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हारिश पर थी एनसीआर में अंडरवर्ल्ड का नेटवर्क बढ़ाने की जिम्मेदारी
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नोएडा (सुशांत समदर्शी)। अबू सलेम के शागिर्द हारिश खान पर एनसीआर में अंडरवर्ल्ड के नेटवर्क को बढ़ाने की भी जिम्मेदारी थी। हालांकि यहां आने पर वह नोएडा निवासी गजेंद्र सिंह के साथ प्रॉपर्टी के काम में जुट गया था। प्रॉपर्टी विवाद को सुलझाने और खरीद बिक्री करने मेें सुंदर भाटी ने भी उसकी मदद की थी। पुलिस जांच में पता चला है कि गजेंद्र और सुंदर भाटी रिश्तेदार हैं।
एसटीएफ के मुताबिक अबू सलेम गैंग के बदमाश जफर सुपारी के कहने पर ही हारिश ने गजेंद्र के साथ मिलकर नोएडा एनसीआर में प्रॉपर्टी पर कब्जा करने और वसूली शुरू की थी। इसकी देखरेख के लिए जफर ने हारिश को नोएडा भेजा था। दोनों ने सबसे पहले 5 परसेंट प्लॉट पर कब्जा करना शुरू किया था। शुरुआत में गजेंद्र सिंह ने सुंदर भाटी का सहयोग लिया। सुंदर ने भी प्लॉट कब्जा कराने और सुलह में खुलकर मदद की। हालांकि बाद में सुंदर ने अधिक शेयर की मांग की तो गजेंद्र ने उससे पल्ला झाड़ लिया। इसके बाद दोनों ने डी-कंपनी के नाम पर दिल्ली एनसीआर में वसूली का काम शुरू कर दिया गया। एसटीएफ की जांच में पता चला है कि सुंदर भाटी और डी-कंपनी के बीच कोई कनेक्शन नहीं मिला है। गजेंद्र सिंह से रिश्तेदारी के कारण सुंदर ने कुछ मामलों में मदद की थी।
भरत नेपाली का प्राप्त था वरदहस्त
भरत नेपाली छोटा राजन का खास और भरोसेमंद था। बैंकाक के अस्पताल में जब छोटा राजन पर अटैक हुआ था तो भरत ने ही उसे अस्पताल से निकालकर बचाया था। बाद में दोनों के बीच विवाद हो गया। छोटा राजन से अलग होने के बाद भरत नेपाली के गुट में आंबेडकरनगर निवासी सरगना जफर सुपारी आ गया। तभी जफर ने अपने गुर्गे हारिश की मुलाकात भरत नेपाली से कराई थी। बताया जाता है कि इसके बाद भरत नेपाली का वरदहस्त हारिश को प्राप्त हो गया।
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फरीद तनाशा हत्याकांड के बाद एनसीआर की तरफ रुख
छोटा राजन के सहयोगी फरीद तनाशा की मुंबई में वर्ष 2010 में हत्या कर दी गई थी। बताया जाता है कि फरीद, दाउद इब्राहिम के बारे में पता लगाने में भारतीय एजेंसियों की मदद कर रहा था। हत्याकांड को जफर सुपारी व उसके गुर्गों ने अंजाम दिया था। मामले में जफर सुपारी गिरफ्तार हुआ था और अभी नागपुर जेल में इसी मामले में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा है। जफर की गिरफ्तारी के बाद उसके भाई खान मुबारक व अन्य गैंगस्टरों ने एनसीआर का रुख किया था।
मुन्ना बजरंगी से भी थे ताल्लुकात
एसटीएफ की पूछताछ में हारिश ने बताया कि जेल से कोर्ट में पेशी पर जाने के दौरान उसकी मुलाकात मुन्ना बजरंगी से हुई थी। वर्ष 2015-16 से दोनों के बीच ताल्लुकात थे। एसटीएफ यह भी पता लगा रही है कि मुन्ना बजरंगी और कौन कौन बदमाश थे जिनसे डी-कंपनी के गुर्गे मिलते थे।
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एसटीएफ के मुताबिक अबू सलेम गैंग के बदमाश जफर सुपारी के कहने पर ही हारिश ने गजेंद्र के साथ मिलकर नोएडा एनसीआर में प्रॉपर्टी पर कब्जा करने और वसूली शुरू की थी। इसकी देखरेख के लिए जफर ने हारिश को नोएडा भेजा था। दोनों ने सबसे पहले 5 परसेंट प्लॉट पर कब्जा करना शुरू किया था। शुरुआत में गजेंद्र सिंह ने सुंदर भाटी का सहयोग लिया। सुंदर ने भी प्लॉट कब्जा कराने और सुलह में खुलकर मदद की। हालांकि बाद में सुंदर ने अधिक शेयर की मांग की तो गजेंद्र ने उससे पल्ला झाड़ लिया। इसके बाद दोनों ने डी-कंपनी के नाम पर दिल्ली एनसीआर में वसूली का काम शुरू कर दिया गया। एसटीएफ की जांच में पता चला है कि सुंदर भाटी और डी-कंपनी के बीच कोई कनेक्शन नहीं मिला है। गजेंद्र सिंह से रिश्तेदारी के कारण सुंदर ने कुछ मामलों में मदद की थी।
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भरत नेपाली का प्राप्त था वरदहस्त
भरत नेपाली छोटा राजन का खास और भरोसेमंद था। बैंकाक के अस्पताल में जब छोटा राजन पर अटैक हुआ था तो भरत ने ही उसे अस्पताल से निकालकर बचाया था। बाद में दोनों के बीच विवाद हो गया। छोटा राजन से अलग होने के बाद भरत नेपाली के गुट में आंबेडकरनगर निवासी सरगना जफर सुपारी आ गया। तभी जफर ने अपने गुर्गे हारिश की मुलाकात भरत नेपाली से कराई थी। बताया जाता है कि इसके बाद भरत नेपाली का वरदहस्त हारिश को प्राप्त हो गया।
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फरीद तनाशा हत्याकांड के बाद एनसीआर की तरफ रुख
छोटा राजन के सहयोगी फरीद तनाशा की मुंबई में वर्ष 2010 में हत्या कर दी गई थी। बताया जाता है कि फरीद, दाउद इब्राहिम के बारे में पता लगाने में भारतीय एजेंसियों की मदद कर रहा था। हत्याकांड को जफर सुपारी व उसके गुर्गों ने अंजाम दिया था। मामले में जफर सुपारी गिरफ्तार हुआ था और अभी नागपुर जेल में इसी मामले में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा है। जफर की गिरफ्तारी के बाद उसके भाई खान मुबारक व अन्य गैंगस्टरों ने एनसीआर का रुख किया था।
मुन्ना बजरंगी से भी थे ताल्लुकात
एसटीएफ की पूछताछ में हारिश ने बताया कि जेल से कोर्ट में पेशी पर जाने के दौरान उसकी मुलाकात मुन्ना बजरंगी से हुई थी। वर्ष 2015-16 से दोनों के बीच ताल्लुकात थे। एसटीएफ यह भी पता लगा रही है कि मुन्ना बजरंगी और कौन कौन बदमाश थे जिनसे डी-कंपनी के गुर्गे मिलते थे।