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Noida News: अधिक ब्याज वसूलने पर फाइनेंस कंपनी पर 5 हजार का हर्जाना
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अधिक ब्याज वसूलने पर फाइनेंस कंपनी पर 5 हजार का हर्जाना
- उपभोक्ता आयोग का आदेश, मानिसक संताप के भी पांच हजार देने होंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। लोन देने के दौरान तय ब्याज दर से अधिक धनराशि वसूलना कंपनी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने फाइनेंस कंपनी को तय दर पर ही ब्याज राशि वसूलने का आदेश दिया है। साथ ही पांच हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया है।
गाजियाबाद के विजयनगर स्थिति आम्रपाली एक्सपायर निवासी क्षितिज एस चौहान ने 2016 में इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से संपत्ति पर 2789762 रुपये का लोन लिया था। वहीं फाइनेंस कंपनी ने उपभोक्ता की अपने माध्यम से एक बीमा पॉलिसी भी एचडीएफसी से करा दी। उनको 25882 रुपये प्रतिमाह की दर से 240 किश्तें 20 साल तक देनी थी। लोन की धनराशि पर 9.40 प्रतिशत सालाना वार्षिक ब्याज की दर से फाइनेंस कंपनी को अदा करना था। उपभोक्ता लोन की किश्तें बिना देरी के निर्धारित तारीख को अदा करता रहा। हालांकि फाइनेंस कंपनी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के निर्देश का उल्लंघन कर मनमाने तरीके से अधिक ब्याज वसूलने लगी। किश्तें 240 से बढ़ाकर 343 कर दी गईं। इससे तंग आकर उन्होंने किश्त रोक दीं। साथ ही जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में वाद दायर किया। सुनवाई के दौरान फाइनेंस कंपनी ने अपना पक्ष नहीं रखा। अब आयोग ने हर्जाना सहित कंपनी को आदेश दिया है कि वह लोन की धनराशि को 9.40 प्रतिशत ब्याज दर पर ले। साथ ही मानसिक संताप के 5 हजार रुपये भी उपभोक्ता को अदा करे।
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- उपभोक्ता आयोग का आदेश, मानिसक संताप के भी पांच हजार देने होंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। लोन देने के दौरान तय ब्याज दर से अधिक धनराशि वसूलना कंपनी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने फाइनेंस कंपनी को तय दर पर ही ब्याज राशि वसूलने का आदेश दिया है। साथ ही पांच हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया है।
गाजियाबाद के विजयनगर स्थिति आम्रपाली एक्सपायर निवासी क्षितिज एस चौहान ने 2016 में इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से संपत्ति पर 2789762 रुपये का लोन लिया था। वहीं फाइनेंस कंपनी ने उपभोक्ता की अपने माध्यम से एक बीमा पॉलिसी भी एचडीएफसी से करा दी। उनको 25882 रुपये प्रतिमाह की दर से 240 किश्तें 20 साल तक देनी थी। लोन की धनराशि पर 9.40 प्रतिशत सालाना वार्षिक ब्याज की दर से फाइनेंस कंपनी को अदा करना था। उपभोक्ता लोन की किश्तें बिना देरी के निर्धारित तारीख को अदा करता रहा। हालांकि फाइनेंस कंपनी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के निर्देश का उल्लंघन कर मनमाने तरीके से अधिक ब्याज वसूलने लगी। किश्तें 240 से बढ़ाकर 343 कर दी गईं। इससे तंग आकर उन्होंने किश्त रोक दीं। साथ ही जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में वाद दायर किया। सुनवाई के दौरान फाइनेंस कंपनी ने अपना पक्ष नहीं रखा। अब आयोग ने हर्जाना सहित कंपनी को आदेश दिया है कि वह लोन की धनराशि को 9.40 प्रतिशत ब्याज दर पर ले। साथ ही मानसिक संताप के 5 हजार रुपये भी उपभोक्ता को अदा करे।
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