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Noida News: ई-रिक्शा का सड़कों पर कब्जा बना मुसीबत
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-रोजाना लगता है जाम, त्योहार के दौरान बढ़ जाती है समस्या
-जिले में पंजीकृत हैं 25 हजार से ज्यादा ई रिक्शा
माई सिटी रिपोर्टर
नोेएडा। शहर में ई-रिक्शा की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। आम तौर पर यह अंतिम छोर तक पहुंचने के लिए एक सुविधाजनक और पर्यावरण-अनुकूल माने जाते हैं, लेकिन अब शहर की मुख्य और आवासीय सड़कों इनका तेजी से बढ़ता कब्जा ट्रैफिक के लिए नासूर बनता जा रहा है। इनके कारण अक्सर सड़क दुर्घटनाएं और जाम जैसी स्थितियां बनती हैं।
इन दिनों शहर में नवरात्र जैसे त्योहारी सीजन चरम पर हैं। अब से कुछ ही समय बाद करवाचौथ, धनतेरस और दिवाली जैसे बड़े त्योहार नजदीक हैं। ऐसे में शहरवासी अपने नाते रिश्तेदारों से लेकर बाजार तक पहुंचने के लिए या तो निजी वाहनों का उपयोग करते हैं या फिर किसी भी अंतिम छोर तक पहुंचने के लिए ई-रिक्शा को सबसे किफायती और सुविधाजनक मानते हैं। लेकिन अब इनकी बढ़ती संख्या के साथ साथ रोड पर इनका जमावड़ा इतना बढ़ता जा रहा है कि शहर के सेक्टर 18 स्थित अट्टा जैसे मार्केट के आस पास लोगों का निकलना तक दूभर होता जा रहा है। हालिया तस्वीर सेक्टर 18 स्थित अट्टा मार्केट की है। इसमें साफ तौर से देखा जा सकता है कि ई रिक्शा चालकों ने अट्टा मार्केट से निकलते ही बॉटेनिकल की ओर जाने वाले मार्ग और बाईं ओर निठारी की ओर जाने वाले मार्ग को पूरी तरह से चोक कर दिया है।
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इसी साल 45 हजार के चालान, 26 हजार सीज
ट्रैफिक पुलिस के अनुसार इसी साल जनवरी से लेकर अगस्त माह विभिन्न उल्लंघनों के लिए ई-रिक्शा चालकों पर 45,000 चालान काटे जा चुके हैं। वहीं करीब 2,600 से अधिक ई-रिक्शा जब्त किए जा चुके हैं। ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई लगातार जारी है। खास तौर पर नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों पर कड़ी कार्रवाई जारी रहती है।
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वर्जन
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ई-रिक्शा को वाहन परमिट और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्रों से छूट प्राप्त है। चालक को इन्हें चलाने के लिए केवल एक वैध लाइसेंस, बीमा, पंजीकरण और फिटनेस प्रमाणपत्र की आवश्यकता होती है। मार्ग, किराए, गति सीमा या यात्री क्षमता को नियंत्रित करने वाले कोई आधिकारिक नियम नहीं हैं।
-सियाराम वर्मा, एआरटीओ प्रशासन, गौतमबुद्ध नगर
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-जिले में पंजीकृत हैं 25 हजार से ज्यादा ई रिक्शा
माई सिटी रिपोर्टर
नोेएडा। शहर में ई-रिक्शा की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। आम तौर पर यह अंतिम छोर तक पहुंचने के लिए एक सुविधाजनक और पर्यावरण-अनुकूल माने जाते हैं, लेकिन अब शहर की मुख्य और आवासीय सड़कों इनका तेजी से बढ़ता कब्जा ट्रैफिक के लिए नासूर बनता जा रहा है। इनके कारण अक्सर सड़क दुर्घटनाएं और जाम जैसी स्थितियां बनती हैं।
इन दिनों शहर में नवरात्र जैसे त्योहारी सीजन चरम पर हैं। अब से कुछ ही समय बाद करवाचौथ, धनतेरस और दिवाली जैसे बड़े त्योहार नजदीक हैं। ऐसे में शहरवासी अपने नाते रिश्तेदारों से लेकर बाजार तक पहुंचने के लिए या तो निजी वाहनों का उपयोग करते हैं या फिर किसी भी अंतिम छोर तक पहुंचने के लिए ई-रिक्शा को सबसे किफायती और सुविधाजनक मानते हैं। लेकिन अब इनकी बढ़ती संख्या के साथ साथ रोड पर इनका जमावड़ा इतना बढ़ता जा रहा है कि शहर के सेक्टर 18 स्थित अट्टा जैसे मार्केट के आस पास लोगों का निकलना तक दूभर होता जा रहा है। हालिया तस्वीर सेक्टर 18 स्थित अट्टा मार्केट की है। इसमें साफ तौर से देखा जा सकता है कि ई रिक्शा चालकों ने अट्टा मार्केट से निकलते ही बॉटेनिकल की ओर जाने वाले मार्ग और बाईं ओर निठारी की ओर जाने वाले मार्ग को पूरी तरह से चोक कर दिया है।
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इसी साल 45 हजार के चालान, 26 हजार सीज
ट्रैफिक पुलिस के अनुसार इसी साल जनवरी से लेकर अगस्त माह विभिन्न उल्लंघनों के लिए ई-रिक्शा चालकों पर 45,000 चालान काटे जा चुके हैं। वहीं करीब 2,600 से अधिक ई-रिक्शा जब्त किए जा चुके हैं। ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई लगातार जारी है। खास तौर पर नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों पर कड़ी कार्रवाई जारी रहती है।
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ई-रिक्शा को वाहन परमिट और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्रों से छूट प्राप्त है। चालक को इन्हें चलाने के लिए केवल एक वैध लाइसेंस, बीमा, पंजीकरण और फिटनेस प्रमाणपत्र की आवश्यकता होती है। मार्ग, किराए, गति सीमा या यात्री क्षमता को नियंत्रित करने वाले कोई आधिकारिक नियम नहीं हैं।
-सियाराम वर्मा, एआरटीओ प्रशासन, गौतमबुद्ध नगर