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Noida News: विवादों में जीबीयू, कूलर खरीद में भी लगा था घोटाले का आरोप
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नोट- ऑनलाइन न चलाई जाए
-पहले भी लगे हैं नियुक्ति व मेंटेंनेंस में गड़बड़ी और छेड़छाड़ के आरोप
-2024 में एक प्रोफेसर ने भ्रष्टाचार को लेकर सीएम को लिखा था पत्र
अंकुर त्रिपाठी
ग्रेटर नोएडा। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) का घोटालों से पुराना नाता है। भले ही नौ अप्रैल को फीस घोटाले को लेकर 12 अधिकारियों-कर्मचारियों पर एफआईआर हुई हो, लेकिन पहले भी नियुक्ति से लेकर मेंटेंनेंस में हुए घोटाले को लेकर प्रोफेसरों ने मोर्चा खोला था। वाटर कूलर की खरीद में किए गए भ्रष्टाचार का मामला लखनऊ तक पहुंच गया था। हालांकि, जीबीयू में एक तरफा राज चलने के कारण कार्रवाई की आंच किसी पर नहीं आने दी गई।
प्रो. विकास पंवार ने जिलाधिकारी के माध्यम से सीएम को भ्रष्टाचार को लेकर पत्र भी लिखा था, लेकिन उन्हें ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। उन्होंने तत्कालीन कुलपति आरके सिन्हा व कुलसचिव डॉ. विश्वास त्रिपाठी पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने बताया कि 2020 में ही छात्र बताते थे कि फीस जमा होने के बाद भी नहीं जमा होने की बात कही जाती है। बैलेंस शीट भी वेबसाइट पर नहीं डाली जाती थी।
नियुक्ति के नाम पर पैसे लेने का आरोप
प्रो. विकास पंवार ने बताया कि नियुक्ति के नाम पर मोटा पैसा लोगों से लिया गया। उनसे वादा किया गया था कि उन्हें स्थाई करवा दिया जाएगा, लेकिन बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। उन्होंने बताया कि कोर्ट में जाने के बाद समझौता करवाकर पांच साल बाद 2020 में फिर से नियुक्ति दे दी गई। लेकिन, 2024 में जब विश्वविद्यालय की पोल खोलनी शुरू की तो बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। उनका कहना है कि टेंडर प्रथा को खत्म करके सारे काम खुद करवाए गए, जिसमें घोटाले हुए।
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डीन समेत दो पर यौन उत्पीड़न का आरोप
जीबीयू के डीन समेत दो लोगों पर एक छात्रा ने यौन उत्पीड़न का केस दर्ज कराया था। पीएचडी की छात्रा ने डीन पर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया था। उसकी बहन ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया था कि स्कूल ऑफ वोकेशनल स्टडीज एंड अप्लाइड साइंसेज के तत्कालीन डीन ने पीड़िता को कार्यालय में बुलाकर अश्लील शब्दों का इस्तेमाल कर यौन शोषण किया। जब छात्रा ने इसका विरोध किया तो डीन ने जापान में होने वाले सम्मेलन में जाने से रोकने का प्रयास किया। बाद में दबाव बनाकर छात्रा का यौन उत्पीड़न किया गया।
वर्तमान कुलपति के कार्यकाल में हुई नियुक्ति की जांच की मांग
समाजवादी छात्र सभा ने अब वर्तमान कुलपति के कार्यकाल में हुई नियुक्ति की जांच की मांग की है। अध्यक्ष मोहित नागर का आरोप है कि कुलपति ने बिना इंटरव्यू और एक्सपीरियंस वाले लोगों को भर्ती किया है। उन्होंने जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग की है।
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-पहले भी लगे हैं नियुक्ति व मेंटेंनेंस में गड़बड़ी और छेड़छाड़ के आरोप
-2024 में एक प्रोफेसर ने भ्रष्टाचार को लेकर सीएम को लिखा था पत्र
अंकुर त्रिपाठी
ग्रेटर नोएडा। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) का घोटालों से पुराना नाता है। भले ही नौ अप्रैल को फीस घोटाले को लेकर 12 अधिकारियों-कर्मचारियों पर एफआईआर हुई हो, लेकिन पहले भी नियुक्ति से लेकर मेंटेंनेंस में हुए घोटाले को लेकर प्रोफेसरों ने मोर्चा खोला था। वाटर कूलर की खरीद में किए गए भ्रष्टाचार का मामला लखनऊ तक पहुंच गया था। हालांकि, जीबीयू में एक तरफा राज चलने के कारण कार्रवाई की आंच किसी पर नहीं आने दी गई।
प्रो. विकास पंवार ने जिलाधिकारी के माध्यम से सीएम को भ्रष्टाचार को लेकर पत्र भी लिखा था, लेकिन उन्हें ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। उन्होंने तत्कालीन कुलपति आरके सिन्हा व कुलसचिव डॉ. विश्वास त्रिपाठी पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने बताया कि 2020 में ही छात्र बताते थे कि फीस जमा होने के बाद भी नहीं जमा होने की बात कही जाती है। बैलेंस शीट भी वेबसाइट पर नहीं डाली जाती थी।
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नियुक्ति के नाम पर पैसे लेने का आरोप
प्रो. विकास पंवार ने बताया कि नियुक्ति के नाम पर मोटा पैसा लोगों से लिया गया। उनसे वादा किया गया था कि उन्हें स्थाई करवा दिया जाएगा, लेकिन बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। उन्होंने बताया कि कोर्ट में जाने के बाद समझौता करवाकर पांच साल बाद 2020 में फिर से नियुक्ति दे दी गई। लेकिन, 2024 में जब विश्वविद्यालय की पोल खोलनी शुरू की तो बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। उनका कहना है कि टेंडर प्रथा को खत्म करके सारे काम खुद करवाए गए, जिसमें घोटाले हुए।
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डीन समेत दो पर यौन उत्पीड़न का आरोप
जीबीयू के डीन समेत दो लोगों पर एक छात्रा ने यौन उत्पीड़न का केस दर्ज कराया था। पीएचडी की छात्रा ने डीन पर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया था। उसकी बहन ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया था कि स्कूल ऑफ वोकेशनल स्टडीज एंड अप्लाइड साइंसेज के तत्कालीन डीन ने पीड़िता को कार्यालय में बुलाकर अश्लील शब्दों का इस्तेमाल कर यौन शोषण किया। जब छात्रा ने इसका विरोध किया तो डीन ने जापान में होने वाले सम्मेलन में जाने से रोकने का प्रयास किया। बाद में दबाव बनाकर छात्रा का यौन उत्पीड़न किया गया।
वर्तमान कुलपति के कार्यकाल में हुई नियुक्ति की जांच की मांग
समाजवादी छात्र सभा ने अब वर्तमान कुलपति के कार्यकाल में हुई नियुक्ति की जांच की मांग की है। अध्यक्ष मोहित नागर का आरोप है कि कुलपति ने बिना इंटरव्यू और एक्सपीरियंस वाले लोगों को भर्ती किया है। उन्होंने जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग की है।