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चुनावी मुद्दा रोजगार... उद्योग फिर भी एजेंडे से बाहर

Mon, 17 Jan 2022 09:45 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 17 Jan 2022 09:45 PM IST
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Election issue employment...industry still out off the agenda
नोएडा। सत्ता दल रोजगार तो विपक्षी दल बेरोजगारी को मुद्दा बनाकर इस बार चुनावी मैदान में हैं, लेकिन रोजगार देने वाले उद्योग और उनकी समस्याएं किसी राजनीतिक दल के एजेंडे में शामिल नहीं हैं। जिस औद्योगिक जिले की पहचान विश्व पटल पर कायम है, उसके 18 हजार से ज्यादा उद्यमी इस बार भी राजनीतिक दलों की उपेक्षा से परेशान हैं। उद्यमी संगठनों का कहना है कि उद्योगों से जुड़ी तमाम समस्याएं हैं, लेकिन किसी दल ने एजेंडे में शामिल करना तो दूर आश्वासन की मीठी गोली भी नहीं दी है। उद्योग जगत में इसको लेकर खासी नाराजगी है।
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इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजीव बंसल का कहना है कि करीब 20 करोड़ आबादी वाले प्रदेश की आधी जनता लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योगों से जुड़ी है। देश-प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले एमएसएमई सेक्टर को राजनीतिक दल चुनावी एजेंडे में जगह नहीं देते। आईआईए ने प्रदेश स्तर पर इस मुद्दे को उठाया है। हमें इंतजार है कि कौन हमें कितनी तरजीह देता है। नोएडा आंत्रप्रिनियोर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विपिन मल्हन ने कहा कि देश को वाकई विकास की ऊंचाईयों तक पहुंचाना है तो उद्योग और किसान पर ध्यान देना होगा। नोएडा-ग्रेनो औद्योगिक शहर हैं, लेकिन राजनीतिक दल का झुकाव इनकी ओर नहीं हैं। उद्योगों से केवल उद्यमी नहीं बल्कि लाखों श्रमिक जुड़े हैं। प्राधिकरण बोर्ड में प्रतिनिधित्व और श्रमिकों के आवास की मांग हम उठा रहे हैं।
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एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र नाहटा बोले, एमएसएमई सेक्टर सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला है। सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन किसी सरकार ने इनकी समस्याओं के समाधान का सही रास्ता नहीं तलाशा। जनपद स्तर पर उद्यमियों को सरकारी विभागों की मनमानी से काफी परेशानियां उठानी पड़ती हैं। लगातार शिकायतों के बाद भी उद्यमी की नहीं सुनी जाती है। लघु उद्योग भारती के जिलाध्यक्ष एलबी सिंह ने बताया कि देश की राजनीति आज भी जातिगत समीकरणों में उलझी है। उद्योगों और श्रमिकों की बात अब तक किसी प्रत्याशी से सुनने को नहीं मिली है। हमारा लगातार प्रयास रहा है कि उद्योगों से जुड़े मुद्दों को सरकार तक पहुंचाकर उनका समाधान कराया जाए।
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उद्योगों का चुनावी गणित
यूपी में 89.99 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) हैं, जो देश के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा हैं। यह सेक्टर 2.55 करोड़ से अधिक परिवारों का भरण-पोषण सीधे तौर पर करता है। यदि एक परिवार में सदस्यों की औसत संख्या चार मानी जाए तो प्रदेश की 10.21 करोड़ जनसंख्या यानी आधी आबादी इस सेक्टर पर निर्भर है।

प्रत्याशियों को उद्योग जगत का सुझाव
लीज होल्ड औद्योगिक भूमि को फ्री होल्ड किया जाए, उद्योगों को निर्बाध व सस्ती बिजली उपलब्ध कराना, सेक्टर-9 व 10 को सर्विस इंडस्ट्री का दर्जा दिया जाए, श्रमिकों के आवास की उचित व्यवस्था कराई जाए, विधान परिषद व प्राधिकरण बोर्ड में उद्योगों का प्रतिनिधित्व, उद्योगों को आसान वित्तीय सुविधा उपलब्ध कराना।
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