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Noida News: अपनों के इंतजार में पथरा गईं आंखें
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संशोधित खबर
अपनों के इंतजार में पथरा गई आंखें
- किसी ने प्रोपर्टी तो किसी ने दूसरी शादी के लिए किया दूर
- ठीक होने के बाद भी 21 महिलाओं को लेने नहीं आ रहा परिवार, अब डिप्रेशन का हो रहीं शिकार
नेहा शर्मा
नोएडा। 85 वर्षीय ओमवती हर आहट सुन इस उम्मीद के साथ गेट की ओर देखती हैं कि शायद उनका बेटा लेने आया है। जब बेटा नहीं दिखता तो आंखों में आंसू लिए हंसते हुए कहती हैं मुझे पता है वह नहीं आएगा, लेकिन मां का दिल ही ऐसा है, क्या करूं मैं। उनके यह शब्द हर किसी को भावुक कर देते हैं। इस उम्र में वह सेक्टर-34 स्थित अपना घर आश्रम में रहने को मजबूर हैं। वह अपने दर्द को छुपाने की पूरी कोशिश करती हैं, लेकिन उम्र के इस पड़ाव में उनकी धंसी हुई आंखें दर्द को बयां कर ही देती हैं। यह कहानी सिर्फ ओमवती की नहीं है। बल्कि 21 से ज्यादा ऐसी महिलाएं हैं, जिनकी आखें अपनों के इंतजार में पथरा गई हैं। वो चाहकर भी आश्रम की चार दिवारी से बाहर नहीं निकल पा रही हैं। संपत्ति, दूसरी शादी या अन्य कई कारणों से परिवार वालाें ने उन्हें एकाकी जीवन जीने के लिए छोड़ दिया है।
अपना घर आश्रम की मेडिकल स्टाफ शालू ने बताया कि 266 में से 21 महिलाएं मानसिक रूप से स्वस्थ हैं। उनके परिवार से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन वह उन्हें लेने आने के लिए तैयार नहीं हैं। हम लोगों ने यहां तक बोल दिया कि आने-जाने का खर्च आश्रम उठाने के लिए तैयार है, लेकिन उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आ रही है। यहां तक कि उन्होंने आश्रम का फोन नंबर तक ब्लॉक कर दिया है। कई बार ऐसी महिलाएं तनाव में आ जाती हैं। हम लोग इनकी काउंसलिंग करते हैं, ताकि वह डिप्रेशन का शिकार नहीं हों।
बहन ने हथिया ली संपत्ति, मां भी नहीं आ रही लेने
आश्रम में रहने वाली शांति ने बताया कि उनके पति से उनका तलाक हो गया है। उनकी बहन ने मां से संपत्ति अपने नाम करा ली है। कई बार आश्रम की ओर से उनको फोन किया गया, लेकिन कोई लेने नहीं आ रहा है। इनके पति से भी बात की गई, लेकिन उनका कहना है कि अब तलाक हो चुका है, इसलिए नहीं आएंगे। अब संस्था की ओर से इनके लिए वकील किया जा रहा है, ताकि वह अपना केस लड़ सकें।
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भाई हर बार काट देता है फोन
मोनिका कहती हैं कि उनको गाने का बहुत शौक है। लेकिन यह सब उसके घर वालों को पसंद नहीं था। शायद इसलिए वो मुझे लेने नहीं आ रहे हैं। मोनिका बताती हैं कि वो गढ़मुक्तेश्वर की रहने वाली हैं। उन्होंने कई बार भाई को फोन कर ले जाने के लिए बोला, लेकिन वह लेने नहीं आ रहा है।
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अपनों के इंतजार में पथरा गई आंखें
- किसी ने प्रोपर्टी तो किसी ने दूसरी शादी के लिए किया दूर
- ठीक होने के बाद भी 21 महिलाओं को लेने नहीं आ रहा परिवार, अब डिप्रेशन का हो रहीं शिकार
नेहा शर्मा
नोएडा। 85 वर्षीय ओमवती हर आहट सुन इस उम्मीद के साथ गेट की ओर देखती हैं कि शायद उनका बेटा लेने आया है। जब बेटा नहीं दिखता तो आंखों में आंसू लिए हंसते हुए कहती हैं मुझे पता है वह नहीं आएगा, लेकिन मां का दिल ही ऐसा है, क्या करूं मैं। उनके यह शब्द हर किसी को भावुक कर देते हैं। इस उम्र में वह सेक्टर-34 स्थित अपना घर आश्रम में रहने को मजबूर हैं। वह अपने दर्द को छुपाने की पूरी कोशिश करती हैं, लेकिन उम्र के इस पड़ाव में उनकी धंसी हुई आंखें दर्द को बयां कर ही देती हैं। यह कहानी सिर्फ ओमवती की नहीं है। बल्कि 21 से ज्यादा ऐसी महिलाएं हैं, जिनकी आखें अपनों के इंतजार में पथरा गई हैं। वो चाहकर भी आश्रम की चार दिवारी से बाहर नहीं निकल पा रही हैं। संपत्ति, दूसरी शादी या अन्य कई कारणों से परिवार वालाें ने उन्हें एकाकी जीवन जीने के लिए छोड़ दिया है।
अपना घर आश्रम की मेडिकल स्टाफ शालू ने बताया कि 266 में से 21 महिलाएं मानसिक रूप से स्वस्थ हैं। उनके परिवार से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन वह उन्हें लेने आने के लिए तैयार नहीं हैं। हम लोगों ने यहां तक बोल दिया कि आने-जाने का खर्च आश्रम उठाने के लिए तैयार है, लेकिन उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आ रही है। यहां तक कि उन्होंने आश्रम का फोन नंबर तक ब्लॉक कर दिया है। कई बार ऐसी महिलाएं तनाव में आ जाती हैं। हम लोग इनकी काउंसलिंग करते हैं, ताकि वह डिप्रेशन का शिकार नहीं हों।
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बहन ने हथिया ली संपत्ति, मां भी नहीं आ रही लेने
आश्रम में रहने वाली शांति ने बताया कि उनके पति से उनका तलाक हो गया है। उनकी बहन ने मां से संपत्ति अपने नाम करा ली है। कई बार आश्रम की ओर से उनको फोन किया गया, लेकिन कोई लेने नहीं आ रहा है। इनके पति से भी बात की गई, लेकिन उनका कहना है कि अब तलाक हो चुका है, इसलिए नहीं आएंगे। अब संस्था की ओर से इनके लिए वकील किया जा रहा है, ताकि वह अपना केस लड़ सकें।
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भाई हर बार काट देता है फोन
मोनिका कहती हैं कि उनको गाने का बहुत शौक है। लेकिन यह सब उसके घर वालों को पसंद नहीं था। शायद इसलिए वो मुझे लेने नहीं आ रहे हैं। मोनिका बताती हैं कि वो गढ़मुक्तेश्वर की रहने वाली हैं। उन्होंने कई बार भाई को फोन कर ले जाने के लिए बोला, लेकिन वह लेने नहीं आ रहा है।