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Noida News: एफडीडीआई के छात्रों ने कचरे से तैयार किया डॉग शेल्टर
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फोटो-- -- --
-पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले चार तरह के कचरे से कर रहे निर्माण
-छात्रों ने वेस्ट मेटेरियल से तैयार किए कई आकर्षक उत्पाद
-कचरे के निस्तारण कर रहे लेदर लाइफस्टाइल के छात्र
ऋषभ कौशल
नोएडा। शहर को पर्यावरण को कचरामुक्त बनाने के साथ साथ उसे पुन: उपयोग लायक बनाने में एफडीडीआई के छात्र सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। जहां संस्थान के बच्चों ने ऐसे चार तरह के कचरे को चुना जो सबसे पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं। इन्हे इकट्ठा करने के लिए छात्रों के पांच समूह तैयार किए गए हैं।
भारत सरकार के वाणिज्य एंव उद्योग मंत्रालय के अधीन सेक्टर 24 स्थित फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपेंट इंस्टीट्यूट (एफडीडीआई) के लेदर लाइफस्टाइल एंड प्रोडक्ट डिजाइनिंग के की फैकल्टी श्वेता कुमारी ने बताया कि एफडीडीआई समेत शहर को कचरामुक्त बनाने के लिए विभाग के बच्चों के कुल पांच समूह तैयार किए गए हैं। यह इन बच्चों को पांच तरह के कचरे को इकट्ठा कर उनसे पुन: उपयोग में लाए जाने वाले उत्पाद बनाने का कार्य शुरू किया गया है। अब तक उन्होंने कई ऐसे उत्पाद तैयार किए है, जो वेस्ट मैटेरियल से तैयार किए गए हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से टेक्सटाइल वेस्ट, ई वेस्ट, मेटल वेस्ट, प्लास्टिक वेस्ट, लेदर वेस्ट को शामिल किया गया है। विभागाध्यक्ष हिमांशू बलूनी ने आगे बताया कि इससे वह सिर्फ संस्थान ही नही बल्कि पूरे शहर के कचरे को एक स्थान पर इकट्ठा कर उन्हें पुन: उपयोग की वस्तुओं में तब्दील किया जा रहा है।
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मेटल वेस्ट से तैयार किया डॉग शेल्टर
एफडीडीआई के छात्रों के समूह आचमन गौतम, अविशी, सुक्रती, सौरवी सिंह ने बताया कि उन्होंने मेटल वेस्ट (मेटल का कचरा) से तैयार एक डॉग शेल्टर होम बनाया गया। उन्होंने बताया कि संस्थान ही नही बल्कि सेक्टर सोसाइटियों में भी डॉग की समस्या बनी रहती है। ऐसे में उनके लिए जगह जगह इसी तरह के कचरे से तैयार डॉग शेल्टर को शहर की सोसाइटियों व अन्य स्थानों पर भी रखा जा सकता है। जहां डॉग के लिए एक ठहरने का सुरक्षित स्थान मिल सकेगा। उन्होंने इस शेल्टर होम का नाम कॉजी पॉजी रखा है। उन्होंने इसे तैयार करने की विधि बताते हुए कहा कि उन्होंने संस्थान में कचरे में पड़े लोहे के ड्रम का उपयोग किया है। अन्य लोहे के सामानों को ड्रम से जोड़कर स्टैंड बनाया। इसके बाद डॉग के अनुकूल रंगों पीले और नीले रंग से ड्रम को रंगा और सुंदर कलाकृतियां भी बनाई। ड्रम के अंदर ठंडक बनी रहे, उसके लिए शेल्टर के ऊपर से विशेष वस्तु का उपयोग कर ढका गया है।
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टेक्सटाइल वेस्ट से तैयार किया जैलीफिश लैंप
एफडीडीआई के छात्रों के समूह दिव्यांश जायसाल, अनुष्का मेहरा, माधुरी, एलेन बेलिम ने मिलकर टेक्सटाइल वेस्ट (अनुपयोगी फैब्रिक) को शहरभर के टेलर्स से अनुपयोग या कचरे में फेंके जाने वाले कपड़ों को इकट्ठा कर आकर्षक लैंप तैयार किया है। उन्होंने इसका नाम जैलीफिश लैंप रखा है। छात्रों ने बताया कि इसके साथ साथ वह अन्य डिजाइन लैंप भी तैयार कर रहे हैं। जिन्हें होम डेकोर या होटल्स में भी सजाया जा सकता है। इनकी कॉस्टिंग भी आम तौर पर आने वाले लैंप के मुकाबले कम है, यही नहीं उन्हें आकर्षक कढ़ाई वाले कपड़ों से तैयार किया है। जैली फिश की तरह ही लैंप के किनारे किनारे रंग बिरंगी वेस्ट कपड़ों की लटकन बनाई गई है।
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केबल और ई वेस्ट से तैयार किया होम डेकोर
छात्रों के समूह स्वाति, सेलिन, रोमा और मांसी ने बताया कि उन्होंने केबल, एल्यूमीनियम और कॉपर की तार से एक होम डेकोर तैयार किया है। इसमें उन्होंने स्पाइडर के जालनुमा उत्पाद तैयार किया है। जहां उन्होंने ई वेस्ट यानी कॉपर के तारों को लपेटा, एल्यूमीनियम के तार और फ्यूज हो चुके बल्ब का उपयोग कर एक सुंदर आकृति वाला होम डेकोर तैयार किया है। उन्होंने बताया कि जो ई वेस्ट अक्सर किसी काम के नही रहते तो उन्हें कूड़े में फेंक दिया जाता है। इनको पुन: उपयोग में लाने के लिए यह उत्पाद तैयार किया है।
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कचरे के निस्तारण के साथ साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए एफडीडीआई के छात्र कचरे से पुन: उपयोग में लाए जाने वाले आकर्षक उत्पाद तैयार कर रहे हैं। इससे छात्रों को क्रिएटिव बनाने के साथ साथ उन्हें उद्यमिता के क्षेत्र में भी बढ़ाया जा रहा है।
-मंजू ''मन'', कार्यकारी निदेशक, एफडीडीआई नोएडा, भारत सरकार
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-पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले चार तरह के कचरे से कर रहे निर्माण
-छात्रों ने वेस्ट मेटेरियल से तैयार किए कई आकर्षक उत्पाद
-कचरे के निस्तारण कर रहे लेदर लाइफस्टाइल के छात्र
ऋषभ कौशल
नोएडा। शहर को पर्यावरण को कचरामुक्त बनाने के साथ साथ उसे पुन: उपयोग लायक बनाने में एफडीडीआई के छात्र सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। जहां संस्थान के बच्चों ने ऐसे चार तरह के कचरे को चुना जो सबसे पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं। इन्हे इकट्ठा करने के लिए छात्रों के पांच समूह तैयार किए गए हैं।
भारत सरकार के वाणिज्य एंव उद्योग मंत्रालय के अधीन सेक्टर 24 स्थित फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपेंट इंस्टीट्यूट (एफडीडीआई) के लेदर लाइफस्टाइल एंड प्रोडक्ट डिजाइनिंग के की फैकल्टी श्वेता कुमारी ने बताया कि एफडीडीआई समेत शहर को कचरामुक्त बनाने के लिए विभाग के बच्चों के कुल पांच समूह तैयार किए गए हैं। यह इन बच्चों को पांच तरह के कचरे को इकट्ठा कर उनसे पुन: उपयोग में लाए जाने वाले उत्पाद बनाने का कार्य शुरू किया गया है। अब तक उन्होंने कई ऐसे उत्पाद तैयार किए है, जो वेस्ट मैटेरियल से तैयार किए गए हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से टेक्सटाइल वेस्ट, ई वेस्ट, मेटल वेस्ट, प्लास्टिक वेस्ट, लेदर वेस्ट को शामिल किया गया है। विभागाध्यक्ष हिमांशू बलूनी ने आगे बताया कि इससे वह सिर्फ संस्थान ही नही बल्कि पूरे शहर के कचरे को एक स्थान पर इकट्ठा कर उन्हें पुन: उपयोग की वस्तुओं में तब्दील किया जा रहा है।
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मेटल वेस्ट से तैयार किया डॉग शेल्टर
एफडीडीआई के छात्रों के समूह आचमन गौतम, अविशी, सुक्रती, सौरवी सिंह ने बताया कि उन्होंने मेटल वेस्ट (मेटल का कचरा) से तैयार एक डॉग शेल्टर होम बनाया गया। उन्होंने बताया कि संस्थान ही नही बल्कि सेक्टर सोसाइटियों में भी डॉग की समस्या बनी रहती है। ऐसे में उनके लिए जगह जगह इसी तरह के कचरे से तैयार डॉग शेल्टर को शहर की सोसाइटियों व अन्य स्थानों पर भी रखा जा सकता है। जहां डॉग के लिए एक ठहरने का सुरक्षित स्थान मिल सकेगा। उन्होंने इस शेल्टर होम का नाम कॉजी पॉजी रखा है। उन्होंने इसे तैयार करने की विधि बताते हुए कहा कि उन्होंने संस्थान में कचरे में पड़े लोहे के ड्रम का उपयोग किया है। अन्य लोहे के सामानों को ड्रम से जोड़कर स्टैंड बनाया। इसके बाद डॉग के अनुकूल रंगों पीले और नीले रंग से ड्रम को रंगा और सुंदर कलाकृतियां भी बनाई। ड्रम के अंदर ठंडक बनी रहे, उसके लिए शेल्टर के ऊपर से विशेष वस्तु का उपयोग कर ढका गया है।
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टेक्सटाइल वेस्ट से तैयार किया जैलीफिश लैंप
एफडीडीआई के छात्रों के समूह दिव्यांश जायसाल, अनुष्का मेहरा, माधुरी, एलेन बेलिम ने मिलकर टेक्सटाइल वेस्ट (अनुपयोगी फैब्रिक) को शहरभर के टेलर्स से अनुपयोग या कचरे में फेंके जाने वाले कपड़ों को इकट्ठा कर आकर्षक लैंप तैयार किया है। उन्होंने इसका नाम जैलीफिश लैंप रखा है। छात्रों ने बताया कि इसके साथ साथ वह अन्य डिजाइन लैंप भी तैयार कर रहे हैं। जिन्हें होम डेकोर या होटल्स में भी सजाया जा सकता है। इनकी कॉस्टिंग भी आम तौर पर आने वाले लैंप के मुकाबले कम है, यही नहीं उन्हें आकर्षक कढ़ाई वाले कपड़ों से तैयार किया है। जैली फिश की तरह ही लैंप के किनारे किनारे रंग बिरंगी वेस्ट कपड़ों की लटकन बनाई गई है।
केबल और ई वेस्ट से तैयार किया होम डेकोर
छात्रों के समूह स्वाति, सेलिन, रोमा और मांसी ने बताया कि उन्होंने केबल, एल्यूमीनियम और कॉपर की तार से एक होम डेकोर तैयार किया है। इसमें उन्होंने स्पाइडर के जालनुमा उत्पाद तैयार किया है। जहां उन्होंने ई वेस्ट यानी कॉपर के तारों को लपेटा, एल्यूमीनियम के तार और फ्यूज हो चुके बल्ब का उपयोग कर एक सुंदर आकृति वाला होम डेकोर तैयार किया है। उन्होंने बताया कि जो ई वेस्ट अक्सर किसी काम के नही रहते तो उन्हें कूड़े में फेंक दिया जाता है। इनको पुन: उपयोग में लाने के लिए यह उत्पाद तैयार किया है।
कचरे के निस्तारण के साथ साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए एफडीडीआई के छात्र कचरे से पुन: उपयोग में लाए जाने वाले आकर्षक उत्पाद तैयार कर रहे हैं। इससे छात्रों को क्रिएटिव बनाने के साथ साथ उन्हें उद्यमिता के क्षेत्र में भी बढ़ाया जा रहा है।
-मंजू ''मन'', कार्यकारी निदेशक, एफडीडीआई नोएडा, भारत सरकार