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मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए जिम्स को मिली 56 एकड़ भूमि
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ग्रेटर नोएडा। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) को लंबे इंतजार के बाद मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए 56 एकड़ जमीन मिल गई है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद शनिवार को जिम्स प्रबंधक को शासन से पत्र मिल गया। संस्थान का कहना है कि जल्द ही नए भवन के निर्माण की लागत का बजट बनाकर शासन को भेजा जाएगा।
जिम्स के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि 450 करोड़ की लागत की इस जमीन के लिए संस्थान कई सालों से मांग कर रहा था। यह जमीन ग्रेनो प्राधिकरण के नाम है। प्राधिकरण से कब्जा मिलने के बाद मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए शासन से बजट मांगा जाएगा। यहां पर मेडिकल कॉलेज के छात्रों लिए कक्षाएं बनाई जाएंगी। इसके अलावा यहां सुपर स्पेशलिस्ट विभाग भी बनाए जाएंगे। अभी गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) परिसर में क्लास चल रही हैं। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के मुताबिक, मेडिकल कॉलेज को खुद भवन का स्वामी होने जरूरी है और उसमें हॉस्टल, लाइब्रेरी आवश्यक है। मौजूदा समय में जिम्स मेडिकल कॉलेज जीबीयू में चल रहा है।
टाइप वन डायबिटीज क्लीनिक शुरू
जिम्स में टाइप वन डायबिटीज (मधुमेह) क्लीनिक शुरू हो गया है। इसके अलावा डायलेसिस मशीनों की संख्या 4 से बढ़ाकर 14 कर दी गई है। जल्द ही डायलेसिस शुल्क 1500 रुपये से कम हो सकता है। वहीं, जल्द ही मरीजों को एमआरआई की सुविधा भी मिलेगी। अस्पताल में मरीज को रक्त की जरूरत पड़ने पर बाहर जाना नहीं पड़ेगा, हालांकि तीमारदारों को जिम्स के ब्लड बैंक में रक्तदान करना होगा। वहीं, स्वास्थ्य बीमाधारक मरीजों के लिए कैसलैस की सुविधा भी शुरू की जाएगी।
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जिनोम सीक्वेंसिंग लैब का 90 फीसदी काम पूरा
जिम्स में कोरोना के वैरिएंट का पता लगाने के लिए जिनोम सीक्वेंसिंग लैब बनाई जा रही है। बीएसएल-3 लैब और जिनोम सीक्वेंसिंग लैब का 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है। इसके लिए दो करोड़ का बजट पास किया गया था।
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कैंसर मरीजों के लिए ओपीडी शुरू
जिम्स में कैसर मरीजों के लिए ओपीडी शुरू हो गई है। मरीज हर शुक्रवार को 2 से 4 बजे तक इलाज के लिए पहुंच सकते हैं। यहां पर कीमोथेरेपी की सुविधा भी है, हालांकि अभी रेडियोलॉजी की सुविधा नहीं शुरू की गई है। वहीं कोरोना को बढ़ते मामले को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने 15 बेड कोविड के लिए आरक्षित किए हैं। प्राइवेट वार्ड में भर्ती मरीजों का चार्ज भी 2000 रुपये से कम करके 1000 रुपये कर दिया गया है।
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जिम्स के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि 450 करोड़ की लागत की इस जमीन के लिए संस्थान कई सालों से मांग कर रहा था। यह जमीन ग्रेनो प्राधिकरण के नाम है। प्राधिकरण से कब्जा मिलने के बाद मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए शासन से बजट मांगा जाएगा। यहां पर मेडिकल कॉलेज के छात्रों लिए कक्षाएं बनाई जाएंगी। इसके अलावा यहां सुपर स्पेशलिस्ट विभाग भी बनाए जाएंगे। अभी गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) परिसर में क्लास चल रही हैं। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के मुताबिक, मेडिकल कॉलेज को खुद भवन का स्वामी होने जरूरी है और उसमें हॉस्टल, लाइब्रेरी आवश्यक है। मौजूदा समय में जिम्स मेडिकल कॉलेज जीबीयू में चल रहा है।
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टाइप वन डायबिटीज क्लीनिक शुरू
जिम्स में टाइप वन डायबिटीज (मधुमेह) क्लीनिक शुरू हो गया है। इसके अलावा डायलेसिस मशीनों की संख्या 4 से बढ़ाकर 14 कर दी गई है। जल्द ही डायलेसिस शुल्क 1500 रुपये से कम हो सकता है। वहीं, जल्द ही मरीजों को एमआरआई की सुविधा भी मिलेगी। अस्पताल में मरीज को रक्त की जरूरत पड़ने पर बाहर जाना नहीं पड़ेगा, हालांकि तीमारदारों को जिम्स के ब्लड बैंक में रक्तदान करना होगा। वहीं, स्वास्थ्य बीमाधारक मरीजों के लिए कैसलैस की सुविधा भी शुरू की जाएगी।
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जिनोम सीक्वेंसिंग लैब का 90 फीसदी काम पूरा
जिम्स में कोरोना के वैरिएंट का पता लगाने के लिए जिनोम सीक्वेंसिंग लैब बनाई जा रही है। बीएसएल-3 लैब और जिनोम सीक्वेंसिंग लैब का 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है। इसके लिए दो करोड़ का बजट पास किया गया था।
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कैंसर मरीजों के लिए ओपीडी शुरू
जिम्स में कैसर मरीजों के लिए ओपीडी शुरू हो गई है। मरीज हर शुक्रवार को 2 से 4 बजे तक इलाज के लिए पहुंच सकते हैं। यहां पर कीमोथेरेपी की सुविधा भी है, हालांकि अभी रेडियोलॉजी की सुविधा नहीं शुरू की गई है। वहीं कोरोना को बढ़ते मामले को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने 15 बेड कोविड के लिए आरक्षित किए हैं। प्राइवेट वार्ड में भर्ती मरीजों का चार्ज भी 2000 रुपये से कम करके 1000 रुपये कर दिया गया है।