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Noida News: सिलाई से सैलून तक अंजना बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
Tue, 11 Nov 2025 12:19 AM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
Updated Tue, 11 Nov 2025 12:19 AM IST
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अंजना कुमारी सैलून में काम करती। संवाद
नंदपुर (ऊना)। मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से हर सपना साकार किया जा सकता है। यह साबित किया है अंब में रहने वाली अंजना कुमारी (49) ने।
कांगड़ा जिला के गांव पक्का टयाला में पली-बढ़ी अंजना ने सीमित साधनों के बावजूद अपनी हिम्मत और कर्मठता से न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया बल्कि महिलाओं को भी आत्मनिर्भर जीवन की राह दिखाई।
सिलाई से आत्मनिर्भरता का सफर शुरू हुआ। अंजना के पिता रत्न चंद एक सफल व्यवसायी थे। बचपन से ही वे जरूरतमंद बच्चों की फीस, किताबें और कपड़े देने जैसे कार्यों में आगे रहती थीं। इसी सेवा भावना ने उन्हें प्रेरित किया कि वह खुद भी आत्मनिर्भर बने और अन्य महिलाओं को भी सशक्त करें।
सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण लेकर उन्होंने अपने घर पर ही प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया और महिलाओं को रोजगार का हुनर सिखाया। जब सरकार की ओर से प्रत्येक पंचायत में मुफ्त सिलाई प्रशिक्षण केंद्र खोले गए तो अंजना ने अपने जीवन की दिशा बदलने का फैसला किया और कदम रखा सौंदर्य एवं सैलून के क्षेत्र में।
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उन्होंने पंजाब के फगवाड़ा से दो वर्ष का ब्यूटी और हेयर प्रशिक्षण लिया, फिर मुंबई से दो वर्ष का उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद चंडीगढ़ के एक प्रतिष्ठित सैलून में कार्य कर अनुभव अर्जित किया।
अपने भाई, जो उस समय ऊना में एक्साइज विभाग में कार्यरत थे, से चर्चा के बाद उन्होंने जिला ऊना में सैलून खोलने का निश्चय किया। धर्मशाला, कांगड़ा और ऊना का निरीक्षण करने के बाद जब उन्हें पता चला कि अंब में कोई अच्छा सैलून नहीं है तो उन्होंने यहीं वर्ष 2003 में बॉम्बे ब्यूटी पार्लर की स्थापना की।
शुरुआती दिनों में समाज की सोच उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। शाम के बाद बस सुविधा न होने के कारण उन्हें प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओं को खुद घर छोड़ना पड़ता था। बावजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी।
धीरे-धीरे उनके कार्य ने लोगों की सोच बदल दी। आज अंब क्षेत्र में दर्जनों सैलून चल रहे हैं, जहां महिलाएं आत्मनिर्भर होकर कार्य कर रही हैं।
आज अंजना कुमारी के सैलून में 16 महिलाएं कार्यरत हैं। वे गरीब परिवारों की लड़कियों को निशुल्क प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्रदान करती हैं। उनके प्रयासों से अब तक सैकड़ों युवतियां अपने पैरों पर खड़ी हो चुकी हैं।
अपने उत्कृष्ट कार्य के लिए अंजना को कई सामाजिक मंचों पर प्रेरणास्रोत महिला उद्यमी के रूप में सम्मानित किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा देखना ही मेरे जीवन का सबसे बड़ा पुरस्कार है। संवाद
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कांगड़ा जिला के गांव पक्का टयाला में पली-बढ़ी अंजना ने सीमित साधनों के बावजूद अपनी हिम्मत और कर्मठता से न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया बल्कि महिलाओं को भी आत्मनिर्भर जीवन की राह दिखाई।
सिलाई से आत्मनिर्भरता का सफर शुरू हुआ। अंजना के पिता रत्न चंद एक सफल व्यवसायी थे। बचपन से ही वे जरूरतमंद बच्चों की फीस, किताबें और कपड़े देने जैसे कार्यों में आगे रहती थीं। इसी सेवा भावना ने उन्हें प्रेरित किया कि वह खुद भी आत्मनिर्भर बने और अन्य महिलाओं को भी सशक्त करें।
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सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण लेकर उन्होंने अपने घर पर ही प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया और महिलाओं को रोजगार का हुनर सिखाया। जब सरकार की ओर से प्रत्येक पंचायत में मुफ्त सिलाई प्रशिक्षण केंद्र खोले गए तो अंजना ने अपने जीवन की दिशा बदलने का फैसला किया और कदम रखा सौंदर्य एवं सैलून के क्षेत्र में।
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उन्होंने पंजाब के फगवाड़ा से दो वर्ष का ब्यूटी और हेयर प्रशिक्षण लिया, फिर मुंबई से दो वर्ष का उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद चंडीगढ़ के एक प्रतिष्ठित सैलून में कार्य कर अनुभव अर्जित किया।
अपने भाई, जो उस समय ऊना में एक्साइज विभाग में कार्यरत थे, से चर्चा के बाद उन्होंने जिला ऊना में सैलून खोलने का निश्चय किया। धर्मशाला, कांगड़ा और ऊना का निरीक्षण करने के बाद जब उन्हें पता चला कि अंब में कोई अच्छा सैलून नहीं है तो उन्होंने यहीं वर्ष 2003 में बॉम्बे ब्यूटी पार्लर की स्थापना की।
शुरुआती दिनों में समाज की सोच उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। शाम के बाद बस सुविधा न होने के कारण उन्हें प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओं को खुद घर छोड़ना पड़ता था। बावजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी।
धीरे-धीरे उनके कार्य ने लोगों की सोच बदल दी। आज अंब क्षेत्र में दर्जनों सैलून चल रहे हैं, जहां महिलाएं आत्मनिर्भर होकर कार्य कर रही हैं।
आज अंजना कुमारी के सैलून में 16 महिलाएं कार्यरत हैं। वे गरीब परिवारों की लड़कियों को निशुल्क प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्रदान करती हैं। उनके प्रयासों से अब तक सैकड़ों युवतियां अपने पैरों पर खड़ी हो चुकी हैं।
अपने उत्कृष्ट कार्य के लिए अंजना को कई सामाजिक मंचों पर प्रेरणास्रोत महिला उद्यमी के रूप में सम्मानित किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा देखना ही मेरे जीवन का सबसे बड़ा पुरस्कार है। संवाद