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ग्रेटर नोएडा: आरसी की वसूली में बिल्डरों की अन्य संपत्ति हो सकती है संबद्ध

Tue, 23 Mar 2021 06:06 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा
माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा Published by: विक्रांत चतुर्वेदी Updated Tue, 23 Mar 2021 06:06 PM IST
सार

  • जिला प्रशासन की तरफ से प्रदेश सरकार को भेजा गया प्रस्ताव, मांगी मंजूरी
  • प्राधिकरण भी नहीं कर रहा अपनी जिम्मेदारी पूरी, शासन को कराया अवगत

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Greater Noida: Other assets of builders may be attached to recovery of RC
यूपी रेरा का दफ्तर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अगर बिल्डर रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) का पैसा नहीं देगा तो उनकी अन्य संपत्ति को अटैच किया जा सकता है। जिला प्रशासन इसकी तैयारी कर रहा है और इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा है। इसमें बताया गया है कि बिल्डर की संबंधित कंपनी के पास पैसा नहीं है, जिस कारण आरसी पर वसूली नहीं हो पा रही है। ऐसे में बिल्डर की अन्य संपत्ति को अटैच करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
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उत्तर प्रदेश भूसंपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) की तरफ से बड़ी संख्या में आरसी जारी की जा रही है। जो आदेश का पालन नहीं करने और अन्य मामलों में की गयी है। गौतमबुद्घ नगर में ही प्रशासन को करीब तीन अरब की एक हजार से अधिक आरसी मिल चुकी है, लेकिन अभी तक केवल दस प्रतिशत ही वसूली हो सकी है। 
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प्रशासनिक अफसरों का कहना है कि ज्यादातर आरसी में बिल्डरों के बैंक अकाउंट में पैसा नहीं है। संपत्ति भी नहीं होती है। अन्य संपत्ति को अटैच कर वसूली नहीं कर सकते। अभी केवल उसी संपत्ति से वसूली हो सकती है, जो बिल्डर की कंपनी के नाम है। निजी संपत्ति से वसूली नहीं कर सकते। इस तरह के मामलों में बिल्डरों की अन्य संपत्ति को अटैच करने का नियम होना चाहिए। क्योंकि बिल्डरों ने प्रोजेक्ट के पैसों को दूसरी जगह लगा लिया है। जिस कारण प्रोजेक्ट पूरे नहीं हो सके। सरकार को प्रस्ताव भेजकर बिल्डरों की अन्य संपत्ति को अटैच करने की मंजूरी मांगी गयी है।
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अभी तक 408 आरसी में अचैट की गयी है 188 संपत्ति प्रशासन ने यूपी रेरा की 408 आरसी में 188 अचल संपत्ति को अटैच किया है। जो 167 करोड़ रुपये की है। यह आरसी 31 बिल्डरों से संबंधित है। अन्य आरसी पर प्रशासन को वसूली करने में दिक्कत आ रही है। 

प्राधिकरण की जिम्मेदारी है प्रोजेक्ट को पूरा कराना
अफसरों ने बताया कि प्राधिकरण और बिल्डरों के बीच लीजडीड होती है। जबकि, बिल्डर और खरीदारों के बीच सब लीजडीड होती है। लीजडीड में यह व्यवस्था है कि अगर बिल्डर प्रोजेक्ट को पूरा नहीं कर सकता तो फिर प्राधिकरण उसका आवंटन निरस्त कर प्रोजेक्ट को पूरा कराएगा। ताकि खरीदारों को उनका हक मिल सके, लेकिन नोएडा, ग्रेटर नोएडा में ऐसा नहीं हो रहा है। यहां पर दोनों प्राधिकरण इस तरह की कोई कार्रवाई नहीं कर रहे है। सरकार से मांग की गयी है कि प्राधिकरण की जिम्मेदारी तय करें और लीजडीड का पालन सख्ती के साथ करना चाहिए। प्रोजेक्ट पूरा होने से खरीदारों की समस्याएं खत्म हो जाएंगी।

वेव ग्रुप की कार्रवाई का दिया उदहारण
हाल ही में नोएडा प्राधिकरण ने वेव ग्रुप की एक लाख वर्ग मीटर के एक भूखंड का आवंटन निरस्त किया था। आवंटन निरस्त करने के बाद जमीन पर कब्जा भी ले लिया है। प्रशासन ने शासन को वेव ग्रुप पर की गयी कार्रवाई का उदाहरण दिया है। कहा है कि इस तरह की कार्रवाई प्राधिकरण को सभी बिल्डरों के खिलाफ समय पर करनी चाहिए। ताकि, प्रोजेक्ट अधूरे नहीं रह सके। 

प्रोजेक्टों को पूरा कराने की जिम्मेदारी प्राधिकरण की है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। वहीं आरसी की वसूली में बिल्डरों की अन्य नाम से संपत्ति को अटैच किया जाना चाहिए। इन दोनों मुद्दों पर शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। 


सुहास एलवाई, जिलाधिकारी

नियमों के तहत केवल उसी कंपनी की संपत्ति को अटैच किया जा सकता है, जिसके नाम से आरसी जारी की गयी है, लेकिन अगर उस संपत्ति की धनराशि को दूसरी जगह डायवर्ट किया गया है तो उस स्थिति में अन्य संपत्ति को अटैच किया जाना चाहिए। इस संबंध में शासन स्तर पर बातचीत की जाएगी।
राजीव कुमार, चेयरमैन यूपी रेरा

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