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UP: 'जिंदगी बहुत मुश्किल..', बेटे के जन्म के बाद साक्षी ने छोड़ी थी नौकरी; अब दक्ष संग 13वीं मंजिल से कूदी मां

Mon, 15 Sep 2025 01:46 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 15 Sep 2025 01:46 PM IST
सार

ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित ऐस सिटी सोसाइटी में शनिवार सुबह महिला ने बेटे के साथ 13वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या मामले में पुलिस को अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है।

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Greater Noida Suicide Sakshi had left her job after birth of her son now she jump from 13th floor with Son
Greater Noida Suicide - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित ऐस सिटी सोसाइटी में सीए की पत्नी और उनके बेटे द्वारा 13वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या किए जाने के मामले में बिसरख कोतवाली पुलिस को अब तक कोई शिकायत नहीं मिली है। वहीं परिजन ने पोस्टमॉर्टम के बाद शव को उत्तराखंड ले जाकर रविवार को अंतिम संस्कार कर दिया।
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बता दें कि शनिवार की सुबह सीए दर्पण चावला की पत्नी साक्षी चावला ने 11 साल के बेटे दक्ष चावला के साथ 13वीं मंजिल की बालकनी से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने फ्लैट के अंदर एक डायरी से सुसाइड नोट बरामद किया है। 
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इसमें आत्महत्या करने के लिए स्वयं को जिम्मेदार ठहराते हुए महिला ने इकलौते बेटे की बीमारी की परेशानी का जिक्र किया है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि सीए का पुत्र मानसिक मंदित था। कोतवाली प्रभारी मनोज सिंह का कहना है कि मामले में कोई शिकायत नहीं मिली है। 
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दो दिन पहले ही पंजाब से बेटे को दिखाकर लौटे थे परिजन
ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित ऐस सिटी सोसाइटी के ई टावर की 13वीं मंजिल पर रहने वाले सीए दर्पण चावला दो दिन पहले ही बेटे दक्ष को पंजाब से दिखाकर लौटे थे। बेटे का मानसिक विकास नहीं होने के कारण वह उसे पंजाब दिखाने के लिए गए थे।
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आईटी कंपनी में नौकरी करती थी साक्षी
उनके ही टावर में रहने वाले निवासियों ने बताया कि बच्चा ऑटिज्म बीमारी से लंबे समय से ग्रसित था। उसका शारीरिक विकास तो तेजी से हो रहा था लेकिन मानसिक विकास नहीं होने के कारण परिजन परेशान रहते थे। मां साक्षी पहले आईटी कंपनी में नौकरी करती थी लेकिन बेटा होने के बाद नौकरी छोड़ दी। वह बच्चे की देखभाल में लगी रहती थी।


 

बच्चे को शाम को नीचे सोसाइटी में टहलाने के लिए भी लेकर आते थे पिता
निवासियों ने बताया कि सोसाइटी के हर आयोजन में परिजन बच्चे के साथ ही शामिल होते थे। एओए की ओर से होने वाली एक्टिविटी में मां बच्चे को लेकर आती थी, जिससे बच्चा अन्य बच्चों के साथ घुल मिल सके। इसके साथ ही पिता बच्चे को शाम को नीचे सोसाइटी में टहलाने के लिए भी लेकर आते थे। 

 

टावर में भी वह सभी लोगों से बातचीत करती थी। उनका कहना था कि डॉक्टर ने कहा है कि बच्चा जल्दी सही हो जाएगा। इसके साथ ही परिवार पूजा पाठ के हर आयोजन में भाग लेता था। सोसाइटी में 2017 से परिवार रह रहा है।

हम दुनिया छोड़ रहे हैं सॉरी 
पुलिस को जांच में फ्लैट में एक डायरी मिली। डायरी में साक्षी ने पति दर्पण चावला के नाम लिखा था कि 'हम दुनिया छोड़ रहे हैं सॉरी'। हम तुम्हें अब और परेशान नहीं करना चाहते। हमारी वजह से तुम्हारी जिंदगी खराब न हो। हमारी मौत का जिम्मेदार कोई नहीं है। हमें माफ करना। 

 

पुलिस का कहना है कि सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग और अन्य परिस्थितियों की गहराई से जांच की जा रही है। मृतका के परिजनों और सोसाइटी निवासियों से पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले में अभी कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। 

कई डॉक्टरों को दिखाया, गुरुद्वारों में अरदास भी कराई 
परिवार के करीबी लोगों का कहना है दक्ष मानसिक रूप से बीमार था। इस वजह से उसका इलाज लंबे समय से चल रहा था। परिजनों ने कई डॉक्टरों को दिखाया। यहां तक कि गुरुद्वारों में अरदास भी कराई, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। बच्चा स्कूल नहीं जाता था और अक्सर दवाइयों पर ही निर्भर रहता था। 
 

इसी कारण उसकी मां तनाव में थी। पड़ोसी बताते हैं कि वह कई बार कहती थी कि मेरी जिंदगी बहुत मुश्किल हो गई है। पड़ोसियों का कहना है कि दक्ष बचपन से मानसिक रूप से बीमार था। वह मां-पिता के बिना घर से निकलता भी नहीं था। साक्षी और उनका परिवार सोसाइटी में शांत स्वभाव के रूप में जाना जाता था। पत्नी-पत्नी में किसी प्रकार का कोई मनमुटाव नहीं था।
 

बर्न आउट सिंड्रोम हो जाता है हावी : मनोवैज्ञानिक
जीबीयू के मनोवैज्ञानिक डॉ आनंद प्रताप सिंह ने बताया कि ऑटिज्म के शिकार बच्चों के माता-पिता पर बर्न आउट सिंड्रोम हावी हो जाता है। वह बच्चों की देखभाल करते करते थक जाते हैं। इसके कारण वह आर्थिक व सामाजिक अवसाद में जाने लगते हैं। जीवन में कुछ कर नहीं पाने के कारण वह सांसों को खत्म करने की ठान लेते हैं।

ऐसी स्थिति में माता पिता को सबसे पहले बच्चे की मनोवैज्ञानिक जांच करानी चाहिए जिससे उन्हें पता लगे कि बच्चे की बौद्धिक क्षमता कितनी है और कितना सुधार हो सकता है। यह भी पता चले कि जीवन में सकारात्मक रहने के लिए क्या क्या कदम उठाएं जा सकते हैं। उनके अनुसार, इससे जीवन जीने में आसानी मिल सकती है। यदि किसी भी अभिभावक के बच्चों के साथ ऐसा हो रहा हो तो सबसे पहले बच्चे को मनोचिकित्सक को जरूर दिखाना होगा।

यह था पूरा मामला
ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित ऐस सिटी सोसाइटी में शनिवार सुबह महिला ने बेटे के साथ 13वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। घटना में साक्षी चावला (37) और बेटे दक्ष चावला (11) की मौत हो गई। बिसरख पुलिस ने फ्लैट में मिली डायरी से सुसाइड नोट बरामद किया है। इसमें आत्महत्या करने के लिए स्वयं को जिम्मेदार ठहराते हुए महिला ने इकलौते बेटे की बीमारी की परेशानी का जिक्र किया है।

जांच में सामने आया है कि बेटा मानसिक रूप से बीमार था। इसको लेकर वह अवसाद में थी। मूलरूप से उत्तराखंड के काशीपुर निवासी दर्पण चावला गुरुग्राम स्थित कंपनी में सीए हैं। वह ऐस सिटी सोसाइटी के ई-टावर में रहते हैं। पत्नी साक्षी और बेटा दक्ष भी साथ रहते थे। दक्ष बचपन से ही मानसिक रूप से बीमार था। इसको लेकर साक्षी परेशान थी। दक्ष का उपचार भी चल रहा था।
 
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