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ग्रेटर नोएडा: संगठनों ने उठाई मांग, नुकसान की भरपाई और सुरक्षा सुनिश्चित करे सरकार; श्रमिकों पर कही ये बात

Fri, 17 Apr 2026 06:06 PM IST
Rahul Kumar Tiwari माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा
माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Fri, 17 Apr 2026 06:06 PM IST
सार

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में औद्योगिक संगठनों ने वेतन वृद्धि को लेकर चिंता जताई। उद्यमियों ने इसे आर्थिक बोझ बताते हुए सरकार पर दबाव में फैसला लेने का आरोप लगाया। उन्होंने सुरक्षा, राहत पैकेज और लागत कम करने के उपायों की मांग की, साथ ही पलायन की चेतावनी दी।

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entrepreneurial organizations demanded compensation from government for losses and ensuring safety In Noida
संयुक्त प्रेस वार्ता में उद्यमियों ने अपनी मांग रखी - फोटो : अमर उजाला GFX

विस्तार

औद्योगिक इकाइयों पर बढ़ते आर्थिक दबाव और हाल के दिनों में मजदूरों द्वारा नोएडा व ग्रेटर नोएडा में किए गए प्रदर्शनों के बीच वेतन वृद्धि के प्रभाव को लेकर शुक्रवार को विभिन्न औद्योगिक संगठनों ने संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित की। प्रेस क्लब स्वर्ण नगरी में आयोजित इस वार्ता में इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए), इंडियन एंटरप्रेन्योर एसोसिएशन, लघु उद्योग भारती और इकोटेक-12 एसोसिएशन के पदाधिकारी शामिल हुए। सभी संगठनों ने एक स्वर में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उद्योगों पर आर्थिक बोझ तेजी से बढ़ा है, जिससे उत्पादन, निवेश और रोजगार पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
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उद्यमियों ने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन ने दबाव में आकर वेतन वृद्धि का निर्णय लिया, जिसका सीधा असर उद्योगों की लागत पर पड़ा है। उनका कहना है कि मजदूर संगठनों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से उद्यमियों को संदेश और धमकियां भेजकर 20 हजार रुपये वेतन करने की मांग की जा रही है, जिससे उद्योगों में असुरक्षा और तनाव का माहौल बन गया है।
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लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष नरेश कुमार गुप्ता ने कहा कि किसी भी निर्णय को लागू करने से पहले उद्योग संगठनों से संवाद नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बंदूक की नोक पर फैसले मनवाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। प्रशासन और पुलिस की ओर से भी उस समय कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिखी, जब कई जगहों पर उपद्रव की स्थिति बनी।
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उन्होंने बताया कि हालिया घटनाओं में करीब 100 कंपनियों को नुकसान हुआ है, जिनमें से एक कंपनी को लगभग 80 लाख रुपये का नुकसान झेलना पड़ा। उत्पादन बाधित होने से कई ऑर्डर समय पर पूरे नहीं हो सके, जिससे उद्योगों की साख पर भी असर पड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नुकसान की भरपाई नहीं की गई तो उद्योग संगठन धरना-प्रदर्शन के लिए मजबूर होंगे। प्रेस वार्ता में सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।

उद्यमियों ने मांग की कि औद्योगिक क्षेत्रों में पर्याप्त पुलिस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की हिंसक घटना या दबाव की स्थिति न बने। उनका कहना है कि बिना सुरक्षा के उद्योग चलाना संभव नहीं है और इससे निवेशकों का भरोसा भी कमजोर होता है। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के अध्यक्ष सरबजीत सिंह ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों का असर पहले से ही उद्योगों पर पड़ रहा है। उन्होंने टैरिफ वार और अंतरराष्ट्रीय तनाव, विशेष रूप से ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष का हवाला देते हुए कहा कि इन कारणों से कच्चे माल की कीमतों और निर्यात पर असर पड़ा है।

ऐसे में अचानक वेतन वृद्धि का अतिरिक्त बोझ उद्योगों के लिए और अधिक कठिनाई पैदा कर रहा है। यदि यही स्थिति बनी रही तो कई उद्योग इकाइयां यहां से अपना कारोबार समेटने पर विचार कर सकती हैं। इससे न केवल स्थानीय रोजगार प्रभावित होगा, बल्कि प्रदेश में निवेश का माहौल भी बिगड़ सकता है। उद्यमियों ने सरकार पर कालाबाजारी रोकने में विफल रहने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि कच्चे माल और अन्य संसाधनों की कीमतों में अनियंत्रित वृद्धि हो रही है, लेकिन उस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं है।

वहीं दूसरी ओर उद्योगों पर वेतन वृद्धि का दबाव डाल दिया गया है, जिससे संतुलन बिगड़ गया है। हालिया घटनाओं से संभावित निवेशक भी भयभीत हो रहे हैं, जिससे भविष्य में नए निवेश पर असर पड़ सकता है। उद्यमियों ने सरकार से मांग की कि वह इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए उद्योगों के लिए राहत पैकेज या विशेष योजना लागू करे।


उद्यमियों ने सुझाव दिया कि वेतन वृद्धि से बढ़े आर्थिक बोझ को कम करने के लिए सरकार पीएफ या अन्य योजनाओं के माध्यम से उद्योगों को आंशिक राहत दे सकती है। इसके अलावा बिजली दरों, टैक्स और अन्य शुल्कों में भी रियायत दी जाए, ताकि उद्योगों को संभलने का अवसर मिल सके। यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो उद्योगों का पलायन शुरू हो सकता है, जिससे प्रदेश की औद्योगिक छवि और रोजगार के अवसरों पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने सरकार और प्रशासन से संवाद स्थापित कर समाधान निकालने की अपील की, ताकि उद्योग और श्रमिक दोनों के हितों का संतुलन बना रहे।
 
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