फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   Greno air most polluted in the country, AQI 398

देश में सबसे प्रदूषित रही ग्रेनो की हवा, एक्यूआई 398

Thu, 14 Jan 2021 12:24 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 14 Jan 2021 12:24 AM IST
विज्ञापन
Greno air most polluted in the country, AQI 398
नोएडा के सेक्टर- 18 अंडरपास के पास सुबह 11 बजे छाई धुंध।
देश में सबसे प्रदूषित रही ग्रेनो की हवा, एक्यूआई 398
विज्ञापन

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा का वायु प्रदूषण बेकाबू हो गया है। बुधवार को ग्रेटर नोएडा देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 398 पहुंच गया है, जो डार्क रेड जोन से महज दो अंक दूर है। वहीं, 348 एक्यूआई के साथ नोएडा भी रेड जोन में पहुंच गया है। नोएडा देश का पांचवां सबसे प्रदूषित शहर रहा। लोगों का कहना है कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) कार्रवाई करने के बजाय कारणों की समीक्षा कर रहा है।
दस दिन पहले ग्रेनो की हवा काफी अच्छी हो गई थी। बारिश के कारण 5 जनवरी को एक्यूआई 120 पहुंच गया था, लेकिन इसके बाद से एक्यूआई लगातार बढ़ रहा है। 9 जनवरी को एक्यूआई 360 पहुंच गया था। इसके बाद एक्यूआई में फिर सुधार हुआ, लेकिन मंगलवार और बुधवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक अचानक फिर से बढ़ गया है। एक दिन पहले ग्रेनो देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर था। वहीं, बुधवार को पहले पायदान पर पहुंच गया। शाम 4 बजे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बुलेटिन में ग्रेनो का एक्यूआई 398 रहा। जबकि, नोएडा का एक्यूआई 348 पहुंच गया है। एक दिन पहले ग्रेनो का एक्यूआई 312 और नोएडा का एक्यूआई 278 दर्ज किया गया था।
विज्ञापन

सबसे अधिक हरियाली, फिर भी वायु प्रदूषण पड़ रहा भारी
ग्रेटर नोएडा। शहर सबसे अधिक हरियाली के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार ठंड में अधिक वायु प्रदूषण शहर की पहचान बन गया है। पिछले साल अक्तूबर से अब तक ग्रेटर नोएडा अधिकतर समय देश का पहला या दूसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। निर्माण कार्य, यातायात, कूड़ा जलाया जाना, उद्योग और धूल भरी सड़कें इसकी मुख्य वजह रहीं। साथ ही मौसम का भी असर रहा है। वहीं, यूपीपीसीबी और जिला प्रशासन ग्रेडेड रेस्पांस एक्शन प्लान का पालन कराने में भी असफल साबित रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

1- निर्माण कार्य : ग्रेटर नोएडा और ग्रेनो वेस्ट में काफी जगह निर्माण कार्य चल रहे हैं। यहां एनजीटी के नियमों का पालन नहीं किया जाता है। निर्माण साइट पर धूल उड़ रही है। अक्तूबर में ग्रेप का पालन कराने की कार्रवाई की गई थी, लेकिन दिवाली के बाद से विभाग ने कार्रवाई करनी बंद कर दी है। जबकि, ग्रेप अब भी लागू है।
2- टूटी और धूल भरीं सड़कें : शहर की सड़कों पर जगह-जगह धूल है, जो वाहनों के कारण उड़ती रहती है। ग्रेप के तहत जरूरत पड़ने पर सड़कों की धुलाई भी की जानी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। शहर में कई जगह कच्ची सड़कें है। जिन पर वाहन चलते हैं। इनको भी बंद नहीं किया गया।
3- कूड़ा नहीं उठाना और जलाना : शहर के वायु प्रदूषण में कूड़ा भी काफी हद तक जिम्मेदार है। शहर में कूड़ा निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। सड़क किनारे और खुले में कूड़ा डाला जा रहा है। रात के समय इसमें आग लगा दी जाती है। इस पर रोक नहीं लग पा रही है।
4- उद्योग : ग्रेटर नोएडा में ज्यादातर उद्योग प्रदूषण रहित हैं, लेकिन करीब 29 उद्योगों में कोयले का प्रयोग हो रहा है। साथ ही उद्योगों से निकलने वाली सल्फर और नाइट्रोजन गैस हवा को प्रदूषित कर रही है। इस समस्या का समाधान नहीं किया गया।

5- वाहनों का दबाव : शहर में वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है। इससे जाम लगना शुरू हो गया है। ग्रेनो वेस्ट में किसान चौक, ग्रेटर नोएडा में सूरजपुर टी-प्वाइंट, कुलेसरा, हल्दौनी, सुथ्याना, सीआरपीएफ कट, परी चौक, पी-3 गोलचक्कर समेत कई जगह जाम लगता है। वाहनों की संख्या बढ़ने से भी प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed