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Noida News: एकता मंच ने शासनादेश पर सवाल उठाया
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हल्द्वानी। उत्तराखंड कार्मिक एकता मंच ने वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम 2017 की धारा 3(घ) में परिभाषित गंभीर रोग में लीवर ट्रांसप्लांट एवं लीवर से संबंधित गंभीर रोग को भी सम्मिलित करने संबंधी शासनादेश पर सवाल उठाया है।
एकता मंच के संस्थापक अध्यक्ष रमेश चंद्र पांडे का कहना है कि एक्ट में परिभाषित रोगों के अलावा अन्य रोगों को बिना विधिक प्रक्रिया के सम्मिलित नहीं किया जा सकता है। उन्होंने स्थानांतरण अधिनियम 2017 के प्रावधानों का अनुपालन करने के संबंध में कार्मिक एवं सतर्कता अनुभाग-2 के स्तर से अपर सचिव नवनीत पांडे के हस्ताक्षर से छह अक्तूबर को जारी आदेश पर सवाल उठाया है।
कहा है कि एक्ट में निहित किसी भी प्रावधान को कार्यकारी आदेश के जरिए घटाया या बढ़ाया नहीं जा सकता है। पांडे ने इसे विधायी के विशेषाधिकार पर अतिक्रमण का मामला बताया है। उन्होंने उक्त आदेश के राजकीय मुद्रणालय को पृष्ठांकित नहीं होने पर भी आश्चर्य जताया है। पांडे के अनुसार भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के प्रावधानों के तहत किसी भी आदेश को जब तक राजपत्र में अधिसूचित या प्रकाशित नहीं किया जायेगा तब तक वह तकनीकी रूप से विधि की परिभाषा में नहीं आएगा।
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एकता मंच के संस्थापक अध्यक्ष रमेश चंद्र पांडे का कहना है कि एक्ट में परिभाषित रोगों के अलावा अन्य रोगों को बिना विधिक प्रक्रिया के सम्मिलित नहीं किया जा सकता है। उन्होंने स्थानांतरण अधिनियम 2017 के प्रावधानों का अनुपालन करने के संबंध में कार्मिक एवं सतर्कता अनुभाग-2 के स्तर से अपर सचिव नवनीत पांडे के हस्ताक्षर से छह अक्तूबर को जारी आदेश पर सवाल उठाया है।
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कहा है कि एक्ट में निहित किसी भी प्रावधान को कार्यकारी आदेश के जरिए घटाया या बढ़ाया नहीं जा सकता है। पांडे ने इसे विधायी के विशेषाधिकार पर अतिक्रमण का मामला बताया है। उन्होंने उक्त आदेश के राजकीय मुद्रणालय को पृष्ठांकित नहीं होने पर भी आश्चर्य जताया है। पांडे के अनुसार भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के प्रावधानों के तहत किसी भी आदेश को जब तक राजपत्र में अधिसूचित या प्रकाशित नहीं किया जायेगा तब तक वह तकनीकी रूप से विधि की परिभाषा में नहीं आएगा।
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