अच्छी परवरिश के लिए विदेशी पिता को मिली बच्चे की सुपुर्दगी

Noida Bureauनोएडा ब्यूरो Updated Sat, 31 Oct 2020 12:42 AM IST
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की एक महिला को 11 वर्षीय बेटे की कस्टडी कीनिया और ब्रिटेन की दोहरी नागरिकता वाले भारतीय मूल के उसके पिता को देने का आदेश दिया। हालांकि कोर्ट ने आदेश इस शर्त के साथ दिया कि पिता कीनिया की अदालत से ‘मिरर ऑर्डर’ लेगा, जिसमें मां को बेटे से नियमित रूप से मिलने की इजाजत होगी।
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जस्टिस यूयू ललित की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने बहुमत के आधार पर दिए फैसले में कहा, बच्चे को पिता को सौंपना उसके सर्वोत्तम हित में होगा। जस्टिस ललित व जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने पाया, बच्चा अपने पिता के कीनिया और ब्रिटेन स्थित बड़े पारिवारिक व्यवसाय का उत्तराधिकारी है। यह बच्चे के लिए जरूरी होगा कि वह उस देश की संस्कृति और परंपरा को आत्मसात करे, जहां वह वयस्क के रूप में रहेगा। 11 वर्षों तक मां की निगरानी में रहने के बाद बच्चा समग्र विकास के लिए पिता से संरक्षण व देखभाल प्राप्त करने का हकदार है।
कोर्ट ने महिला की दलीलों को खारिज कर दिया कि उसका पति नस्लवादी है और अत्यधिक शराब पीता है। महिला ने पति पर बेवफाई के अलावा लंबित आपराधिक मुकदमे का हवाला दिया था। पति के खिलाफ एक कुदरती हादसे से संबंधित केस लंबित है, जिसमें 48 लोगों की मौत हो गई थी। पीठ ने पाया कि परिवार अदालत और दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला के आरोप को सही नहीं पाया था। पीठ ने हालांकि कहा, इसका अर्थ यह नहीं कि मां का बेटे से मिलने का अधिकार खत्म हो जाएगा। मां को दिल्ली या कीनिया में वार्षिक छुट्टियों के आधे समय तक अस्थायी सुपुर्दगी मलेगी। सप्ताहांत में उसे वीडियो कांफ्रेंस से बच्चे तक पहुंच मिलेगी। जस्टिस हेमंत गुप्ता ने बहुमत से असहमति जताते हुए कहा, चूंकि बच्चा 11 वर्षों में भारत में पला-बढ़ा है, ऐसे में उसको बिना किसी दोस्त के कीनिया भेजने से उसमें शारीरिक और मनोवैज्ञानिक नुकसान होने का खतरा हो सकता है।
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क्या है मिरर ऑर्डर
मिरर आर्डर पारित कराने का मकसद यह सुनिश्चित कराना होगा कि जिस देश में बच्चे को शिफ्ट किया जा रहा है, वहां के न्यायालय को भारत की अदालत द्वारा दी गई व्यवस्था के बारे में जानकारी हो। इस तरह का आदेश मां के हितों की रक्षा भी करेगा, जिन्हें अपने बच्चे का साथ खोना पड़ रहा है।
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