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Noida News: समय पर फ्लैट का कब्जा न देना पड़ा भारी, 30 दिन में निर्माण पूरा करने का आदेश

Thu, 27 Aug 2026 07:17 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2026 07:17 PM IST
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Failure to hand over possession of flat on time proved costly, order to complete construction within 30 days
- जिला उपभोक्ता आयोग ने बिल्डर पर दो हजार रुपये का वाद व्यय भी लगाया
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। फ्लैट बुक कराने के दौरान किए गए वादे के मुताबिक निर्धारित समय पर कब्जा नहीं देना बिल्डर को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता आयोग ने बिल्डर को 30 दिन के भीतर फ्लैट का अधूरा निर्माण पूरा कर, पेमेंट प्लान के अनुसार बकाया राशि प्राप्त करने के बाद खरीदार को कब्जा सौंपने का आदेश दिया है। आयोग ने बिल्डर पर दो हजार रुपये का वाद व्यय भी लगाया है। मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजु शर्मा ने की।
गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित आशियाना ग्रीन्स निवासी धीरज सक्सेना ने सोलिटेयर रियल इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड के वादों पर भरोसा कर फ्लैट बुक कराया था। फ्लैट की कीमत 21 लाख 2,059 रुपये तय हुई थी। खरीदार ने बुकिंग के समय 8.18 लाख रुपये का भुगतान किया। इसके बाद बिल्डर की मांग पर 1,33,128 रुपये और जमा किए। शेष राशि का भुगतान करने से पहले धीरज सक्सेना ने बिल्डर से पेमेंट प्लान, बिल्डर-बायर एग्रीमेंट और अलॉटमेंट लेटर उपलब्ध कराने की मांग की। जनवरी 2019 में कंपनी ने उन्हें पेमेंट एग्रीमेंट उपलब्ध कराया। इसमें उल्लेख था कि खरीदार से प्राप्त राशि को अलॉटमेंट लेटर में दर्शाते हुए समायोजित किया जाएगा। इसके बाद 27 मार्च 2019 को बिल्डर-बायर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हुए।
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एग्रीमेंट के अनुसार फ्लैट का कब्जा वर्ष 2021 में दिया जाना था। साथ ही कब्जे में देरी होने पर पांच रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से क्षतिपूर्ति देने की शर्त भी थी। निर्धारित समय बीतने के बावजूद बिल्डर ने फ्लैट का कब्जा नहीं दिया। इसके बावजूद खरीदार पर लगातार भुगतान करने का दबाव बनाया जाता रहा।
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निर्माण की स्थिति और भुगतान को लेकर खरीदार ने बिल्डर से कई बार संपर्क किया, लेकिन उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला। दबाव में उसने दो लाख 25 हजार रुपये का अतिरिक्त भुगतान भी कर दिया। इसके बाद साइट पर निर्माण कार्य बंद हो गया। कई बार अनुरोध के बावजूद न तो निर्माण पूरा किया गया और न ही फ्लैट का कब्जा दिया गया। उल्टे बिल्डर की ओर से खरीदार पर पेनल्टी भी लगाई जाती रही।
परेशान होकर धीरज सक्सेना ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। सुनवाई के दौरान बिल्डर की ओर से अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया। इस पर आयोग ने मामले की एकतरफा सुनवाई की। उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आयोग ने माना कि बिल्डर ने निर्धारित शर्तों के बावजूद फ्लैट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया। आयोग ने इसे सेवा में कमी माना।

आयोग ने बिल्डर को निर्देश दिया कि वह फ्लैट का अधूरा निर्माण कार्य पूरा करे और पेमेंट प्लान के अनुसार बकाया राशि प्राप्त करने के बाद खरीदार को कब्जा सौंपे। इसके साथ ही बिल्डर को दो हजार रुपये वाद व्यय के रूप में भी देने होंगे। आदेश का पालन 30 दिन के भीतर करना होगा।
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