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Noida News: गड्ढे में गंदा पानी स्थायी, शिकायतें साफ
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परमजीत लाल मल
राइस फॉरेस्ट फ्लोर के निवासियों ने कई बार की शिकायतें, नहीं हुआ समाधान
नंबर गेम- 200 से अधिक मरीज हैं आसपास की सोसाइटियों में
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की राइस फॉरेस्ट फ्लोर सोसाइटी के निवासियों ने एटीएस गोल चक्कर के समीप निर्माणाधीन परियोजना के कारण वर्षों से खुले पड़े गड्ढों में दूषित पानी जमा होने की शिकायत की है। निवासियों का कहना है कि खुले गड्ढों में भरे दूषित पानी के कारण आसपास की सोसाइटियों में डेंगू-मलेरिया के 200 से अधिक मरीज हैं। उनका आरोप है कि जिम्मेदारों का बताने के बाद भी अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार इस समस्या को लेकर पूर्व में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की हेल्पलाइन पर कई बार शिकायत की जा चुकी है। साथ ही बिल्डर को भी मौखिक रूप से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। निवासियों ने बताया कि सोसाइटी की बाउंड्री से सटे अपेक्स बिल्डर के परिसर में पिछले कई वर्षों से निर्माण कार्य बंद पड़ा है। परिसर में तीन बड़े गड्ढे खुले हुए हैं। बारिश के दौरान इन गड्ढों में गंदा और बदबूदार पानी जमा हो जाता है, जो लंबे समय तक भरा रहता है। पानी में काई जमने के साथ मच्छरों और अन्य कीड़े-मकोड़ों के पनपने की आशंका बनी रहती है। निवासियों ने अधिकारियों से मांग की है कि बिल्डर को निर्देश देकर खुले गड्ढों को तत्काल मिट्टी या मलबे से भरवाया जाए। साथ ही जब तक गड्ढे नहीं भरे जाते, तब तक उनमें एंटी-लार्वा दवा का छिड़काव कराया जाए।
कई वर्षों से बिल्डर परिसर में गड्ढे खुले पड़े हैं। बारिश होते ही इनमें गंदा पानी भर जाता है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। कई बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। - परमजीत लाल मल
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सोसाइटी के आसपास मच्छरों की संख्या काफी बढ़ जाती है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। प्रशासन को तत्काल सफाई और एंटी-लार्वा का छिड़काव कराना चाहिए। -प्रतीक कुमार
गड्ढों में लंबे समय से पानी जमा है, जिससे बदबू भी आती है। खुले गड्ढे हादसे का कारण भी बन सकते हैं। संबंधित विभाग को मौके का निरीक्षण कर स्थायी समाधान करना चाहिए। -संतोष कुमार
बीमारी फैलने का डर बना रहता है। डेंगू और मलेरिया से बचाव के लिए समय रहते कार्रवाई जरूरी है। जब तक गड्ढे नहीं भरे जाते, तब तक नियमित रूप से दवा का छिड़काव होना चाहिए। -सैय्यद शहाबुद्दीन
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नंबर गेम- 200 से अधिक मरीज हैं आसपास की सोसाइटियों में
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की राइस फॉरेस्ट फ्लोर सोसाइटी के निवासियों ने एटीएस गोल चक्कर के समीप निर्माणाधीन परियोजना के कारण वर्षों से खुले पड़े गड्ढों में दूषित पानी जमा होने की शिकायत की है। निवासियों का कहना है कि खुले गड्ढों में भरे दूषित पानी के कारण आसपास की सोसाइटियों में डेंगू-मलेरिया के 200 से अधिक मरीज हैं। उनका आरोप है कि जिम्मेदारों का बताने के बाद भी अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार इस समस्या को लेकर पूर्व में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की हेल्पलाइन पर कई बार शिकायत की जा चुकी है। साथ ही बिल्डर को भी मौखिक रूप से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। निवासियों ने बताया कि सोसाइटी की बाउंड्री से सटे अपेक्स बिल्डर के परिसर में पिछले कई वर्षों से निर्माण कार्य बंद पड़ा है। परिसर में तीन बड़े गड्ढे खुले हुए हैं। बारिश के दौरान इन गड्ढों में गंदा और बदबूदार पानी जमा हो जाता है, जो लंबे समय तक भरा रहता है। पानी में काई जमने के साथ मच्छरों और अन्य कीड़े-मकोड़ों के पनपने की आशंका बनी रहती है। निवासियों ने अधिकारियों से मांग की है कि बिल्डर को निर्देश देकर खुले गड्ढों को तत्काल मिट्टी या मलबे से भरवाया जाए। साथ ही जब तक गड्ढे नहीं भरे जाते, तब तक उनमें एंटी-लार्वा दवा का छिड़काव कराया जाए।
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कई वर्षों से बिल्डर परिसर में गड्ढे खुले पड़े हैं। बारिश होते ही इनमें गंदा पानी भर जाता है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। कई बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। - परमजीत लाल मल
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सोसाइटी के आसपास मच्छरों की संख्या काफी बढ़ जाती है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। प्रशासन को तत्काल सफाई और एंटी-लार्वा का छिड़काव कराना चाहिए। -प्रतीक कुमार
गड्ढों में लंबे समय से पानी जमा है, जिससे बदबू भी आती है। खुले गड्ढे हादसे का कारण भी बन सकते हैं। संबंधित विभाग को मौके का निरीक्षण कर स्थायी समाधान करना चाहिए। -संतोष कुमार
बीमारी फैलने का डर बना रहता है। डेंगू और मलेरिया से बचाव के लिए समय रहते कार्रवाई जरूरी है। जब तक गड्ढे नहीं भरे जाते, तब तक नियमित रूप से दवा का छिड़काव होना चाहिए। -सैय्यद शहाबुद्दीन

परमजीत लाल मल

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