिए आ रहे है। जबकि वर्ष 2025 में 18 हजार से अधिक लोगों की हेपेटाइटिस सी और लगभग 19 हजार से अधिक की हेपेटाइटिस बी की जांच की गई। इनमें 500 से अधिक एचसीवी और 400 से अधिक एचबीएसएजी पॉजिटिव मामले पाए गए। विशेषज्ञों के अनुसार, हेपेटाइटिस सी की पॉजिटिविटी दर 2.3 प्रतिशत और हेपेटाइटिस बी की करीब 1.5 प्रतिशत रही। वहीं, अस्पताल में शराब से संबंधित लिवर रोगों के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
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एनवीएचवीसीपी केंद्र में मिल रहा इलाज :
डॉ. सतीश कुमार ने बताया कि जिम्स में राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (एनवीएचवीसीपी) के तहत एक समर्पित केंद्र संचालित किया जा रहा है। यहां पर मरीजों की जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध है। यहां हेपेटाइटिस बी और सी से संक्रमित मरीजों को उत्तर प्रदेश सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत निःशुल्क उपचार प्रदान किया जा रहा है।