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Noida News: पहले मां-मां कहते सूखता नहीं था कंठ, अब पहचानने से भी गुरेज
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फोटो है
-मदर्स डे पर अपना घर आश्रम में रहने वाली माताओं ने सुनाई आपबीती
-कहा .. बच्चों ने पहचानने से इंकार कर दिया, पति बच्चों से मिलने नहीं देते
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। मां के लिए उसका बच्चा ही उसकी दुनिया होता है। त्याग, समर्पण और प्रेम की जो भावना मां के अंदर होती है वह कहीं और नहीं। यही मां जब बुजुर्ग हो जाती है तो बच्चे क्यों छोड़ आते हैं वृद्धाआश्रम? वहां रहने वाली मां अपने बच्चों के लिए क्यों तड़पती रहती है ....
सेक्टर 34 स्थित अपना घर आश्रम के अध्यक्ष नानूराम जिंदल कहते हैं कि यह आश्रम तीन साल से चल रहा है और यहां पर 294 महिलाएं रह रही हैं। इसमें करीब 40 से अधिक ऐसी महिलाएं हैं, जिनके परिवारजन उन्हें ले जाने को तैयार नहीं हैं। आश्रम में कार्यरत गायत्री और ब्यूटी ने बताया कि कई महिलाओं ने अपने घरों का पता बताया और अपने बच्चों से भी बात की। कुछ महिलाओं को हम लोग उनके घर के बाहर तक ले गए, लेकिन परिवार ने पहचानने से इंकार कर दिया। यहां से फोन करने के बाद बच्चे भी अपनी मां को लेने नहीं आते।
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बेटे ने पहचानने से इंकार कर दिया
नेहरू नगर गाजियाबाद निवासी राजबाला (86) को जनवरी 2024 में पुलिस लेकर आई थी। राजबाला कहती हैं कि मेरा बेटा गाजियाबाद के नगर निगम में नौकरी करता है। पति भी वहीं पर काम करते थे, लेकिन कई साल पहले उनकी मौत हो चुकी है। वह कहती हैं कि मेरा एक पोता भी है। मुझे अपने घर की बहुत याद आती है। चाहती हूं कि मेरा बेटा मुझे ले जाए, लेकिन मेरे बेटे ने मुझे पहचानने से इंकार कर दिया।
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बच्चों ने ले जाने से मना कर दिया
झारखंड निवासी बबिता (34) कहती हैं कि उनकी शादी छोटी उम्र में हो गई थी और अब उनका बेटा 14 साल का और बेटी 12 साल की हो गई है। पति का मेडिकल का बिजनेस है। आश्रम की स्टाफ ब्यूटी ने बताया कि बबिता को जुलाई 2023 में सेक्टर 15 मेट्रो स्टेशन के पास से पुलिस लेकर आई थी। बबिता को खाना बनाने के साथ सिलाई का काम भी आता है। स्थिति यह है कि इनके बच्चों ने भी इन्हें अपनाने से इंकार कर दिया है। ये अपने बच्चों की याद करके बहुत रोती हैं।
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मुझे मेरे बेटे के पास जाना है
हापुड़ निवासी 32 वर्षीय नेहा जुलाई 2023 में आश्रम में आई थीं। वह अपने आठ साल के बेटे कृष्ण को याद करके रोने लगती हैं। वह कहती हैं कि कोई मुझे मेरे बेटे के पास पहुंचा दे। मेरे पति भी इस दुनिया से चले गए हैं और मेरा बेटा मम्मी पापा के पास मेरठ में रहता है। मम्मी पापा बेटे से मिलने नहीं देते। नेहा बताती हैं कि मम्मी पापा ने मुझे लेने आने से मना कर दिया।
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-मदर्स डे पर अपना घर आश्रम में रहने वाली माताओं ने सुनाई आपबीती
-कहा .. बच्चों ने पहचानने से इंकार कर दिया, पति बच्चों से मिलने नहीं देते
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। मां के लिए उसका बच्चा ही उसकी दुनिया होता है। त्याग, समर्पण और प्रेम की जो भावना मां के अंदर होती है वह कहीं और नहीं। यही मां जब बुजुर्ग हो जाती है तो बच्चे क्यों छोड़ आते हैं वृद्धाआश्रम? वहां रहने वाली मां अपने बच्चों के लिए क्यों तड़पती रहती है ....
सेक्टर 34 स्थित अपना घर आश्रम के अध्यक्ष नानूराम जिंदल कहते हैं कि यह आश्रम तीन साल से चल रहा है और यहां पर 294 महिलाएं रह रही हैं। इसमें करीब 40 से अधिक ऐसी महिलाएं हैं, जिनके परिवारजन उन्हें ले जाने को तैयार नहीं हैं। आश्रम में कार्यरत गायत्री और ब्यूटी ने बताया कि कई महिलाओं ने अपने घरों का पता बताया और अपने बच्चों से भी बात की। कुछ महिलाओं को हम लोग उनके घर के बाहर तक ले गए, लेकिन परिवार ने पहचानने से इंकार कर दिया। यहां से फोन करने के बाद बच्चे भी अपनी मां को लेने नहीं आते।
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बेटे ने पहचानने से इंकार कर दिया
नेहरू नगर गाजियाबाद निवासी राजबाला (86) को जनवरी 2024 में पुलिस लेकर आई थी। राजबाला कहती हैं कि मेरा बेटा गाजियाबाद के नगर निगम में नौकरी करता है। पति भी वहीं पर काम करते थे, लेकिन कई साल पहले उनकी मौत हो चुकी है। वह कहती हैं कि मेरा एक पोता भी है। मुझे अपने घर की बहुत याद आती है। चाहती हूं कि मेरा बेटा मुझे ले जाए, लेकिन मेरे बेटे ने मुझे पहचानने से इंकार कर दिया।
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बच्चों ने ले जाने से मना कर दिया
झारखंड निवासी बबिता (34) कहती हैं कि उनकी शादी छोटी उम्र में हो गई थी और अब उनका बेटा 14 साल का और बेटी 12 साल की हो गई है। पति का मेडिकल का बिजनेस है। आश्रम की स्टाफ ब्यूटी ने बताया कि बबिता को जुलाई 2023 में सेक्टर 15 मेट्रो स्टेशन के पास से पुलिस लेकर आई थी। बबिता को खाना बनाने के साथ सिलाई का काम भी आता है। स्थिति यह है कि इनके बच्चों ने भी इन्हें अपनाने से इंकार कर दिया है। ये अपने बच्चों की याद करके बहुत रोती हैं।
मुझे मेरे बेटे के पास जाना है
हापुड़ निवासी 32 वर्षीय नेहा जुलाई 2023 में आश्रम में आई थीं। वह अपने आठ साल के बेटे कृष्ण को याद करके रोने लगती हैं। वह कहती हैं कि कोई मुझे मेरे बेटे के पास पहुंचा दे। मेरे पति भी इस दुनिया से चले गए हैं और मेरा बेटा मम्मी पापा के पास मेरठ में रहता है। मम्मी पापा बेटे से मिलने नहीं देते। नेहा बताती हैं कि मम्मी पापा ने मुझे लेने आने से मना कर दिया।