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आधुनिक तकनीक का आयुर्वेद से संगम: कड़वी सच्चाई उजागर करेगा छात्रों का ई-टंग, दवा में मिलावट का होगा खुलासा

Wed, 10 Dec 2025 10:20 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा Published by: विजय पुंडीर Updated Wed, 10 Dec 2025 10:20 AM IST
सार

स्मार्ट इंडिया हार्डवेयर हैकथॉन में इंजीनियरिंग छात्रों ने आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रयास किया है। कई राज्यों से आई टीमों ने पीएच सेंसर, स्पेक्ट्रोस्कोपी, कलरीमेट्री और पोटेंशियल डिफरेंस तकनीक का उपयोग कर ई-टंग मॉडल विकसित किया है जो स्वाद और रासायनिक प्रोफाइल को वैज्ञानिक रूप से माप सकेंगी। 

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E-tongue model will detect drug adulteration; students presented the prototype at the Smart India Hackathon
दवा में मिलावटखोरी पकड़ेगा ई-टंग मॉडल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गलगोटिया विश्वविद्यालय में आयोजित स्मार्ट इंडिया हैकथॉन में ई-टंग मॉडल छात्रों ने प्रदर्शित किया जो स्वाद के जरिये दवाइयों में हो रही मिलावट की पहचान कर लेगा। मॉडल का प्रोटोटाइप छात्रों ने तैयार किया है। मॉडल कच्ची सामग्री में ही कमियों को उजागर कर देगा। इसके साथ ही रस (स्वाद) के जरिये भी पता चल सकेगा कि दवाइयों में क्या कमी है। उन्हें मानकों के अनुसार तैयार किया गया है कि नहीं। भारत सरकार के आयुध मंत्रालय की ओर से छात्रों को समस्या के समाधान खोजने की जिम्मेदारी दी गई है।

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अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की टीम की सदस्य डॉ. शिवानी ने बताया कि स्मार्ट इंडिया हार्डवेयर हैकथॉन में इंजीनियरिंग छात्रों ने आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रयास किया है। कई राज्यों से आई टीमों ने पीएच सेंसर, स्पेक्ट्रोस्कोपी, कलरीमेट्री और पोटेंशियल डिफरेंस तकनीक का उपयोग कर ई-टंग मॉडल विकसित किया है जो स्वाद और रासायनिक प्रोफाइल को वैज्ञानिक रूप से माप सकेंगी। दवाइयों में अंतर का भी आसानी से पता चल सकेगा।

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उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में गुण, रस, वीर्य, विपाक और प्रभाव जैसी सूक्ष्म विशेषताओं का पारंपरिक मूल्यांकन अनुभवी इंद्रिय-ज्ञान पर आधारित रहा है। यह डिवाइस इन सूक्ष्म गुणों को मापनीय और पुनरुत्पादन होने योग्य डेटा में बदलने की दिशा में एक नई पहल है। उन्होंने बताया कि कच्ची औषधि की पहचान करना भी बेहद जरूरी होता है क्योंकि कच्ची औषधि से ही फाइनल उत्पाद बनता है। कच्ची औषधि की पहचान करके फाइनल उत्पाद को तैयार करेंगे।

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साक्ष्य-आधारित मानकीकरण से होगी सहूलियत
डॉ. शालिनी और हिमांशु ने बताया कि ऐसे नवाचार आयुर्वेदिक औषधियों को साक्ष्य-आधारित मानकीकरण में मजबूत करेंगे। उन्होंने बताया कि कई बार काफी दिनों तक रखी हुई दवा का स्वाद बदल जाता है। उन्हें हम उपयोग करें कि नहीं। इसकी जानकारी भी हमें आसानी से मिल सकेगी।

तीन मंत्रालयों की समस्याओं के समाधान खोज रहे छात्र
वास्तविक चुनौतियों पर देशभर की टीमें पांच दिनों तक लगातार कार्य कर रही हैं। तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सहित अनेक राज्यों से आई टीमों के 120 प्रतिभागियों में 25 मेंटर्स शामिल हैं जो प्रोटोटाइप निर्माण और समाधान विकास पर केंद्रित कार्य कर रहे हैं। हैकथॉन के माध्यम से भारतीय युवाओं की नवाचार क्षमता और विकसित भारत को दर्शाया जा रहा है। इस वर्ष स्पेस टेक, साइबर सुरक्षा, मेड-टेक, रोबोटिक्स, स्मार्ट ऑटोमेशन, एग्री-टेक जैसे अनेक क्षेत्रों की चुनौतियों पर टीमें कार्यरत हैं।

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