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कॉलेजों के साथ मिलकर जीबीयू बनाएगा रीजनल नॉलेज क्लस्टर
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ग्रेटर नोएडा। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय ने शहर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के संसाधनों का आपस में उपयोग कर रीजनल नॉलेज क्लस्टर बनाने की योजना तैयार की है। इसके लिए विश्वविद्यालय शहर के अन्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रस्ताव बनाकर भेजने की तैयारी कर रहे हैं।
गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. रविंद्र कुमार सिन्हा ने बताया कि ग्रेटर नोएडा को उत्तर भारत में एजुकेशन हब के रूप में बनाया गया था। यहां स्थानीय स्तर पर कई विश्वविद्यालय समेत इंजीनियरिंग, प्रबंधन, आर्ट, मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग, होटल मैनेजमेंट समेत कई तरह के कोर्सेज चलाने वाले कॉलेज हैं। उन्होंने बताया कि यहां एजुकेशन वाले सेक्टरों का नाम तो नॉलेज पार्क दिया गया है, लेकिन यहां अलग-अलग विश्वविद्यालय और कॉलेज अपना शिक्षण कार्य कर रहे हैं। असल में इन विवि-कॉलेजों में नॉलेज का आदान-प्रदान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी योजना है कि सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से संपर्क कर उनकी आपस में जरूरत के आधार पर संसाधनों और डाटा का उपयोग आपस में किया जा सकता है। ऐसे में इन कॉलेजों और विश्वविद्यालय प्रबंधन के पास प्रस्ताव भेजने की योजना है।
कॉलेजों की विशेषज्ञता का दूसरों को मिल सकेगा फायदा
जीबीयू के कुलपति प्रोफेसर रविंद्र कुमार सिन्हा ने बताया कि प्रत्येक कॉलेज या विश्वविद्यालय का अपना क्षेत्र है, जिसमें उनकी विशेषज्ञता है। ऐसे में दूसरे कॉलेजों के विद्यार्थियों को इसका फायदा मिल सकेगा। विशेषकर रिसर्च और इनोवेशन में इसका उपयोग किया जा सकता है।
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दिल्ली में सफल हुई थी योजना
प्रोफेसर रविंद्र कुमार सिन्हा जीबीयू में कुलपति बनने से पहले दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर भी रहे हैं। उन्होंने इस तरह का प्रयास दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर किया था। इसमें उन्हें खासी सफलता हासिल हुई थी। इसके चलते अब वह दोबारा ग्रेटर नोएडा में भी इस तरह का रीजनल नॉलेज क्लस्टर बनाने की तैयारी में लगे हैं।
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गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. रविंद्र कुमार सिन्हा ने बताया कि ग्रेटर नोएडा को उत्तर भारत में एजुकेशन हब के रूप में बनाया गया था। यहां स्थानीय स्तर पर कई विश्वविद्यालय समेत इंजीनियरिंग, प्रबंधन, आर्ट, मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग, होटल मैनेजमेंट समेत कई तरह के कोर्सेज चलाने वाले कॉलेज हैं। उन्होंने बताया कि यहां एजुकेशन वाले सेक्टरों का नाम तो नॉलेज पार्क दिया गया है, लेकिन यहां अलग-अलग विश्वविद्यालय और कॉलेज अपना शिक्षण कार्य कर रहे हैं। असल में इन विवि-कॉलेजों में नॉलेज का आदान-प्रदान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी योजना है कि सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से संपर्क कर उनकी आपस में जरूरत के आधार पर संसाधनों और डाटा का उपयोग आपस में किया जा सकता है। ऐसे में इन कॉलेजों और विश्वविद्यालय प्रबंधन के पास प्रस्ताव भेजने की योजना है।
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कॉलेजों की विशेषज्ञता का दूसरों को मिल सकेगा फायदा
जीबीयू के कुलपति प्रोफेसर रविंद्र कुमार सिन्हा ने बताया कि प्रत्येक कॉलेज या विश्वविद्यालय का अपना क्षेत्र है, जिसमें उनकी विशेषज्ञता है। ऐसे में दूसरे कॉलेजों के विद्यार्थियों को इसका फायदा मिल सकेगा। विशेषकर रिसर्च और इनोवेशन में इसका उपयोग किया जा सकता है।
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दिल्ली में सफल हुई थी योजना
प्रोफेसर रविंद्र कुमार सिन्हा जीबीयू में कुलपति बनने से पहले दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर भी रहे हैं। उन्होंने इस तरह का प्रयास दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर किया था। इसमें उन्हें खासी सफलता हासिल हुई थी। इसके चलते अब वह दोबारा ग्रेटर नोएडा में भी इस तरह का रीजनल नॉलेज क्लस्टर बनाने की तैयारी में लगे हैं।