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पुलिस को चकमा देकर किसानों ने तोड़ा गेट, प्राधिकरण में घुसे

Thu, 21 Oct 2021 08:06 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 21 Oct 2021 08:06 PM IST
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Dodging the police, the farmers broke the gate, entered the authority
सेक्टर-6 प्राधिकरण को तोड़कर अंदर घुसते किसान। अमर उजाला
नोएडा। आबादी और मुआवजे समेत अन्य मांगों के लिए आंदोलन कर रहे 81 गांवों के किसानों ने बृहस्पतिवार को पुलिस को चकमा देते हुए प्राधिकरण का पश्चिमी गेट तोड़ दिया और स्वागत कक्ष तक पहुंच गए। यहां पर दो घंटे तक किसानों ने जमकर प्राधिकरण अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की। अधिकारियों ने किसानों के सामने आला अधिकारियों के साथ वार्ता का प्रस्ताव रखा तो किसान मान गए और वापस चले गए। इसके बाद सारे गेट खोले गए और अंदर फंसे दूसरे लोगों को बाहर निकला गया। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि शनिवार की वार्ता असफल हुई तो किसान उग्र आंदोलन करेंगे।
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इससे पहले हरौला बरात घर में भारतीय किसान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखवीर खलीफा के नेतृत्व में सुबह हवन कर दोपहर तक पंचायत हुई। फिर प्राधिकरण पर कूच करने का निर्णय लिया गया। करीब ढाई बजे सैकड़ों किसानों का हुजूम प्राधिकरण के लिए चल पड़ा। किसानों को पुलिस ने रोकने का प्रयास किया, लेकिन वे बढ़ते चले गए। पुलिस अधिकारी किसानों को मुख्य गेट की ओर रोकने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन किसान दूसरे गेट पर पहुंच गए। किसानों ने फिर चकमा दिया और पीछे वाले पश्चिमी गेट को तोड़कर प्राधिकरण के स्वागत कक्ष के पास पहुंच गए। पुलिस ने रोका तो वहीं बैठ गए। किसानों ने संदेश दिया कि यदि उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा तो वह प्राधिकरण की जमीन पर हल चलाकर कब्जा ले लेंगे।
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शनिवार सुबह 11 बजे होगी वार्ता
किसान नेता सुखवीर खलीफा ने कहा कि 51 दिन से किसान धरना देकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अभी तक प्राधिकरण ने कोई ठोस नीति नहीं बनाई है। अब बहलाने-फुसलाने का समय चला गया है। 45 साल से किसानों को प्राधिकरण अधिकारी फुसलाकर वापस भेज देते थे। वहीं, दो घंटे तक किसानों ने प्राधिकरण अधिकारियों को खरीखोटी सुनाई और जब किसानों ने प्राधिकरण के अंदर घुसने की घोषणा की तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस बीच एडीसीपी रणविजय सिंह ने किसानों से कहा कि प्राधिकरण के अधिकारी बात रखना चाहते हैं। ओएसडी इंदु प्रकाश और अविनाश त्रिपाठी ने किसानों से कहा कि प्राधिकरण किसानों के साथ वार्ता करके समस्याओं को दूर करना चाहता है। शनिवार को सुबह 11 बजे वार्ता में किसान आ जाएं। किसानों ने आपस में वार्ता की और रजामंदी दे दी। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को नहीं माना गया तो आंदोलन उग्र होगा। इसके बाद किसान हरौला बारात घर लौट आए।
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सीईओ का बनवाया पोस्टर, पुलिस ने छिपाया
किसानों ने प्राधिकरण की सीईओ रितु माहेश्वरी का एक पोस्टर बनवाया है। उसमें सीईओ को दिखाया गया है कि वह किसानों की आबादियों को खा गई हैं। इसके अलावा भी कई अन्य तरह के पोस्टर किसानों ने सीईओ के नाम से बनवाए हैं। हालांकि, अभद्र पोस्टर को पुलिस ने किसानों से लेकर छिपा दिया था।
प्राधिकरण में भी हल चलाने का संदेश
प्रदर्शनकारी किसान हल लेकर प्राधिकरण पर पहुंचे थे। इसे दो युवक खींच रह थे। यहां पर किसानों ने संदेश दिया कि यदि उनकी समस्या दूर नहीं की तो वह प्राधिकरण में भी हल चला सकते हैं।
गोपनीय रणनीति से पहुंचे अंदर
किसानों की गोपनीय रणनीति की जानकारी संगठन की कोर कमेटी को ही थी। कोर कमेटी के सदस्य ही आगे चल रहे थे। किसानों ने प्राधिकरण के चाराें ओर से चक्कर काटना शुरू कर दिया। ऐसे में पुलिस ने सोचा कि हर बार की तरह परिक्रमा कर किसान चले जाएंगे, लेकिन किसान रणनीति के तहत पीछे वाले गेट को तोड़ते हुए परिसर में पहुंच गए।

किसानों ने बनाए खुद के सीईओ और एसीईओ
किसान सुरेंद्र सिंह ने कहा कि यदि प्राधिकरण किसानों की समस्याओं को दूर नहीं करेगा तो संगठन ने एक बुजुर्ग महिला को सीईओ के लिए चुन रखा है जबकि कुछ युवाओं को एसीईओ और ओएसडी के अलावा तहसीलदार, लेखपाल बनाने के लिए भी तैयारी कर रखी है। यदि काम नहीं किए गए तो किसानों को ही प्राधिकरण का चार्ज संभालकर काम स्वयं करने होंगे।
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